प्राइवेट अस्पतालों के खिलाफ यूपी में बड़ी कार्रवाई, 178 लाइसेंस रद्द

उत्तर प्रदेश सरकार ने नियमों के उल्लंघन के चलते 178 प्राइवेट अस्पतालों के लाइसेंस निरस्त किए। 59 अस्पतालों के लाइसेंस अपील के बाद बहाल हुए।

उत्तर प्रदेश सरकार ने 178 प्राइवेट अस्पतालों के लाइसेंस निरस्त किए। 59 अस्पतालों के लाइसेंस अपील और सुनवाई के बाद बहाल हुए। सरकार ने मरीजों के हितों की सुरक्षा और अस्पतालों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया।

UP News: उत्तर प्रदेश सरकार ने लगातार शिकायतों के बाद 178 प्राइवेट अस्पतालों के लाइसेंस निरस्त कर दिए हैं। डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने विधानसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राज्य में अस्पतालों के खिलाफ लगातार शिकायतें मिल रही थीं और इस कारण यह कार्रवाई की गई।

किस आधार पर कार्रवाई की गई

स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने बताया कि प्राइवेट अस्पतालों के खिलाफ लगभग 500 शिकायतें प्राप्त हुई थीं। इन शिकायतों के आधार पर 178 अस्पतालों के लाइसेंस निरस्त किए गए थे। हालांकि, इन अस्पतालों में से 59 के लाइसेंस अपील और आवश्यक सुनवाई के बाद बहाल कर दिए गए।

उन्होंने सदन को यह भी बताया कि नियमों का उल्लंघन कर संचालित हो रहे 281 प्राइवेट अस्पतालों के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई है। इसके अलावा 533 अस्पतालों को सील किया गया। अब तक कुल 1542 अस्पतालों को नोटिस जारी करके कहा गया है कि वे अपने कामकाज में सुधार करें।

अस्पतालों के खर्च पर सवाल

समाजवादी पार्टी के सदस्य अतुल प्रधान ने विधानसभा में सवाल उठाया कि क्या सरकार प्राइवेट अस्पतालों द्वारा मरीजों से वसूले जा रहे उच्च शुल्क, डॉक्टरों के परामर्श शुल्क और मेडिकल टेस्ट की मनमानी बढ़ोतरी को रोकने के लिए कोई योजना बना रही है।

इस पर स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि राज्य सरकार की ऐसी कोई नीति नहीं है जिससे निजी चिकित्सकों के परामर्श शुल्क और मेडिकल टेस्ट की दरों में एकरूपता सुनिश्चित की जा सके या मनमानी बढ़ोतरी को रोका जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह बाजार आधारित व्यवस्था है और सरकार इन शुल्कों को नियंत्रित नहीं कर सकती।

मुफ्त इलाज की सुविधा

ब्रजेश पाठक ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा संचालित सरकारी अस्पतालों में आम जनता को मुफ्त इलाज की सुविधा दी जा रही है। इसमें चिकित्सीय परामर्श और दवाओं सहित इलाज शामिल है।

उन्होंने बताया कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PMJAY) के तहत आयुष्मान कार्ड धारकों को एक लाख रुपये तक का इलाज नि:शुल्क उपलब्ध कराया जाता है। इसके अलावा सरकारी और निजी अस्पतालों में तय पैकेज के हिसाब से पांच लाख रुपये तक का इलाज भी कराया जा सकता है। 70 साल से अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों को आयुष्मान वय वंदना योजना के तहत अतिरिक्त लाभ दिए जाते हैं।

स्वास्थ्य मंत्री ने सदन में यह भी बताया कि सरकार अस्पतालों की निगरानी को मजबूत कर रही है और लगातार नोटिस जारी कर उन्हें नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई सिर्फ लाइसेंस रद्द करने तक सीमित नहीं है बल्कि अस्पतालों के संचालन में पारदर्शिता लाने और मरीजों के हितों की सुरक्षा करने के लिए की जा रही है।

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