राजस्थान पंचायत चुनाव 2026: बीजेपी के बढ़ते जोश के बीच भजनलाल सरकार हुई एक्टिव मोड में

तीन राज्यों में बीजेपी की जीत के बाद राजस्थान में पंचायत व निकाय चुनाव को लेकर भजनलाल सरकार एक्टिव मोड में है। बजट घोषणाएं जमीन पर उतारने की तैयारी तेज।

तीन राज्यों में बीजेपी की जीत के बाद राजस्थान में पंचायत व निकाय चुनाव को लेकर भजनलाल शर्मा सरकार एक्टिव मोड में है। बजट घोषणाएं तेजी से जमीन पर उतारने की रणनीति तैयार की जा रही है। आगे बढ़ रही है।

उदयपुर: देश के हालिया चुनावी नतीजों और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बढ़ते आत्मविश्वास के बीच राजस्थान की राजनीति में भी तेजी आ गई है। पार्टी के कार्यकर्ताओं के उत्साह और संगठनात्मक सक्रियता का असर अब राज्य की नीतियों और प्रशासनिक फैसलों में भी दिखाई दे रहा है।

इसी माहौल के बीच राजस्थान की भजनलाल शर्मा सरकार पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों की तैयारियों को लेकर पूरी तरह “एक्टिव मोड” में आ गई है। सरकार का फोकस अब विकास कार्यों को तेज करने और बजट घोषणाओं को जमीनी स्तर पर लागू करने पर है।

पंचायत और निकाय चुनाव से पहले विकास की रफ्तार तेज

राजस्थान में प्रस्तावित पंचायत और निकाय चुनावों से पहले सरकार ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में विकास कार्यों को तेज गति से पूरा करने की रणनीति पर काम कर रही है। सरकार की कोशिश है कि चुनाव आचार संहिता लागू होने से पहले अधिकतम योजनाओं को धरातल पर उतार दिया जाए।

इस रणनीति के तहत भजनलाल सरकार का उद्देश्य यह है कि बजट घोषणाएं केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि गांव-गांव तक उनका वास्तविक लाभ पहुंचे।

“विकसित राजस्थान 2047” विजन पर फोकस

राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट को “मिड-टर्म रिपोर्ट कार्ड” के रूप में पेश करते हुए “विकसित राजस्थान 2047” के विजन को आगे बढ़ाने पर जोर दिया है।

इस विजन के तहत सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर, रोजगार, जल संसाधन और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दे रही है। राज्य में विकास की गति बढ़ाने के लिए कई बड़े वित्तीय प्रावधान किए गए हैं।

बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा निवेश

गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म के अनुसार राजस्थान का कुल बजट लगभग 6.11 लाख करोड़ रुपये का है। इसमें बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए बिजली, सड़क और पानी जैसी सुविधाओं पर 51,000 करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है।

सरकार का दावा है कि इस बजट का उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच विकास की खाई को कम करना है।

ग्रामीण विकास और कनेक्टिविटी पर विशेष जोर

पंचायत चुनावों को देखते हुए सरकार ने ग्रामीण विकास परियोजनाओं पर विशेष फोकस बढ़ा दिया है।

  • ग्रामीण कनेक्टिविटी सुधार के लिए 2000 करोड़ रुपये का प्रावधान
  • 250 ‘अटल प्रगति पथ’ परियोजनाओं के लिए 500 करोड़ रुपये
  • ‘हर घर नल’ योजना के तहत 6800 करोड़ रुपये का निवेश

इन योजनाओं का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, पानी और परिवहन सुविधाओं को बेहतर बनाना है।

शहरी विकास और स्वच्छता पर भी ध्यान

नगरीय क्षेत्रों में सरकार ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नीति लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। शहरी इलाकों में सफाई व्यवस्था, कचरा प्रबंधन और बुनियादी सुविधाओं के सुधार पर काम किया जा रहा है।

सरकार का मानना है कि शहरी मतदाताओं को बेहतर सेवाएं देकर चुनाव से पहले सकारात्मक माहौल बनाया जा सकता है।

बजट घोषणाओं के क्रियान्वयन में तेजी

सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक 2719 बजट घोषणाओं में से लगभग 2450 को पूरा किया जा चुका है। यह लगभग 90 प्रतिशत क्रियान्वयन दर को दर्शाता है।

सरकार का दावा है कि पिछले दो वर्षों में कई महत्वपूर्ण योजनाओं को जमीन पर उतारा गया है और अब उनका असर दिखाई देने लगा है।

रोजगार और निवेश पर सरकार का फोकस

राजस्थान सरकार ने रोजगार सृजन को भी अपनी प्राथमिकता में रखा है। राज्य में 1.5 लाख से अधिक नौकरियों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

इसके साथ ही “राइजिंग राजस्थान” पहल के तहत कई बड़े निवेश प्रस्तावों (MOUs) पर काम शुरू किया गया है। सरकार का दावा है कि इससे आने वाले वर्षों में राज्य में औद्योगिक विकास को गति मिलेगी।

विपक्ष पर निशाना, सरकार का दावा

जवाहर सिंह बेढ़म ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछली सरकारों में घोषणाएं तो अधिक होती थीं, लेकिन उनका क्रियान्वयन कमजोर रहता था।

उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार का फोकस केवल घोषणा नहीं, बल्कि उन्हें समयबद्ध तरीके से पूरा करने पर है। सरकार गांव-गांव पहुंचकर “विकसित राजस्थान” का संदेश दे रही है और जनता को विकास कार्यों में भागीदार बना रही है।

चुनावी रणनीति और आचार संहिता का प्रभाव

विशेषज्ञों का मानना है कि पंचायत और निकाय चुनावों से पहले सरकार की यह सक्रियता राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। हालांकि चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद नई परियोजनाओं की गति प्रभावित हो सकती है।

ऐसे में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह पहले से घोषित योजनाओं को समय पर पूरा कर सके।

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