पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि राज्य में रहने वाले लोगों को वंदे मातरम गाना होगा और राष्ट्रवाद से समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने जाधवपुर यूनिवर्सिटी में भारतीय संस्कृति, राष्ट्रवाद और देशभक्ति को मजबूत करने की बात कही।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने एक कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम’ और राष्ट्रवाद को लेकर कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि राज्य में रहने वाले लोगों को ‘वंदे मातरम’ गाना होगा और राष्ट्रवाद के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने जाधवपुर यूनिवर्सिटी को लेकर भी कई सवाल उठाए और परिसर में राष्ट्रवादी तथा भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करने की बात कही।
‘वंदे मातरम गाना होगा’ पर शुभेंदु अधिकारी का बयान
शुभेंदु अधिकारी ने भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में ‘अन्नपूर्णा योजना’ के लाभार्थियों की एक सभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रवाद और देशभक्ति को लेकर अपनी सरकार की प्राथमिकता स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में रहने वाले लोगों को ‘वंदे मातरम’ गाना होगा। उनके मुताबिक राष्ट्रवाद के सवाल पर सरकार किसी तरह का समझौता नहीं करेगी।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में जाधवपुर यूनिवर्सिटी का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय परिसर में राष्ट्रीय ध्वज फहराने, सरकारी अधिकारियों की पहुंच और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दे सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि जाधवपुर के अंदर और बाहर राष्ट्रवाद को मजबूत किया जाएगा।
अधिकारी ने विश्वविद्यालय परिसर में भारतीय संस्कृति और राष्ट्रवादी विचारों की मौजूदगी पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि जाधवपुर यूनिवर्सिटी में राष्ट्रवाद, भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं की झलक दिखाई देनी चाहिए।
जाधवपुर यूनिवर्सिटी पर लगाए गंभीर आरोप
शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया कि जाधवपुर यूनिवर्सिटी में राष्ट्रीय ध्वज फहराने को लेकर सवाल उठे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य के शिक्षा विभाग के अधिकारियों को परिसर में प्रवेश करने से रोका गया और CCTV कैमरे लगाने को लेकर भी आपत्ति की गई।
अपने भाषण में उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में मौजूद कुछ कथित राजनीतिक और वैचारिक समूहों पर भी निशाना साधा। उन्होंने ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ और ‘जिहादी’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए आरोप लगाया कि कुछ तत्व राष्ट्रवादी कार्यक्रमों और ‘वंदे मातरम’ के गायन का विरोध करते हैं।
हालांकि, इन आरोपों को राजनीतिक बयान के तौर पर देखा जाना चाहिए। विश्वविद्यालय प्रशासन या संबंधित समूहों की ओर से इन दावों पर क्या प्रतिक्रिया दी गई है, इसकी स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं हो सकी है।
‘राष्ट्रवाद की स्थापना’ पर दिया जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार पश्चिम बंगाल में राष्ट्रवाद को मजबूत करने की दिशा में काम करेगी। उनका कहना था कि जाधवपुर यूनिवर्सिटी जैसे प्रमुख शिक्षण संस्थानों में राष्ट्रीय पहचान और भारतीय सांस्कृतिक विरासत को उचित स्थान मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मीडिया का कोई वर्ग यदि राष्ट्रवाद से जुड़े मुद्दों पर सरकार की आलोचना करता है, तब भी उनकी सरकार अपनी नीति से पीछे नहीं हटेगी। अधिकारी ने स्पष्ट किया कि वह विश्वविद्यालय के भीतर और बाहर राष्ट्रवादी विचारों को बढ़ावा देने के पक्ष में हैं।
यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम बंगाल में शिक्षा संस्थानों, राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक पहचान को लेकर राजनीतिक बहस लगातार तेज रही है। विश्वविद्यालयों में छात्र राजनीति और वैचारिक मतभेद राज्य की राजनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं।

वामपंथी दलों पर भी निशाना
शुभेंदु अधिकारी ने अपने संबोधन में वामपंथी दलों और उनके राजनीतिक प्रभाव पर भी हमला बोला। उन्होंने वामपंथी नेताओं को निशाने पर लेते हुए दावा किया कि राज्य की राजनीति में उनका प्रभाव लगातार कम हुआ है।
उन्होंने कहा कि उनकी सरकार का उद्देश्य पश्चिम बंगाल में ऐसा राजनीतिक और सामाजिक वातावरण तैयार करना है, जिसमें भारतीय संस्कृति और राष्ट्रवादी विचारों को प्रमुख स्थान मिले।
मुख्यमंत्री ने भाजपा के वैचारिक आधार से जुड़े श्यामा प्रसाद मुखर्जी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार श्यामा प्रसाद मुखर्जी के विचारों और दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
‘वंदे मातरम’ को लेकर क्यों महत्वपूर्ण है बहस?
‘वंदे मातरम’ भारत के राष्ट्रीय गीत के रूप में जाना जाता है और देश के स्वतंत्रता आंदोलन में इसका ऐतिहासिक महत्व रहा है। समय-समय पर इसके गायन और सार्वजनिक कार्यक्रमों में इसके इस्तेमाल को लेकर राजनीतिक एवं सामाजिक बहस होती रही है।
एक ओर इसे राष्ट्रीय गौरव और स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत से जोड़कर देखा जाता है, वहीं दूसरी ओर कुछ समूह सार्वजनिक स्थानों पर इसके अनिवार्य गायन को लेकर अलग विचार रखते हैं। ऐसे में किसी राज्य में इसे लेकर दिया गया राजनीतिक बयान व्यापक बहस को जन्म दे सकता है।
शुभेंदु अधिकारी के ताजा बयान को भी इसी व्यापक राजनीतिक संदर्भ में देखा जा रहा है। उनके बयान में राष्ट्रवाद, शिक्षा संस्थानों और भारतीय संस्कृति को एक साथ जोड़ने की कोशिश दिखाई देती है।
जाधवपुर यूनिवर्सिटी फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में
जाधवपुर यूनिवर्सिटी पश्चिम बंगाल के सबसे चर्चित उच्च शिक्षण संस्थानों में से एक है। यहां लंबे समय से छात्र राजनीति और विभिन्न वैचारिक धाराओं की सक्रियता देखने को मिलती रही है।
मुख्यमंत्री के ताजा बयान के बाद विश्वविद्यालय एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गया है। अधिकारी ने स्पष्ट संकेत दिया कि उनकी सरकार विश्वविद्यालयों में राष्ट्रवाद और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को लेकर अधिक मुखर रुख अपना सकती है।
आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन, छात्र संगठनों और विपक्षी दलों की ओर से इस बयान पर क्या प्रतिक्रिया आती है।
राजनीतिक संदेश भी माना जा रहा है बयान
शुभेंदु अधिकारी का यह बयान केवल विश्वविद्यालय से जुड़ा मुद्दा नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे पश्चिम बंगाल की नई राजनीतिक दिशा के संकेत के तौर पर भी देखा जा सकता है। विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा की सरकार बनने के साथ राज्य में शासन और राजनीतिक विमर्श का स्वरूप बदला है। ताजा रिपोर्टों में अधिकारी को राज्य का मुख्यमंत्री बताया गया है और उनकी सरकार के गठन के बाद भाजपा ने बंगाल में अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने पर जोर दिया है।
राष्ट्रवाद, सांस्कृतिक पहचान और शिक्षा संस्थानों की भूमिका आने वाले दिनों में सरकार और विपक्ष के बीच बहस के प्रमुख मुद्दे बन सकते हैं। अधिकारी के बयान ने इस बहस को और तेज कर दिया है।
फिलहाल ‘वंदे मातरम’ को लेकर मुख्यमंत्री का संदेश स्पष्ट है कि उनकी सरकार राष्ट्रवाद और देशभक्ति के मुद्दे पर अपने रुख से पीछे नहीं हटेगी। वहीं, जाधवपुर यूनिवर्सिटी को लेकर लगाए गए आरोपों और सरकार की प्रस्तावित नीतियों पर आगे की प्रतिक्रिया का इंतजार है।












