उत्तर प्रदेश की Allahabad High Court ने संभल जिले में मस्जिद में केवल 20 लोगों को नमाज पढ़ने की अनुमति देने वाले प्रशासनिक आदेश को रद्द कर दिया है।
प्रयागराज: उत्तर प्रदेश की Allahabad High Court ने संभल प्रशासन द्वारा मस्जिद में नमाज पढ़ने पर लगाए गए आदेश को रद्द कर दिया है। संभल प्रशासन ने सुरक्षा का हवाला देते हुए मस्जिद में केवल 20 लोगों को नमाज पढ़ने की अनुमति दी थी। सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने संभल के डीएम और एसपी को सुरक्षा सुनिश्चित न कर पाने पर कड़ी फटकार लगाई थी और कहा था कि अगर सुरक्षा देने में विफल रहते हैं तो उन्हें इस्तीफा देने पर विचार करना चाहिए। इसके बाद कोर्ट ने मामले में आदेश जारी कर प्रशासन के उस आदेश को रद्द कर दिया।
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रशासन को सभी नमाज पढ़ने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी और यदि किसी भी तरह से नमाज पढ़ने में बाधा डाली जाती है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस आदेश से धार्मिक अभ्यास में बाधा न आने और सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में स्पष्ट मार्गदर्शन मिला है।
क्या था मामला?

यह मामला मुनाजिर खान की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट में कहा कि गाटा संख्या 291 पर स्थित मस्जिद में रमजान के दौरान नमाज अदा करने से रोका जा रहा है। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि वहां सामूहिक नमाज की अनुमति नहीं दी जा रही और प्रशासन केवल 20 लोगों को नमाज अदा करने की इजाजत दे रहा है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट में बताया कि मस्जिद में अधिक लोगों को नमाज पढ़ने की अनुमति दी जानी चाहिए। इस मामले की सुनवाई जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की डिवीजन बेंच में हुई।
हाई कोर्ट ने प्रशासन को लगाई फटकार
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने संभल डीएम और एसपी को कड़ी फटकार लगाई थी। अदालत ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है। यदि डीएम और एसपी मानते हैं कि नमाजियों की संख्या बढ़ने से कानून-व्यवस्था पर असर पड़ेगा, तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए या संभल से तबादला ले लेना चाहिए।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य का दायित्व है कि वह हर समुदाय के निर्धारित स्थल पर शांतिपूर्ण प्रार्थना की व्यवस्था करे। निजी संपत्ति पर पूजा के लिए किसी अनुमति की जरूरत नहीं है। केवल सरकारी या सार्वजनिक संपत्ति पर ही अनुमति लेनी अनिवार्य है। राज्य सरकार ने दावा किया कि गाटा संख्या 291 का स्वामित्व विवादित है।
राजस्व अभिलेखों के अनुसार यह जमीन मोहन सिंह और भूराज सिंह के नाम दर्ज है। हालांकि, कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि यह किसी तरह से नमाज अदा करने वालों के अधिकार को प्रभावित नहीं कर सकता।









