अररिया में सरस्वती पूजा को लेकर जिला प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। इस बार सरस्वती पूजा के आयोजन के लिए पूजा समितियों को लाइसेंस लेना अनिवार्य कर दिया गया है। बिना अनुमति के पंडाल लगाने और पूजा आयोजन करने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। प्रशासन का कहना है कि यह कदम कानून-व्यवस्था बनाए रखने और शांतिपूर्ण ढंग से पर्व संपन्न कराने के उद्देश्य से उठाया गया है।
प्रशासनिक निर्देश के अनुसार सरस्वती पूजा पंडालों में सीसीटीवी कैमरा लगाना भी जरूरी होगा। पंडाल के आसपास और मुख्य प्रवेश द्वार पर कैमरे लगाए जाएंगे, ताकि किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखी जा सके। अधिकारियों का मानना है कि सीसीटीवी से असामाजिक तत्वों पर अंकुश लगेगा और किसी भी अप्रिय स्थिति में त्वरित कार्रवाई में मदद मिलेगी।
बताया गया है कि पूजा समिति को लाइसेंस के लिए निर्धारित प्रपत्र के साथ आवेदन करना होगा, जिसमें पंडाल का स्थान, आकार, प्रतिमा की ऊंचाई, ध्वनि विस्तारक यंत्र की जानकारी और स्वयंसेवकों की संख्या जैसे विवरण देना अनिवार्य होगा। साथ ही समिति को यह भी लिखित रूप से देना होगा कि पूजा के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने और प्रशासन के निर्देशों का पालन किया जाएगा।
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि ध्वनि विस्तारक यंत्रों के उपयोग पर तय समय सीमा का सख्ती से पालन करना होगा। निर्धारित मानकों से अधिक तेज आवाज में डीजे या लाउडस्पीकर बजाने पर कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा मूर्ति विसर्जन के दौरान भी सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए दिशा-निर्देशों का पालन करना जरूरी होगा।
स्थानीय पूजा समितियों का कहना है कि नियम सख्त जरूर हैं, लेकिन यदि इससे पर्व शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से संपन्न होता है, तो वे सहयोग के लिए तैयार हैं। कई समितियों ने समय रहते लाइसेंस प्रक्रिया शुरू करने की बात कही है, ताकि अंतिम समय में किसी तरह की परेशानी न हो।
प्रशासन की ओर से यह भी कहा गया है कि संवेदनशील इलाकों में विशेष निगरानी रखी जाएगी और पुलिस बल की तैनाती बढ़ाई जाएगी। गश्ती दल लगातार भ्रमण करेगा, ताकि किसी भी तरह की अफवाह या तनाव की स्थिति को समय रहते नियंत्रित किया जा सके।
कुल मिलाकर, अररिया में इस बार सरस्वती पूजा कड़े प्रशासनिक दिशा-निर्देशों के बीच मनाई जाएगी। लाइसेंस व्यवस्था और सीसीटीवी की अनिवार्यता से प्रशासन जहां सुरक्षा को लेकर आश्वस्त नजर आ रहा है, वहीं पूजा समितियों से भी नियमों का पालन कर सहयोग करने की अपील की गई है, ताकि पर्व श्रद्धा और शांति के साथ संपन्न हो सके।











