फ्रांस से 114 राफेल और 6 P-8I एयरक्राफ्ट खरीदेगा भारत, रक्षा मंत्रालय ने डील पर लगाई मुहर

भारत ने फ्रांस से 114 राफेल फाइटर जेट और 6 P-8I समुद्री विमान खरीदे। रक्षा मंत्रालय ने डील की पुष्टि की। डील की पूरी जानकारी और लाभ जानें। तेजस और पुराने

भारत ने फ्रांस से 114 राफेल फाइटर जेट और 6 P-8I एयरक्राफ्ट खरीदने की योजना को मंजूरी दे दी है। यह निर्णय भारतीय वायुसेना की घटती स्क्वाड्रन ताकत और बढ़ती सुरक्षा जरूरतों को देखते हुए लिया गया। रक्षा खरीद परिषद (DAC) ने गुरुवार को इस प्रस्ताव को हरी झंडी दिखाई। 

नई दिल्ली: भारत ने फ्रांस से 114 राफेल फाइटर जेट खरीदने के बड़े प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। रक्षा खरीद परिषद (DAC) ने गुरुवार को इस शुरुआती प्रस्ताव को हरी झंडी दिखाई। इस डील की अनुमानित कीमत 3.25 लाख करोड़ रुपये है। सौदा फ्रांस की कंपनी डासॉल्ट एविएशन के साथ होगा और जल्द ही दोनों देशों के बीच वाणिज्यिक और तकनीकी बातचीत शुरू होगी।

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब भारतीय वायुसेना (IAF) की स्क्वाड्रन ताकत घटकर केवल 29 रह गई है, जबकि स्वीकृत संख्या 42 है। यह कमी पुराने विमानों की हाल की सेवानिवृत्ति की वजह से हुई है।

राफेल डील का महत्व

इस सौदे के तहत राफेल जेट्स फ्रांस की डासॉल्ट एविएशन कंपनी से खरीदे जाएंगे। भारत और फ्रांस के बीच अब वाणिज्यिक और तकनीकी बातचीत शुरू होगी, जिसके बाद डिलीवरी की प्रक्रिया प्रारंभ होगी। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब भारतीय वायुसेना (IAF) की स्क्वाड्रन ताकत घटकर केवल 29 रह गई है, जबकि स्वीकृत संख्या 42 है। पुराने विमानों की सेवानिवृत्ति की वजह से यह कमी गंभीर चिंता का विषय बन गई थी।

पिछले कुछ महीनों में MiG-21 बेड़ा पूरी तरह सेवानिवृत्त हो गया है। इसके अलावा, MiG-29 के शुरुआती वेरिएंट, जगुआर और मिराज 2000 भी जल्द ही रिटायर होने वाले हैं। इन विमानों के जाने से लड़ाकू क्षमता में कमी आई है। ऐसे में 114 नए राफेल जेट्स वायुसेना को पहले से अधिक तकनीकी रूप से सक्षम और मजबूत बनाएंगे।

P-8I एयरक्राफ्ट भी होंगे शामिल

रक्षा खरीद परिषद ने 6 P-8I एयरक्राफ्ट की खरीद को भी मंजूरी दी है। ये विमान समुद्री सर्वेillance और एंटी-सबमरीन ऑपरेशन्स के लिए इस्तेमाल होंगे। इससे भारत की समुद्री सुरक्षा क्षमता में बढ़ोतरी होगी और इंडियन ओशन क्षेत्र में सतर्कता और निगरानी मजबूत होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन और मेक इन इंडिया पहल पर विशेष जोर दिया है। 

राफेल सौदे में भी भारत की स्थानीय कंपनियां पार्टनर के रूप में शामिल होंगी। शुरुआती कुछ जेट्स फ्रांस से “फ्लाई-अवे कंडीशन” में आएंगे, जबकि बाकी विमानों का निर्माण भारत में ही होगा। इससे न केवल तकनीकी क्षमता बढ़ेगी, बल्कि देश में रक्षा उत्पादन के अवसर भी मजबूत होंगे। भारत ने पहले भी 2016 में फ्रांस से 36 राफेल जेट्स खरीदे थे, जो अब पूरी तरह ऑपरेशनल हैं। राफेल की नई खेप भारतीय वायुसेना की शक्ति और तेजी बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगी।

तेजस और पुराने विमानों की जगह

इस फैसले का महत्व और बढ़ जाता है जब देखा जाए कि भारत पहले से तेजस फाइटर जेट्स का उत्पादन कर रहा है। HAL को 180 तेजस Mk-1A वेरिएंट्स का ऑर्डर मिल चुका है। तेजस, MiG-21 जैसे पुराने सोवियत विमानों की जगह ले रहा है। हालांकि, GE एयरोस्पेस की इंजन सप्लाई चेन की समस्या के कारण डिलीवरी में कुछ विलंब हुआ है।

राफेल सौदे में भी मेक इन इंडिया का बड़ा योगदान होगा, जिससे भारतीय उद्योग और तकनीकी क्षेत्र को मजबूती मिलेगी। इस कदम से देश की रक्षा उत्पादन क्षमता और आत्मनिर्भरता दोनों में वृद्धि होगी। इस डील से न केवल वायुसेना की लड़ाकू क्षमता बढ़ेगी, बल्कि पड़ोसी देशों के साथ बढ़ते तनाव के बीच भारत की रणनीतिक ताकत में भी इजाफा होगा। राफेल जेट्स अत्याधुनिक हथियारों और उन्नत टेक्नोलॉजी से लैस होंगे, जिससे भारत की एयर सुपरियॉरिटी और देश की सुरक्षा मजबूत होगी।

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