Pawan Kalyan के हालिया बयान ने सियासी और मनोरंजन दोनों जगत में चर्चा तेज कर दी है। उन्होंने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री M K Stalin के प्रति अपनी भावनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें उनकी तेज़ राजनीतिक सफलता को देखकर कभी-कभी “ईर्ष्या” महसूस होती है।
नई दिल्ली: आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री Pawan Kalyan ने तमिलनाडु के अभिनेता-राजनेता Vijay की तेज राजनीतिक सफलता पर बयान देकर राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने मजाकिया लहजे में स्वीकार किया कि उन्हें विजय की सफलता देखकर “हल्की जलन” महसूस होती है। उनका यह बयान अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और इसे दक्षिण भारतीय राजनीति में बदलते जनसमर्थन के मॉडल से जोड़कर देखा जा रहा है।
“15 साल सड़क पर संघर्ष किया, उन्हें जल्दी सफलता मिली” — पवन कल्याण

Pawan Kalyan ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में अपने राजनीतिक अनुभव को साझा करते हुए कहा कि राजनीति में सफलता आसान नहीं होती। उन्होंने कहा कि वे पिछले 15 वर्षों से लगातार जमीनी स्तर पर संघर्ष कर रहे हैं, जबकि कुछ नेताओं को अपेक्षाकृत कम समय में बड़ी राजनीतिक सफलता मिल जाती है।उन्होंने यह भी कहा कि आधुनिक चुनावी रणनीतियों और प्रचार तकनीकों ने राजनीति को और तेज़ व प्रभावी बना दिया है।
अपने संबोधन में पवन कल्याण ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि आज की राजनीति में प्रचार का तरीका काफी बदल गया है। उन्होंने कहा कि कटआउट, डिजिटल कैंपेन और होलोग्राम जैसी तकनीकों ने चुनाव प्रचार को नई दिशा दी है और जनता तक पहुंचने के तरीके तेजी से विकसित हुए हैं। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि राजनीतिक पार्टी चलाना आसान काम नहीं है और इसमें वर्षों का समर्पण लगता है।
पवन कल्याण का राजनीतिक सफर
Pawan Kalyan ने 2014 में अपनी राजनीतिक पार्टी Jana Sena Party की शुरुआत की थी। उनका राजनीतिक सफर कई उतार-चढ़ाव से भरा रहा है, 2019 विधानसभा चुनाव में पार्टी को केवल 1 सीट मिली। खुद पवन कल्याण दोनों सीटों से चुनाव हार गए, बाद में पार्टी संगठन को मजबूत किया गया. 2024 में भाजपा और तेलुगु देशम पार्टी के साथ गठबंधन किया। पिठापुरम सीट से 70,000 से अधिक वोटों से जीत दर्ज की. इस जीत को उनके राजनीतिक करियर का बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जाता है।
Vijay ने 2024 में अपनी राजनीतिक पार्टी लॉन्च की थी। इसके बाद 2026 के चुनावों में उनकी पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 108 सीटें जीत लीं। इस जीत ने तमिलनाडु की राजनीति में लंबे समय से चले आ रहे द्रमुक और अन्नाद्रमुक के दबदबे को कड़ी चुनौती दी और एक नए राजनीतिक दौर की शुरुआत मानी जा रही है।










