प्रयागराज में माघ मेला प्राधिकरण द्वारा स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी किए जाने के बाद धार्मिक, सामाजिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। प्राधिकरण ने नोटिस के जरिए उनसे यह स्पष्ट करने को कहा है कि वे किस आधार पर स्वयं को ‘शंकराचार्य’ बता रहे हैं। नोटिस में साफ तौर पर 24 घंटे के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया गया है, जिससे यह मामला और भी गंभीर और संवेदनशील बन गया है।
माघ मेला प्राधिकरण की ओर से भेजे गए नोटिस में उल्लेख किया गया है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सार्वजनिक मंचों, धार्मिक आयोजनों और विभिन्न कार्यक्रमों में खुद को ‘शंकराचार्य’ के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। प्राधिकरण ने सवाल उठाया है कि यह पद उन्हें किस परंपरा, प्रक्रिया और मान्यता के तहत प्राप्त हुआ है। नोटिस में उनसे इस दावे से जुड़े दस्तावेजी प्रमाण या परंपरागत मान्यता की जानकारी भी मांगी गई है।
सूत्रों के अनुसार माघ मेला क्षेत्र में संतों, अखाड़ों और धार्मिक संस्थाओं की गतिविधियों पर प्रशासन की कड़ी नजर रहती है। मेला अवधि के दौरान किसी भी प्रकार की पहचान, पद या परंपरा को लेकर विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो, इसके लिए प्रशासन पहले से ही सतर्क रहता है। माना जा रहा है कि इसी सतर्कता के तहत यह नोटिस जारी किया गया है, ताकि किसी भी तरह की गलतफहमी या टकराव की स्थिति से बचा जा सके।
इस मामले के सामने आते ही संत समाज के भीतर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। कुछ संतों और धार्मिक विद्वानों का कहना है कि शंकराचार्य का पद सनातन परंपरा में अत्यंत प्रतिष्ठित और अनुशासित रहा है, जिसकी नियुक्ति एक तय प्रक्रिया और व्यापक मान्यता के आधार पर होती है। ऐसे में इस पद को लेकर किसी भी तरह का भ्रम दूर होना आवश्यक है। वहीं कुछ लोग इसे धार्मिक मामलों में प्रशासनिक हस्तक्षेप के तौर पर भी देख रहे हैं और सवाल उठा रहे हैं कि आस्था से जुड़े विषयों में प्रशासन की भूमिका कितनी होनी चाहिए।
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि यह नोटिस किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ कार्रवाई के उद्देश्य से नहीं, बल्कि व्यवस्था और स्पष्टता बनाए रखने के लिए जारी किया गया है। अधिकारियों के अनुसार माघ मेला जैसे विशाल धार्मिक आयोजन में लाखों श्रद्धालु आते हैं, ऐसे में किसी भी पद या पहचान को लेकर असमंजस की स्थिति पैदा होना उचित नहीं है। यदि समय सीमा के भीतर संतोषजनक जवाब मिलता है, तो आगे की प्रक्रिया उसी के अनुरूप तय की जाएगी।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से फिलहाल इस नोटिस पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन उनके समर्थकों का कहना है कि वे जल्द ही अपना पक्ष रखेंगे और प्राधिकरण के सभी सवालों का जवाब देंगे। समर्थकों का यह भी दावा है कि उनका पक्ष धार्मिक परंपराओं और मान्यताओं पर आधारित है।
कुल मिलाकर, प्रयागराज में माघ मेला प्राधिकरण का यह नोटिस एक नए विवाद की शक्ल लेता नजर आ रहा है। अब सबकी नजरें 24 घंटे की समय-सीमा पर टिकी हैं, क्योंकि उसी के बाद यह साफ होगा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से क्या जवाब आता है और इस जवाब के आधार पर प्रशासन आगे क्या कदम उठाता है।










