पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के चलते वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बना हुआ है। इसी बीच, भारत ने आधिकारिक तौर पर E85 ईंधन लॉन्च कर इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
बिजनेस न्यूज़: वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी अनिश्चितता और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें फिलहाल स्थिर बनी हुई हैं। हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है, लेकिन भारतीय उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर यह है कि केंद्र सरकार का मानना है कि मौजूदा ऊंची कीमतें लंबे समय तक नहीं टिकेंगी।
इसी बीच, भारत ने वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए आधिकारिक तौर पर E85 ईंधन लॉन्च किया है। यह देश के इथेनॉल मिश्रण (Ethanol Blending) कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य आयातित तेल पर निर्भरता कम करना और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना है।
प्रमुख शहरों में पेट्रोल और डीजल के दाम

देश के प्रमुख शहरों में ईंधन की कीमतें लगभग स्थिर बनी हुई हैं। कुछ शहरों में मामूली बदलाव देखने को मिला, लेकिन व्यापक स्तर पर कोई बड़ी वृद्धि या कटौती नहीं की गई।
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शहर |
पेट्रोल की कीमत (प्रति लीटर) |
डीजल की कीमत (प्रति लीटर) |
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दिल्ली |
102.12 रुपये |
95.20 रुपये |
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मुंबई |
111.21 रुपये |
97.83 रुपये |
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कोलकाता |
113.51 रुपये |
99.82 रुपये |
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102.12 रुपये |
95.56 रुपये |
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गुरुग्राम |
103.32 रुपये |
95.51 रुपये |
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पटना |
113.35 रुपये |
99.36 रुपये |
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पुणे |
111.52 रुपये |
98.15 रुपये |
देश में पेट्रोल की सबसे ऊंची कीमतों वाले शहरों में हैदराबाद और तिरुवनंतपुरम शामिल हैं, जहां ईंधन की कीमतें राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक बनी हुई हैं।
केंद्रीय मंत्री ने दी राहत की उम्मीद
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने हाल ही में कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की मौजूदा ऊंची कीमतें बहुत लंबे समय तक बने रहने की संभावना नहीं है। उनके अनुसार, आने वाले महीनों में कीमतों में नरमी आ सकती है, जिससे भारतीय उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है।मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित किया है और कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ा है।
वैश्विक ऊर्जा बाजार पर सबसे बड़ा प्रभाव पश्चिम एशिया की स्थिति का पड़ रहा है। इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण तेल और गैस की आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं।












