राजस्थान के झुंझुनूं में बिजली कर्मचारियों ने अपनी 27 सूत्री मांगों को लेकर प्रदर्शन किया और चेतावनी दी कि मांगें नहीं मानी गईं तो राजस्थान अंधेरे में डूब सकता है। कर्मचारियों ने जयपुर कूच और बड़े राज्यव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है।
झुंझुनू: राजस्थान के झुंझुनूं जिले में बुधवार को बिजली कर्मचारियों ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया। राजस्थान विद्युत श्रमिक महासंघ (BMS) के आह्वान पर अजमेर विद्युत वितरण निगम (AVVNL) के अधीक्षण अभियंता (SE) कार्यालय के बाहर सैकड़ों कर्मचारी एकत्र हुए और अपनी मांगों के समर्थन में जोरदार नारेबाजी की।
प्रदर्शन के दौरान पूरा परिसर नीली वर्दीधारी कर्मचारियों से भर गया। कर्मचारियों ने सरकार और निगम प्रशासन के खिलाफ आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि लंबे समय से उनकी मांगों को केवल आश्वासन मिल रहा है, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया है।
“मांगें नहीं मानी तो प्रदेश अंधेरे में डूबेगा” – कर्मचारियों की चेतावनी
प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी 27 सूत्री मांगों का शीघ्र समाधान नहीं किया गया, तो इसका असर पूरे राजस्थान की बिजली व्यवस्था पर पड़ सकता है। कर्मचारियों ने कहा कि “यदि हालात बिगड़े तो राज्य में बिजली आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिसकी जिम्मेदारी पूरी तरह सरकार और प्रशासन की होगी।”
नारेबाजी के दौरान कर्मचारियों ने यह भी कहा कि अब उनका आंदोलन आर-पार की लड़ाई में बदल चुका है और वे पीछे हटने वाले नहीं हैं।

मुख्य मांगें: निजीकरण और पुरानी पेंशन योजना सबसे बड़ा मुद्दा
बिजली कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में निजीकरण को रोकना और पुरानी पेंशन योजना (OPS) से जुड़ी समस्याओं का समाधान शामिल है। कर्मचारियों का कहना है कि बिजली क्षेत्र में बढ़ते निजीकरण से रोजगार और सेवा सुरक्षा दोनों पर खतरा मंडरा रहा है।
इसके अलावा कर्मचारियों ने निम्न प्रमुख मांगें भी रखीं:
- विद्युत (संशोधन) विधेयक 2025 को वापस लेने की मांग
- क्लस्टर-फ्रेंचाइजी मॉडल को समाप्त करने की मांग
- EPS-95 पेंशन कटौती को बंद करने की मांग
- राज्य सरकार के समान RGHS मेडिकल सुविधा लागू करने की मांग
- जोखिम भरे कार्यों के लिए विशेष भत्ता (High Duty Allowance)
- संविदा कर्मचारियों के लिए सुरक्षा उपकरण और सुरक्षा व्यवस्था
- लंबे समय से रुकी हुई पदोन्नतियों को तुरंत लागू करना
- रिक्त पदों पर नियमित भर्ती प्रक्रिया शुरू करना
कर्मचारियों का कहना है कि वे वर्षों से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन देकर शांत कर दिया जाता है।
प्रशासन पर लापरवाही के आरोप
प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि कई बार सरकार और निगम प्रबंधन के साथ वार्ताएं हो चुकी हैं, लेकिन नतीजा शून्य रहा है। संगठन के नेताओं ने कहा कि सरकार केवल बातचीत का दिखावा कर रही है, जबकि जमीनी स्तर पर कर्मचारियों की समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।
उन्होंने कहा कि अगर अब भी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो राज्यभर में औद्योगिक अशांति फैल सकती है।
आंदोलन की अगली रणनीति: जयपुर कूच की तैयारी
बिजली कर्मचारियों के महासंघ ने आंदोलन को और तेज करने का ऐलान किया है। संगठन के अनुसार: 20 मई 2026 तक मांगों पर कार्रवाई नहीं होने पर डिस्कॉम मुख्यालय पर बड़ा धरना दिया जाएगा
10 जून 2026 को जयपुर स्थित विद्युत भवन पर राज्यव्यापी महापड़ाव किया जाएगा, इस आंदोलन में राजस्थान भर से हजारों बिजली कर्मचारी शामिल होंगे
यह आंदोलन अब केवल झुंझुनूं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे राजस्थान में फैलने की संभावना है।
बिजली व्यवस्था पर संभावित असर की आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बिजली कर्मचारियों की हड़ताल या आंदोलन लंबा चलता है, तो इसका सीधा असर राज्य की बिजली आपूर्ति पर पड़ सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरी इलाकों तक बिजली सेवाएं प्रभावित होने का खतरा बढ़ सकता है।
हालांकि अभी तक प्रशासन की ओर से कोई बड़ा आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन स्थिति पर नजर रखी जा रही है।










