Columbus

Premanand Maharaj का बड़ा खुलासा: घोड़े की नाल की अंगूठी पहनना सही है या गलत

Premanand Maharaj का बड़ा खुलासा: घोड़े की नाल की अंगूठी पहनना सही है या गलत

प्रेमानंद जी महाराज ने घोड़े की नाल की अंगूठी पहनने की प्रथा को अंधविश्वास बताया। उनका कहना है कि इससे किसी भी ग्रह दोष या शनि पीड़ा से मुक्ति नहीं मिलती। इसके बजाय उन्होंने भक्ति, अच्छे आचरण और ईश्वर के नाम का जप ही असली समाधान बताया, जिससे जीवन के कष्ट वास्तव में दूर हो सकते हैं।

Premanand Maharaj: शनि दोष और साढ़ेसाती से राहत पाने के लिए लोग अक्सर घोड़े की नाल की अंगूठी पहनते हैं, लेकिन संत प्रेमानंद जी महाराज ने इसे पूरी तरह गलत बताया है। उन्होंने कहा कि इस अंगूठी से कोई लाभ नहीं होता, बल्कि असली उपाय केवल ईश्वर का सच्चे मन से नाम जप और अच्छे आचरण हैं। महाराज जी ने स्पष्ट कहा कि अंधविश्वासों पर निर्भर रहने के बजाय भक्ति और धर्म पालन से ही ग्रह दोष और जीवन की कठिनाइयां दूर की जा सकती हैं।

घोड़े की नाल की अंगूठी पहनने की सच्चाई

प्रेमानंद जी महाराज ने कहा कि घोड़े की नाल की अंगूठी पहनना उचित नहीं है। उनका मानना है कि इस अंगूठी को बनाने में घोड़े को तकलीफ दी जाती है। “जो स्वयं दुख भोग रहा है, उसकी नाल से दूसरों का कष्ट कैसे दूर हो सकता है?” महाराज जी ने यही सवाल उठाया। उन्होंने बताया कि अंधविश्वास के कारण लोग इस तरह के उपाय करते हैं, जबकि असल समाधान कहीं और है।

शनि दोष से मुक्ति का असली उपाय

प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार शनि दोष, साढ़ेसाती या किसी भी ग्रह की पीड़ा से मुक्ति पाने का एकमात्र रास्ता है  ईश्वर का नाम जप और भक्ति। उन्होंने कहा कि अगर इंसान का आचरण ठीक नहीं है और वह अंगूठी पहनने या तेल चढ़ाने जैसे उपाय करता है, तो भी कोई लाभ नहीं होगा। भगवान के नाम का सच्चे मन से भजन करने और जीवन में आचरण सुधारने से ही कष्ट दूर होते हैं और ग्रह अनुकूल होते हैं।

भक्ति ही है सच्चा समाधान

महाराज जी ने कहा सब हरि के अनुचर हैं, यदि तुम श्रीकृष्ण के दास हो तो तुम्हें किसी को तेल चढ़ाने की जरूरत नहीं, स्वयं को हरि के चरणों में समर्पित कर दो। उनका संदेश साफ है कि अंधविश्वासों पर भरोसा करने के बजाय ईश्वर की भक्ति और अच्छे आचरण से ही जीवन के दुख दूर किए जा सकते हैं।

Leave a comment