महिला दिवस के मौके पर पटना की पिंक बस चलाने वाली महिला ड्राइवरों की संघर्ष भरी कहानी सामने आई है। आज ये महिलाएं सड़कों पर आत्मविश्वास के साथ बस चला रही हैं, लेकिन शुरुआत में उन्हें समाज के तानों और संदेह का सामना करना पड़ा।
जब इन महिलाओं ने बस चलाने की जिम्मेदारी संभाली तो कई लोगों ने उनका मजाक उड़ाया। कुछ लोगों ने यहां तक कह दिया कि “तुम लड़की हो, अगर सड़क पर बस चलाओगी तो लाशें बिछ जाएंगी।” ऐसे ताने सुनने के बावजूद इन महिलाओं ने हिम्मत नहीं हारी और अपने काम से लोगों की सोच बदलने की ठान ली।
शुरुआती दिनों में बस चलाते समय कई तरह की चुनौतियां सामने आईं। सड़क पर ट्रैफिक का दबाव, लोगों की टिप्पणियां और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं था। लेकिन इन महिलाओं ने लगातार मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर खुद को साबित किया।
आज पटना की पिंक बस सेवा महिलाओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए चलाई जा रही है। इन बसों को महिला ड्राइवर और कंडक्टर चलाती हैं, जिससे महिला यात्रियों को सुरक्षित माहौल मिलता है।
इन महिला ड्राइवरों का कहना है कि शुरुआत में उन्हें कई बार डर भी लगा, लेकिन धीरे-धीरे अनुभव बढ़ने के साथ उनका आत्मविश्वास भी मजबूत होता गया। अब वे गर्व के साथ कहती हैं कि उन्होंने समाज की सोच को बदलने में छोटी ही सही, लेकिन अहम भूमिका निभाई है।
महिला दिवस के अवसर पर इन महिलाओं की कहानी संघर्ष, साहस और आत्मनिर्भरता की मिसाल बनकर सामने आई है। उनकी सफलता यह दिखाती है कि अगर दृढ़ निश्चय हो तो महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं।












