रक्षाबंधन पर बांकेबिहारी को राखी से यमुना स्नान तक, मथुरा की खास परंपराएं जानें

रक्षाबंधन पर मथुरा-वृंदावन में बांकेबिहारी को राखी भेजने और भाई-बहन के यमुना स्नान की परंपरा निभाई जाती है। जानें इनकी धार्मिक मान्यताएं।

रक्षाबंधन पर मथुरा-वृंदावन में बांकेबिहारी को राखी भेजने, भाई-बहन के यमुना स्नान और धर्मराज-यमुना मंदिर के दर्शन की खास परंपराएं निभाई जाती हैं। इनका संबंध कृष्ण-द्रौपदी और यमराज-यमुना की पौराणिक कथाओं से जुड़ा है।

रक्षाबंधन 2026: ब्रज में भाई-बहन के प्रेम और धार्मिक आस्था से जुड़ी कई अनूठी परंपराएं देखने को मिलती हैं। वृंदावन में महिलाएं ठाकुर बांकेबिहारी को भाई मानकर राखी और पत्र भेजती हैं, जबकि मथुरा के विश्राम घाट पर भाई-बहन यमुना में स्नान कर धर्मराज-यमुना मंदिर के दर्शन करते हैं। इन परंपराओं के पीछे कृष्ण-द्रौपदी और यमराज-यमुना की पौराणिक मान्यताएं जुड़ी हैं।

बांकेबिहारी को राखी भेजने की परंपरा

मथुरा-वृंदावन में रक्षाबंधन का पर्व भगवान कृष्ण की भक्ति और भाई-बहन के रिश्ते से खास तौर पर जुड़ा हुआ है। कई महिलाएं और युवतियां ठाकुर बांकेबिहारी को अपना भाई मानकर हर साल रक्षाबंधन के अवसर पर उनके लिए राखी भेजती हैं।

राखियों के साथ भक्त अपने मन की भावनाएं पत्रों के जरिए भी ठाकुरजी तक पहुंचाती हैं। इनमें परिवार की सुख-समृद्धि से लेकर निजी परेशानियों और मनोकामनाओं का उल्लेख होता है। मंदिर सेवायतों के अनुसार, रक्षाबंधन के दिन इन राखियों को ठाकुरजी को अर्पित किया जाता है और संबंधित पत्र उन्हें पढ़कर सुनाए जाते हैं।

मथुरा-वृंदावन और द्वारकाधीश मंदिर में रक्षाबंधन पर ठाकुरजी को राखी अर्पित करने की परंपरा भी प्रमुख आकर्षण रहती है। भक्तों को इस अवसर पर विशेष प्रसाद भी दिया जाता है।

विश्राम घाट पर भाई-बहन का यमुना स्नान

मथुरा के विश्राम घाट पर स्थित श्री यमुना धर्मराज मंदिर रक्षाबंधन से जुड़ी एक महत्वपूर्ण धार्मिक परंपरा का केंद्र है। मान्यता के अनुसार, सूर्य पुत्र यमराज और उनकी बहन यमुना के संबंधों की कथा इस पर्व से जुड़ी हुई है।

धार्मिक मान्यता के मुताबिक, रक्षाबंधन और भाई दूज के दिन भाई-बहन एक-दूसरे का हाथ पकड़कर यमुना में स्नान करते हैं। इसके बाद धर्मराज-यमुनाजी मंदिर के दर्शन किए जाते हैं।

मान्यता है कि ऐसा करने से यम की फांस से मुक्ति मिलती है। इसी विश्वास के कारण इन पर्वों पर विश्राम घाट पर भाई-बहनों के यमुना स्नान की परंपरा निभाई जाती है।

कृष्ण और द्रौपदी की कथा से जुड़ा रक्षाबंधन

रक्षाबंधन से जुड़ी लोकप्रिय पौराणिक कथाओं में भगवान कृष्ण और द्रौपदी का प्रसंग भी शामिल है। कथा के अनुसार, शिशुपाल वध के दौरान कृष्ण की उंगली घायल हो गई थी। द्रौपदी ने अपनी साड़ी का आंचल फाड़कर उनकी उंगली पर बांध दिया।

मान्यता है कि कृष्ण ने द्रौपदी के इस स्नेह को रक्षासूत्र के रूप में स्वीकार किया और उनकी रक्षा का वचन दिया। मथुरा को भगवान कृष्ण की जन्मस्थली माना जाता है, इसलिए इस कथा का संबंध ब्रज में रक्षाबंधन की धार्मिक भावनाओं से भी जोड़ा जाता है।

निराश्रित माताओं की राखी भी खास

मथुरा-वृंदावन में रक्षाबंधन से जुड़ा एक सामाजिक पहलू भी सामने आता है। यहां रहने वाली निराश्रित माताएं संस्थाओं के सहयोग से विशेष राखियां तैयार करती हैं। वे इन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए तैयार कर रक्षाबंधन पर दिल्ली ले जाकर बांधती हैं।

यह पहल धार्मिक परंपरा के साथ सामाजिक जुड़ाव का संदेश भी देती है और भाई-बहन के रिश्ते की भावना को व्यापक स्तर पर सामने लाती है।

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