फरवरी में भारत का व्यापार घाटा तेजी से बढ़ा, निर्यात में मामूली गिरावट और आयात में 24% उछाल

फरवरी में भारत का व्यापार घाटा बढ़कर 27.1 अरब डॉलर तक पहुंचा। निर्यात मामूली घटा, आयात 24% बढ़ा। पश्चिम एशिया तनाव और घरेलू मांग का प्रभाव।

फरवरी में भारत का व्यापार घाटा तेजी से बढ़कर 27.1 अरब डॉलर हो गया। निर्यात में मामूली गिरावट और आयात में 24% उछाल मुख्य कारण हैं। पश्चिम एशिया संकट और घरेलू मांग इस बढ़ोतरी में योगदान दे रहे हैं।

New Delhi: भारत का व्यापार घाटा फरवरी महीने में बढ़कर 27.1 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। वाणिज्य मंत्रालय के सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, इस दौरान देश के निर्यात में मामूली गिरावट देखी गई, जबकि आयात में तेज बढ़ोतरी हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और घरेलू मांग में तेजी के कारण यह स्थिति बनी है।

निर्यात में मामूली गिरावट

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी में भारत का वस्तु निर्यात 0.81 प्रतिशत घटकर 36.61 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। पिछले वर्ष इसी अवधि में निर्यात थोड़ा अधिक था। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी तनाव और अनिश्चितताओं के कारण कई क्षेत्रों में निर्यात पर दबाव बना हुआ है। प्रमुख वस्तुएं जैसे पेट्रोलियम उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स और कृषि वस्तुएं निर्यात में मामूली गिरावट का सामना कर रही हैं।

आयात में 24 प्रतिशत की उछाल

दूसरी ओर, फरवरी में आयात में 24.11 प्रतिशत की तेज बढ़ोतरी देखी गई। इस दौरान कुल आयात 63.71 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया, जबकि फरवरी 2025 में यह 51.33 अरब डॉलर था। आयात में यह तेजी मुख्य रूप से कच्चे तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स और रॉ मैटेरियल्स की बढ़ती मांग के कारण हुई। इसके परिणामस्वरूप फरवरी का व्यापार घाटा 27.1 अरब डॉलर तक बढ़ गया, जो पिछले साल की तुलना में लगभग दोगुना है।

चालू वित्त वर्ष में निर्यात और आयात का ट्रेंड

वाणिज्य सचिव Rajesh Agrawal ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 के अप्रैल से फरवरी तक देश का निर्यात 1.84 प्रतिशत बढ़कर 402.93 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। वहीं आयात इसी अवधि में 8.53 प्रतिशत बढ़कर 713.53 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया। यह संकेत है कि घरेलू मांग और वैश्विक परिस्थितियों के कारण आयात की गति निर्यात की तुलना में तेज रही।

पश्चिम एशिया संकट का प्रभाव

सरकार ने चेताया है कि मार्च में निर्यात के सामने और चुनौतियां आ सकती हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण लॉजिस्टिक्स और व्यापार मार्ग प्रभावित हो रहे हैं। विशेष रूप से Strait of Hormuz जैसे अहम समुद्री मार्गों पर व्यवधान की स्थिति बनी हुई है, जिससे वैश्विक व्यापार और परिवहन लागत पर असर पड़ रहा है।

28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू होने के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया। इसका सीधा असर तेल की आपूर्ति और निर्यात मार्गों पर पड़ा। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह तनाव लंबे समय तक बना रहा, तो भारत के व्यापार घाटे और बढ़ सकते हैं।

निर्यात के लिए संभावित अवसर

हालांकि, सरकार का कहना है कि भारत का निर्यात संतोषजनक प्रदर्शन कर रहा है। नए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स और विभिन्न देशों में मांग बढ़ने से भारतीय वस्तुओं के निर्यात में सुधार की संभावना बनी हुई है। प्रमुख सेक्टर जैसे फार्मा, टेक्सटाइल और ज्वैलरी निर्यात में अग्रणी बने हुए हैं।

घरेलू उत्पादन बढ़ाना जरूरी

विशेषज्ञों का सुझाव है कि बढ़ते व्यापार घाटे को नियंत्रित करने के लिए भारत को आयात पर नियंत्रण और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना होगा। ऊर्जा और कच्चे माल के लिए वैकल्पिक स्रोत तलाशने की जरूरत है। इसके साथ ही लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चैन को मजबूत करना भी आवश्यक है।

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