पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री और कांग्रेस नेता शिवराज पाटील का 91 वर्ष की उम्र में लातूर में निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमार थे और घर पर ही उपचाररत थे। शुक्रवार सुबह 6।30 बजे उन्होंने शांतिपूर्वक अंतिम सांस ली।
Shivraj Patil: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और देश के पूर्व गृहमंत्री शिवराज पाटील चाकूरकर का 91 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है। वह पिछले कुछ समय से गंभीर रूप से बीमार चल रहे थे और लातूर स्थित अपने आवास ‘देववर’ में ही उपचाररत थे। शुक्रवार सुबह करीब 6।30 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। पाटील के निधन से कांग्रेस पार्टी, महाराष्ट्र की राजनीति और राष्ट्रीय स्तर पर भी गहरा शोक व्यक्त किया जा रहा है। उनके परिवार, समर्थकों और राजनीतिक साथियों में दुख की लहर है।
लंबी बीमारी से जूझ रहे थे पूर्व गृहमंत्री
शिवराज पाटील बीते कई महीनों से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से परेशान थे। उम्र अधिक होने के कारण उन्हें लगातार मेडिकल देखभाल की आवश्यकता थी। परिवार के सदस्यों ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने के बजाय डॉक्टरों की टीम के साथ घर पर ही इलाज जारी रखा। इसी दौरान शुक्रवार सुबह उनकी स्थिति बिगड़ी और उन्होंने शांतिपूर्वक अंतिम सांस ली। उनके परिवार ने बताया कि अंतिम समय में वह परिवार के सदस्यों के बीच ही थे।
कांग्रेस में उच्च पदों पर लंबे समय तक रहे सक्रिय
शिवराज पाटील चाकूरकर का राजनीतिक करियर छह दशकों से भी अधिक लंबा रहा। वे कांग्रेस पार्टी के उन चुनिंदा नेताओं में से थे जिन्होंने संगठन से लेकर सरकार तक कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। वे मराठवाड़ा क्षेत्र के लातूर से कई बार सांसद चुने गए। इसके अलावा, उन्होंने केंद्र सरकार में अलग-अलग मंत्रालयों की जिम्मेदारी निभाई जिनमें गृहमंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (Science & Technology) जैसे महत्वपूर्ण विभाग शामिल रहे।
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उनकी प्रशासनिक समझ, शांत स्वभाव और अनुशासन के कारण वे हमेशा कांग्रेस हाईकमान के भरोसेमंद नेताओं में गिने जाते थे। पार्टी की ओर से जारी शोक संदेश में कहा गया है कि पाटील के निधन से कांग्रेस को अपूरणीय क्षति हुई है।
लोकसभा के सभापति के रूप में भी निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
शिवराज पाटील चाकूरकर को संसद के एक अनुशासित और संवैधानिक प्रक्रियाओं को जानने वाले नेता के रूप में पहचाना जाता था। वे लोकसभा के सभापति (Speaker) पद पर भी रहे। उनका कार्यकाल संसदीय परंपराओं को मजबूती देने के लिए जाना जाता है। कई संसदीय विशेषज्ञ मानते हैं कि पाटील ने बहसों में मर्यादा बनाए रखने और सदन की कार्यवाही को सुचारू रखने में बड़ी भूमिका निभाई।
उनके कार्यकाल में सदन में कई ऐसे बिल पारित हुए जिन्होंने भारतीय लोकतंत्र को मजबूत करने में योगदान दिया। पाटील का मानना था कि संसद केवल बहस का मंच नहीं, बल्कि देश के विकास का मार्ग तैयार करने का स्थान है।
2008 मुंबई आतंकी हमले के समय थे गृहमंत्री
शिवराज पाटील के राजनीतिक जीवन का सबसे चुनौतीपूर्ण समय वर्ष 2008 रहा, जब मुंबई में देश का सबसे बड़ा आतंकी हमला हुआ। उस दौरान वे केंद्र की कांग्रेस-नीत सरकार में गृहमंत्री (Home Minister) थे। हमले ने देश को हिलाकर रख दिया था और राष्ट्रीय सुरक्षा पर बड़े सवाल उठे थे।
हमले के बाद सुरक्षा चूक को लेकर उनकी काफी आलोचना हुई। एक जिम्मेदार नेता की तरह उन्होंने हमले की नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार की और अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके इस निर्णय को उस समय कई वरिष्ठ नेताओं और राजनीतिक विश्लेषकों ने ‘Principled Stand’ बताया था।
लातूर से राजनीतिक यात्रा की शुरुआत
शिवराज पाटील ने अपनी राजनीतिक यात्रा महाराष्ट्र के लातूर जिले से शुरू की। वे 1973 से 1980 तक लातूर ग्रामीण विधानसभा सीट से विधायक रहे। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति की ओर कदम बढ़ाया और पहली बार 1980 में लोकसभा पहुंचे। इसके बाद वे कई बार जनता के प्रतिनिधि के रूप में संसद में पहुंचे।
लातूर के लोगों के बीच उनकी छवि एक शांत, सरल और जमीन से जुड़े नेता की थी। वे अपने क्षेत्र के विकास के लिए हमेशा सक्रिय रहे और ग्रामीण इलाकों में शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़क विकास के कई बड़े प्रोजेक्ट्स प्रारंभ करवाए।










