भारत के युवा शतरंज ग्रैंडमास्टर आर प्रज्ञानानंदा ने अमेरिका में आयोजित प्रतिष्ठित ‘सेंट लुइस रैपिड एंड ब्लिट्ज’ टूर्नामेंट जीतकर इतिहास रच दिया है। प्रज्ञानानंदा ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया और शुरुआत से ही बढ़त बनाए रखी।
स्पोर्ट्स न्यूज़: भारत के युवा शतरंज स्टार आर प्रज्ञानानंदा ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। भारतीय ग्रैंडमास्टर ने अमेरिका में आयोजित प्रतिष्ठित सेंट लुइस रैपिड एंड ब्लिट्ज शतरंज टूर्नामेंट 2026 का खिताब अपने नाम कर इतिहास रच दिया। टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रज्ञानानंदा ने एक राउंड बाकी रहते ही चैंपियन बनने की उपलब्धि हासिल कर ली।
पूरे टूर्नामेंट में उनका प्रदर्शन बेहद प्रभावशाली रहा। उन्होंने कुल 35 गेम में 23.5 अंक हासिल किए, जो सभी खिलाड़ियों में सबसे अधिक थे। इस जीत के साथ उन्होंने अपने करियर की पहली ग्रैंड चेस टूर (Grand Chess Tour) ट्रॉफी हासिल की। खिताब जीतने के अलावा प्रज्ञानानंदा को करीब 50 हजार अमेरिकी डॉलर (लगभग 48 लाख रुपये) की पुरस्कार राशि और 13 महत्वपूर्ण टूर्नामेंट पॉइंट्स भी मिले।
शुरुआत से ही टूर्नामेंट में कायम रहा दबदबा
सेंट लुइस रैपिड एंड ब्लिट्ज टूर्नामेंट के पांच दिनों के मुकाबलों में प्रज्ञानानंदा लगातार शीर्ष स्थान पर बने रहे। उन्होंने रैपिड और ब्लिट्ज दोनों प्रारूपों में बेहतरीन रणनीति और मानसिक मजबूती का प्रदर्शन किया। ब्लिट्ज राउंड के दूसरे आखिरी मुकाबले में उनका सामना उज्बेकिस्तान के युवा खिलाड़ी जावोखिर सिंदारोव से हुआ। यह मुकाबला ड्रॉ पर समाप्त हुआ, लेकिन इस परिणाम के साथ ही प्रज्ञानानंदा की बढ़त इतनी मजबूत हो गई कि आखिरी मुकाबले से पहले ही उनका चैंपियन बनना तय हो गया।
सिंदारोव ने पूरे टूर्नामेंट में उन्हें कड़ी चुनौती दी और अंतिम दिन तक खिताब की दौड़ में बने रहे। हालांकि, भारतीय खिलाड़ी ने दबाव के बीच शानदार खेल दिखाते हुए अपनी बढ़त बरकरार रखी।
मुश्किल मुकाबलों के बाद मिली ऐतिहासिक जीत

टूर्नामेंट जीतने के बाद प्रज्ञानानंदा ने कहा कि स्कोर देखकर ऐसा लग सकता है कि जीत आसान रही, लेकिन वास्तविकता में मुकाबले काफी कठिन थे। उन्होंने सिंदारोव की तारीफ करते हुए कहा कि उज्बेक खिलाड़ी ने उन्हें आखिरी समय तक कड़ी चुनौती दी। ब्लिट्ज के अंतिम नौ मुकाबलों में प्रज्ञानानंदा ने तीन जीत दर्ज कीं, पांच मुकाबले ड्रॉ खेले और केवल एक मैच में हार का सामना किया। उनकी निरंतरता और दबाव में बेहतर फैसले लेने की क्षमता इस जीत की सबसे बड़ी वजह रही।
प्रज्ञानानंदा पिछले कुछ समय से जबरदस्त फॉर्म में हैं। इससे पहले जून 2026 में उन्होंने नॉर्वे में आयोजित प्रतिष्ठित नॉर्वे चेस टूर्नामेंट का खिताब भी अपने नाम किया था। उस प्रतियोगिता में उन्होंने आखिरी दौर में जर्मनी के विंसेंट कीमर को हराकर शानदार जीत दर्ज की थी। नॉर्वे चेस और अब सेंट लुइस रैपिड एंड ब्लिट्ज में जीत ने उन्हें दुनिया के शीर्ष युवा शतरंज खिलाड़ियों में और मजबूत स्थान दिलाया है। अब उनकी नजरें ग्रैंड चेस टूर के अगले बड़े टूर्नामेंट सिंकफील्ड कप पर हैं, जिसकी शुरुआत 10 अगस्त से होनी है।
सिंकफील्ड कप में प्रदर्शन के आधार पर ग्रैंड चेस टूर के फाइनल के लिए खिलाड़ियों का चयन होगा। पॉइंट्स टेबल के शीर्ष चार खिलाड़ी फाइनल में जगह बनाएंगे, जहां विजेता को करीब 2 लाख डॉलर (लगभग 1.65 करोड़ रुपये) की पुरस्कार राशि मिलेगी।
भारत के सबसे युवा ग्रैंडमास्टरों में शामिल हैं प्रज्ञानानंदा
चेन्नई में 10 अगस्त 2005 को जन्मे आर प्रज्ञानानंदा ने बेहद कम उम्र में शतरंज की दुनिया में अपनी पहचान बना ली थी। साल 2018 में केवल 12 साल, 10 महीने और 13 दिन की उम्र में वह भारत के सबसे युवा ग्रैंडमास्टर बने थे। प्रज्ञानानंदा के परिवार का भी शतरंज से गहरा संबंध है। उनकी बड़ी बहन आर वैशाली भी एक प्रतिष्ठित ग्रैंडमास्टर हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।











