आर प्रज्ञानानंदा बने सेंट लुइस रैपिड एंड ब्लिट्ज चैंपियन, ग्रैंड चेस टूर में भारत को दिलाई बड़ी सफलता

भारतीय ग्रैंडमास्टर आर प्रज्ञानानंदा ने सेंट लुइस रैपिड एंड ब्लिट्ज टूर्नामेंट का खिताब जीता। शानदार प्रदर्शन के साथ उन्होने 50 हजार डॉलर की पुरस्कार राशि जीती

भारतीय ग्रैंडमास्टर आर प्रज्ञानानंदा ने ग्रैंड चेस टूर के सेंट लुइस रैपिड एंड ब्लिट्ज टूर्नामेंट का खिताब जीत लिया। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए एक राउंड पहले ही चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया।

स्पोर्ट्स न्यूज़: भारतीय ग्रैंडमास्टर आर प्रज्ञानानंदा ने अंतरराष्ट्रीय शतरंज जगत में एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम करते हुए ग्रैंड चेस टूर (GCT) के प्रतिष्ठित सेंट लुइस रैपिड एंड ब्लिट्ज टूर्नामेंट का खिताब जीत लिया। अमेरिका के सेंट लुइस में आयोजित इस प्रतियोगिता में उन्होंने पूरे टूर्नामेंट के दौरान शानदार और लगातार प्रदर्शन करते हुए एक राउंड शेष रहते ही चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया। यह प्रज्ञानानंदा के करियर का पहला ग्रैंड चेस टूर रैपिड एंड ब्लिट्ज खिताब है। इस जीत के साथ उन्होंने दुनिया के शीर्ष शतरंज खिलाड़ियों के बीच अपनी स्थिति और मजबूत कर ली है तथा भारतीय शतरंज की बढ़ती ताकत को एक बार फिर वैश्विक मंच पर साबित किया है।

पूरे टूर्नामेंट में बनाए रखी बढ़त

पांच दिनों तक चले इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में प्रज्ञानानंदा ने शुरुआत से ही शानदार लय बनाए रखी। रैपिड चरण समाप्त होने के बाद वह अंक तालिका में पहले स्थान पर थे और ब्लिट्ज मुकाबलों में भी उन्होंने अपनी बढ़त कायम रखी। उज्बेकिस्तान के ग्रैंडमास्टर जावोखिर सिंदारोव ने अंतिम चरण तक उन्हें कड़ी चुनौती दी, लेकिन भारतीय खिलाड़ी ने लगातार स्थिर प्रदर्शन करते हुए अपनी बढ़त बरकरार रखी। निर्णायक क्षण तब आया जब ब्लिट्ज के दूसरे अंतिम राउंड में दोनों खिलाड़ियों का आमना-सामना हुआ।

ड्रॉ के साथ पक्का हुआ खिताब

ब्लिट्ज के दूसरे अंतिम मुकाबले में प्रज्ञानानंदा के सामने जावोखिर सिंदारोव थे। इस मुकाबले में ड्रॉ उनके लिए खिताब सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त था। मुकाबले के दौरान एंडगेम में एक समय ऐसा भी आया जब प्रज्ञानानंदा को मोहरे का नुकसान झेलना पड़ा, लेकिन उन्होंने बेहतरीन रक्षात्मक खेल दिखाते हुए मुकाबले को ड्रॉ करा लिया। इस परिणाम के साथ अंतिम राउंड से पहले ही उनका खिताब पक्का हो गया।

23.5 अंकों के साथ शानदार जीत

प्रज्ञानानंदा ने पूरे टूर्नामेंट में कुल 35 मुकाबलों में 23.5 अंक हासिल किए। उन्होंने दूसरे स्थान पर रहे सिंदारोव को 1.5 अंकों से पीछे छोड़ते हुए ट्रॉफी अपने नाम की। इस शानदार जीत के लिए उन्हें 50 हजार अमेरिकी डॉलर (करीब 48 लाख रुपये) की पुरस्कार राशि और ग्रैंड चेस टूर रैंकिंग के 13 महत्वपूर्ण अंक मिले। यह उपलब्धि आगामी ग्रैंड चेस टूर फाइनल्स की दौड़ में भी उनके लिए बेहद अहम मानी जा रही है।

रैपिड और ब्लिट्ज दोनों में दिखाया दम

प्रज्ञानानंदा की जीत की सबसे खास बात यह रही कि उन्होंने केवल संयुक्त खिताब ही नहीं जीता, बल्कि रैपिड और ब्लिट्ज दोनों प्रारूपों में सर्वाधिक अंक भी अर्जित किए। ब्लिट्ज के अंतिम नौ मुकाबलों में उन्होंने तीन जीत दर्ज कीं, पांच मुकाबले ड्रॉ खेले और केवल एक मैच गंवाया। इस निरंतर प्रदर्शन ने उन्हें पूरे टूर्नामेंट का सबसे सफल खिलाड़ी बना दिया।

जीत के बाद क्या बोले प्रज्ञानानंदा

खिताब जीतने के बाद प्रज्ञानानंदा ने कहा कि अंक तालिका देखकर टूर्नामेंट आसान लग सकता है, लेकिन वास्तव में हर मुकाबला बेहद चुनौतीपूर्ण था। उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी जावोखिर सिंदारोव की भी सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने आखिरी दौर तक कड़ी चुनौती दी और हर मुकाबले में उन्हें अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना पड़ा।

अब सिंकफील्ड कप पर नजर

ग्रैंड चेस टूर का अगला महत्वपूर्ण टूर्नामेंट सिंकफील्ड कप 10 अगस्त से शुरू होगा। यह प्रतियोगिता ग्रैंड चेस टूर फाइनल्स से पहले अंतिम टूर्नामेंट होगी।

इस प्रतियोगिता के बाद अंक तालिका में शीर्ष चार खिलाड़ी ग्रैंड चेस टूर फाइनल्स के लिए क्वालीफाई करेंगे। फाइनल्स के विजेता को दो लाख अमेरिकी डॉलर की पुरस्कार राशि दी जाएगी। ऐसे में प्रज्ञानानंदा की मौजूदा फॉर्म उन्हें खिताब के प्रबल दावेदारों में शामिल करती है।

2026 में लगातार शानदार प्रदर्शन

आर प्रज्ञानानंदा इस वर्ष लगातार बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे हैं। इससे पहले उन्होंने जून 2026 में प्रतिष्ठित नॉर्वे चेस टूर्नामेंट का खिताब भी अपने नाम किया था। उस प्रतियोगिता के अंतिम दौर में उन्होंने जर्मनी के ग्रैंडमास्टर विंसेंट कीमर को हराकर ट्रॉफी जीती थी। लगातार चार क्लासिकल मुकाबलों में जीत दर्ज कर उन्होंने उस प्रतियोगिता में भी अपनी श्रेष्ठता साबित की थी।

तमिलनाडु सरकार ने किया सम्मानित

नॉर्वे चेस में ऐतिहासिक जीत के बाद तमिलनाडु सरकार ने प्रज्ञानानंदा को सम्मानित किया था। चेन्नई स्थित मुख्य सचिवालय में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने उन्हें सम्मानित करते हुए 50 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की थी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने उनके साथ प्रतीकात्मक रूप से शतरंज की कुछ चालें भी चली थीं। यह सम्मान भारतीय शतरंज में उनके योगदान और उपलब्धियों की सराहना के रूप में देखा गया।

कम उम्र में रचा था इतिहास

10 अगस्त 2005 को चेन्नई में जन्मे आर प्रज्ञानानंदा ने बेहद कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। वर्ष 2018 में वह मात्र 12 वर्ष, 10 महीने और 13 दिन की आयु में ग्रैंडमास्टर बने थे। उस समय वह भारत के सबसे युवा और दुनिया के दूसरे सबसे युवा ग्रैंडमास्टर थे। उनकी बड़ी बहन आर वैशाली भी अंतरराष्ट्रीय ग्रैंडमास्टर हैं और भारत का कई प्रमुख प्रतियोगिताओं में प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।

भारतीय शतरंज के लिए बड़ी उपलब्धि

सेंट लुइस रैपिड एंड ब्लिट्ज टूर्नामेंट को ग्रैंड चेस टूर की सबसे प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं में गिना जाता है, जिसमें दुनिया के शीर्ष ग्रैंडमास्टर्स भाग लेते हैं। ऐसे टूर्नामेंट में खिताब जीतना किसी भी खिलाड़ी के लिए बड़ी उपलब्धि माना जाता है। प्रज्ञानानंदा की यह सफलता न केवल उनके व्यक्तिगत करियर के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि भारतीय शतरंज की बढ़ती वैश्विक पहचान का भी प्रतीक है। लगातार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन करते हुए उन्होंने यह साबित किया है कि भारत के युवा खिलाड़ी विश्व शतरंज में शीर्ष स्थान हासिल करने की क्षमता रखते हैं। आने वाले सिंकफील्ड कप और ग्रैंड चेस टूर फाइनल्स में भी उनसे इसी तरह के दमदार प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है।

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