पुणे मेयर चुनाव: BJP और अजित पवार के बीच ‘फ्रेंडली फाइट’, CM फडणवीस ने जताई गठबंधन में सामंजस्य की बात

पुणे मेयर चुनाव: BJP और अजित पवार के बीच ‘फ्रेंडली फाइट’, CM फडणवीस ने जताई गठबंधन में सामंजस्य की बात

महाराष्ट्र के नगर निगम चुनाव की घोषणा होते ही राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। राज्य में मुंबई (BMC) समेत कुल 29 महानगरपालिकाओं और 25 नगर निगमों के लिए मतदान की तारीख तय कर दी गई है। मतदान 15 जनवरी को होगा और परिणाम 16 जनवरी को घोषित किए जाएंगे। 

मुंबई: महाराष्ट्र में मुंबई (BMC) समेत सभी 29 महानगरपालिकाओं और 25 नगर निगम के चुनावों का ऐलान कर दिया गया है। राज्य चुनाव आयोग के अनुसार, मतदान 15 जनवरी को होगा और नतीजों की घोषणा 16 जनवरी को कर दी जाएगी। इसी के साथ सत्तारूढ़ महायुति में भी बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। पार्टी के अंदर अब आपसी लड़ाई साफ नजर आ रही है। पुणे में अपना मेयर बिठाने के लिए देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार के बीच 'फ्रेंडली फाइट' की स्थिति बनी हुई है।

पुणे में ‘फ्रेंडली फाइट’

पुणे महानगरपालिका में मेयर पद के लिए भाजपा और एनसीपी के बीच ‘फ्रेंडली फाइट’ की चर्चा हो रही है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया है कि यह मुकाबला दोनों दलों के बीच कटुता नहीं, बल्कि स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का रूप होगा। उन्होंने कहा, 

'पुणे कॉर्पोरेशन को लेकर मेरी अजित दादा (अजित पवार) से बात हुई है। हम दोनों बड़ी पार्टी हैं और पिछले पांच सालों में भाजपा ने पुणे में विकास कार्यों को आगे बढ़ाया है। अगर भाजपा और एनसीपी के बीच मुकाबला हुआ, तो यह फ्रेंडली फाइट होगी। सहयोगी दलों में कोई कटुता नहीं आएगी।'

पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ महानगरपालिका को लेकर यह मुकाबला विशेष महत्व रखता है। दोनों नगर निगम महाराष्ट्र की राजनीति में अहम स्थान रखते हैं और इन पर विजय प्राप्त करना किसी भी दल के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।

महायुति गठबंधन की रणनीति

जानकारी के अनुसार, अधिकतर महानगरपालिकाओं में भाजपा और शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) गठबंधन में चुनाव लड़ेंगी। वहीं कुछ स्थानों पर भाजपा-एनसीपी और शिवसेना का तीनतरफा गठबंधन भी देखने को मिल सकता है। सीएम फडणवीस ने यह भी स्पष्ट किया कि गठबंधन में सहयोगी दलों के बीच मतभेद नहीं होंगे, बल्कि यह चुनाव स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के तौर पर देखा जाएगा।

पुणे के साथ-साथ मुंबई में भी मेयर चुनाव की तस्वीर दिलचस्प है। यह चुनाव 2022 से लंबित था। वार्ड परिसीमन और आरक्षण के मसलों के चलते देरी हुई थी, लेकिन अब चुनाव के ऐलान के बाद सभी राजनीतिक दल अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप देने में जुट गए हैं। सभी दल सक्रिय होकर प्रचार और उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया में व्यस्त हैं।

महानगरपालिका चुनाव केवल स्थानीय प्रशासन का मुद्दा नहीं है। यह चुनाव राज्य स्तर की राजनीति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बड़ी महानगरपालिकाओं में विजय प्राप्त करना किसी भी दल के लिए रणनीतिक रूप से लाभकारी होता है। पुणे और मुंबई जैसे शहरों में जीत से गठबंधन को मजबूती मिलती है और भविष्य के चुनावों में राज्य में राजनीतिक दबदबा बढ़ता है।

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