भारत का पावर सेक्टर अगले 10 साल में तेजी से बढ़ेगा। कुल क्षमता 521 गीगावॉट से बढ़कर 1121 गीगावॉट हो सकती है, जिसमें सोलर एनर्जी, कोयला और एनर्जी स्टोरेज अहम भूमिका निभाएंगे।
Power Stocks: भारत का पावर सेक्टर इस समय बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है और आने वाले वर्षों में इसमें तेज ग्रोथ देखने को मिल सकती है। एंटीक स्टॉक ब्रोकरेज की रिपोर्ट के अनुसार, सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (CEA) के नेशनल प्लान के तहत देश की कुल बिजली उत्पादन क्षमता जनवरी 2026 के 521 गीगावॉट से बढ़कर 2036 तक 1,121 गीगावॉट तक पहुंच सकती है। इसका मतलब है कि अगले दशक में पावर सेक्टर का साइज दोगुने से भी ज्यादा हो जाएगा। यह ग्रोथ केवल उत्पादन तक सीमित नहीं होगी बल्कि पूरे एनर्जी सिस्टम को मजबूत बनाएगी।
बिजली की मांग में बनी रहेगी तेजी
भारत में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। FY21 से FY25 के बीच पीक डिमांड 190 गीगावॉट से बढ़कर करीब 250 गीगावॉट तक पहुंच गई। हालांकि FY26 में मांग में थोड़ी नरमी देखने को मिली है, जिसकी वजह लंबा मानसून और हल्की सर्दी रही। यह गिरावट अस्थायी मानी जा रही है। लंबे समय में शहरीकरण, औद्योगिकीकरण, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV), डेटा सेंटर और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे सेक्टर बिजली की मांग को लगातार बढ़ाते रहेंगे, जिससे पावर सेक्टर की ग्रोथ मजबूत बनी रहेगी।
सोलर एनर्जी का बढ़ता प्रभाव
CEA के प्लान के अनुसार, 2036 तक कुल बिजली क्षमता में लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा गैर-कोयला स्रोतों का होगा, जिसमें सोलर एनर्जी सबसे बड़ा योगदान देगी। अनुमान है कि सोलर क्षमता 509 गीगावॉट तक पहुंच सकती है, जो मौजूदा स्तर से काफी ज्यादा है। सोलर प्रोजेक्ट्स की लागत कम होने और सरकारी सपोर्ट के कारण इस सेक्टर में तेजी से निवेश बढ़ रहा है, जिससे क्लीन एनर्जी की दिशा में भारत को मजबूती मिलेगी।
कोयले की भूमिका बनी रहेगी अहम
रिन्यूएबल एनर्जी के बढ़ने के बावजूद कोयले की भूमिका खत्म नहीं होने वाली है। कोयला आधारित प्लांट्स आने वाले समय में भी कुल बिजली उत्पादन का बड़ा हिस्सा देंगे क्योंकि यह लगातार और भरोसेमंद बिजली देने का स्रोत है। रिपोर्ट के अनुसार, कोयले की क्षमता में भी बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे थर्मल पावर कंपनियों के लिए लंबे समय तक कमाई के अवसर बने रहेंगे।
एनर्जी स्टोरेज बनेगा बड़ा अवसर
जैसे-जैसे सोलर और विंड एनर्जी बढ़ेगी, वैसे-वैसे बिजली स्टोर करने की जरूरत भी बढ़ेगी। CEA के मुताबिक, 2036 तक 174 गीगावॉट की एनर्जी स्टोरेज क्षमता विकसित की जाएगी। इसमें पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट (PSP) और बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) शामिल होंगे। सरकार का ज्यादा फोकस PSP पर है क्योंकि यह लंबे समय तक बिजली स्टोर करने के लिए बेहतर और किफायती विकल्प माना जाता है। यह सेक्टर आने वाले समय में निवेश के लिए बड़ा मौका बन सकता है।
ट्रांसमिशन नेटवर्क का विस्तार जरूरी
बढ़ती बिजली उत्पादन क्षमता के साथ ट्रांसमिशन नेटवर्क को भी मजबूत करना जरूरी होगा। देशभर में बिजली पहुंचाने के लिए बड़े और आधुनिक ग्रिड की जरूरत पड़ेगी। इससे ट्रांसमिशन कंपनियों को फायदा मिलेगा। पावर ग्रिड जैसी कंपनियां इस विस्तार से लाभ उठा सकती हैं क्योंकि उनकी भूमिका बिजली को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने में अहम है।
कंपनियों पर दिखेगा सीधा असर
इस पूरे बदलाव का फायदा पावर सेक्टर की कई कंपनियों को मिलने की उम्मीद है। NTPC, Adani Power और JSW Energy जैसी कंपनियां थर्मल और एनर्जी दोनों सेगमेंट में मजबूत स्थिति में हैं। कोयले की मांग बने रहने और नए प्रोजेक्ट्स जुड़ने से इनकी कमाई में सुधार हो सकता है। वहीं CESC जैसी कंपनियां भी इस ग्रोथ का हिस्सा बन सकती हैं।
ब्रोकरेज की सलाह और टारगेट
ब्रोकरेज ने कई पावर स्टॉक्स पर खरीदारी की सलाह दी है। NTPC के लिए 423 रुपये, Adani Power के लिए 187 रुपये, JSW Energy के लिए 648 रुपये और CESC के लिए 201 रुपये का टारगेट दिया गया है। इन सभी स्टॉक्स में निवेश के लिए सकारात्मक नजरिया रखा गया है। वहीं Power Grid के लिए 326 रुपये का टारगेट रखते हुए फिलहाल होल्ड की सलाह दी गई है।









