प्रतापगढ़ में 52 किलोमीटर ग्रीनफील्ड बाईपास का रास्ता साफ, 330 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज

प्रतापगढ़ में 52 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड बाईपास के लिए 330 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया तेज हो गई है। किसानों को 300 करोड़ मुआवजा मिलेगा।

प्रतापगढ़ में 52 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड बाईपास के निर्माण की तैयारी तेज हो गई है। परियोजना के लिए 330 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की जाएगी, जिसके बदले किसानों को करीब 300 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाएगा।

Pratapgarh: शहर में बढ़ते ट्रैफिक दबाव और जाम की समस्या से राहत दिलाने के लिए प्रतापगढ़ में 52 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड बाईपास का निर्माण जल्द शुरू होने वाला है। इस परियोजना के तहत 47 गांवों की 330 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है। प्रशासन के अनुसार किसानों को करीब 300 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाएगा और 80 प्रतिशत जमीन मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।

प्रतापगढ़ में ट्रैफिक दबाव कम करने और सड़क कनेक्टिविटी मजबूत करने के लिए 52 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड बाईपास परियोजना पर काम जल्द शुरू होने जा रहा है। फिलहाल प्रशासन किसानों से जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी कर रहा है और इसकी साप्ताहिक निगरानी भी की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक 80 प्रतिशत जमीन मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। उम्मीद है कि अगले दो महीनों में परियोजना धरातल पर दिखाई देने लगेगी।

प्रतापगढ़ में पहले से कई प्रमुख हाईवे और एक्सप्रेसवे गुजर रहे हैं। गंगा एक्सप्रेसवे के अलावा प्रयागराज-अयोध्या हाईवे पर बढ़ते ट्रैफिक को देखते हुए शहर और बाजारों को जाम से राहत देने के लिए नए बाईपास तैयार किए जा रहे हैं। गोंडे से राजगढ़ तक 20 किलोमीटर लंबे बाईपास का काम पहले से जारी है, जिसमें लोहंगपुर से सुखपाल नगर तक का हिस्सा चालू भी हो चुका है।

47 गांवों से होकर गुजरेगा नया बाईपास

नई परियोजना रायबरेली-जौनपुर हाईवे पर पड़ने वाले लालगंज, मोहनगंज, पृथ्वीगंज और रानीगंज बाजारों को जाम से राहत देने के उद्देश्य से तैयार की जा रही है। यह दो लेन का ग्रीनफील्ड बाईपास वर्मानगर से चिरकुट्टी तक बनाया जाएगा और लालगंज, सदर तथा रानीगंज तहसील क्षेत्र से होकर गुजरेगा।

प्रशासन के अनुसार यह बाईपास करीब 47 गांवों से होकर निकलेगा। परियोजना के तहत सुगम यातायात के लिए दो फ्लाईओवर और दो अंडरपास भी बनाए जाएंगे। इसके अलावा 41 बॉक्स कलवर्ट और 33 पाइप कलवर्ट निर्माण का भी प्रस्ताव है।

भूमि अधिग्रहण पर खर्च होंगे करीब 300 करोड़ रुपये

मुख्य राजस्व अधिकारी अजय तिवारी ने बताया कि एनएच-31 पर बनने वाले इस बाईपास के लिए 330 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की जानी है। किसानों को मुआवजे के रूप में लगभग 300 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। भूमि खरीद की प्रक्रिया तेज गति से चल रही है और उम्मीद है कि इसी महीने या अगले महीने तक अधिग्रहण का काम पूरा कर लिया जाएगा।

अधिकारियों का मानना है कि बाईपास बनने के बाद शहर और बाजार क्षेत्रों में जाम की समस्या काफी हद तक कम होगी, साथ ही लंबी दूरी के वाहनों की आवाजाही भी अधिक सुगम हो सकेगी।

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