चाईबासा में 28 अगस्त को Raksha Bandhan के दिन स्कूल खोलने के निर्देश से शिक्षक नाराज हैं। उन्होंने ‘खेलेगा भारत, जीतेगा भारत’ अभियान की तारीख बदलकर 29 से 31 अगस्त करने की मांग की है।
चाईबासा: शिक्षा विभाग के ‘खेलेगा भारत, जीतेगा भारत’ अभियान के तहत 28 और 30 अगस्त को अवकाश के बावजूद स्कूल संचालित करने के निर्देश पर शिक्षकों ने आपत्ति जताई है। खासतौर पर 28 अगस्त को Raksha Bandhan के दिन विद्यालय खोलने के फैसले को लेकर शिक्षक संगठनों ने पुनर्विचार की मांग की है। उनका कहना है कि पर्व के दिन बच्चों और शिक्षकों की पारिवारिक जिम्मेदारियां प्रभावित होंगी।
रक्षाबंधन पर स्कूल खोलने से शिक्षक नाराज

शिक्षा विभाग के निर्देश के अनुसार राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर 28 से 30 अगस्त तक स्कूलों में ‘खेलेगा भारत, जीतेगा भारत’ अभियान के तहत विभिन्न खेल और फिटनेस गतिविधियां आयोजित की जानी हैं। इसके लिए 28 और 30 अगस्त को अवकाश के बावजूद विद्यालय संचालित करने का निर्णय लिया गया है। विभाग ने इन दिनों ड्यूटी करने वाले शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों को नियमानुसार क्षतिपूर्ति अवकाश देने का प्रावधान भी किया है। हालांकि, रक्षाबंधन के दिन स्कूल खोलने को लेकर शिक्षकों में असंतोष है।
रक्षाबंधन पर स्कूल खोलने के फैसले पर आपत्ति
स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव उमाशंकर सिंह की ओर से जारी निर्देश में अभियान के तहत फिटनेस, खेल प्रतियोगिता, योग और पारंपरिक खेलों समेत कई गतिविधियां कराने को कहा गया है। 30 अगस्त को ‘संडे ऑन साइकिल’ जैसी गतिविधियों का भी प्रस्ताव है।
अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश सलाहकार सुनील कुमार ने कहा कि शिक्षक खेल गतिविधियों के विरोध में नहीं हैं। विद्यार्थियों को खेलों से जोड़ना और फिटनेस के प्रति जागरूक करना जरूरी है। उनकी आपत्ति केवल कार्यक्रम की तारीख को लेकर है। उनका कहना है कि महत्वपूर्ण पर्व-त्योहारों को ध्यान में रखकर सरकारी कार्यक्रमों का कैलेंडर तय किया जाना चाहिए।
सुनील कुमार के अनुसार रक्षाबंधन पारिवारिक महत्व वाला पर्व है। इस दिन बच्चों के साथ शिक्षकों की भी पारिवारिक जिम्मेदारियां होती हैं। ऐसे में विद्यालय खोलने से बच्चों और कर्मचारियों दोनों को परेशानी हो सकती है। उन्होंने विभाग से मौजूदा कार्यक्रम में बदलाव पर विचार करने का आग्रह किया है।
29 से 31 अगस्त तक अभियान कराने का सुझाव
शिक्षकों ने राष्ट्रीय खेल दिवस की निर्धारित तारीख को ध्यान में रखते हुए अभियान को 29 से 31 अगस्त तक आयोजित करने का विकल्प सुझाया है। उनका कहना है कि इससे खेल दिवस से जुड़ी गतिविधियों का उद्देश्य भी पूरा किया जा सकता है और रक्षाबंधन के दिन स्कूल खोलने की आवश्यकता भी नहीं पड़ेगी।
सुनील कुमार ने कहा कि क्षतिपूर्ति अवकाश का प्रावधान कर्मचारियों के लिए उपयोगी हो सकता है, लेकिन पर्व के दिन परिवार के साथ बिताए जाने वाले समय की भरपाई बाद में मिलने वाले अवकाश से पूरी तरह नहीं हो सकती। उनके अनुसार बच्चों के लिए भी यही स्थिति है, क्योंकि रक्षाबंधन के दिन विद्यालय आने से उनके पारिवारिक कार्यक्रम प्रभावित हो सकते हैं।
शिक्षक बिस्वजीत सतपथी ने भी विभाग के निर्णय पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि स्कूल केवल शैक्षणिक गतिविधियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बच्चों के सामाजिक और सांस्कृतिक विकास में भी उनकी भूमिका होती है। रक्षाबंधन जैसे पर्व बच्चों की पारिवारिक और सामाजिक भावनाओं से जुड़े हैं। इसलिए ऐसे अवसर पर स्कूल खोलने के बजाय किसी वैकल्पिक तारीख पर कार्यक्रम आयोजित करना बेहतर होगा।
बच्चों की भागीदारी और उपस्थिति पर भी असर की आशंका
शिक्षकों का कहना है कि ‘खेलेगा भारत, जीतेगा भारत’ अभियान एक सकारात्मक पहल है और वे इसमें सहयोग करने के लिए तैयार हैं। हालांकि, उनका मानना है कि किसी भी कार्यक्रम की सफलता के लिए शिक्षकों, विद्यार्थियों और अभिभावकों की सहज भागीदारी जरूरी है।
रक्षाबंधन के दिन स्कूल खोलने से विद्यार्थियों की उपस्थिति प्रभावित होने की आशंका भी जताई गई है। कई परिवारों में इस पर्व के दौरान विशेष कार्यक्रम होते हैं, जिसके कारण बच्चों के लिए विद्यालय पहुंचना मुश्किल हो सकता है। इससे अभियान के तहत प्रस्तावित खेल और फिटनेस गतिविधियों में अपेक्षित भागीदारी नहीं हो पाने की संभावना है।
शिक्षकों ने विभाग से आग्रह किया है कि प्रशासनिक जरूरतों और सामाजिक-सांस्कृतिक संवेदनशीलता के बीच संतुलन बनाया जाए। उनका कहना है कि अभियान की गतिविधियों को अन्य उपयुक्त कार्यदिवसों में समायोजित करके राष्ट्रीय खेल दिवस का उद्देश्य हासिल किया जा सकता है। इससे रक्षाबंधन के दिन विद्यालय खोलने को लेकर पैदा हुआ असंतोष भी दूर किया जा सकेगा।












