रामनगर में एलटी शिक्षकों ने शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता को लेकर विरोध जताया है। शिक्षकों का कहना है कि लंबे समय से सेवा दे रहे ऐसे शिक्षकों पर बाद में नई पात्रता शर्त लागू करना उचित नहीं है। इसी मांग को लेकर शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल ने स्थानीय विधायक को ज्ञापन सौंपकर अपनी समस्याओं से अवगत कराया। शिक्षकों ने विशेष रूप से 2014 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से छूट देने और इस संबंध में स्पष्ट शासनादेश जारी करने की मांग उठाई है।
शिक्षकों का कहना है कि एलटी पदों पर नियुक्त होकर कई शिक्षक लंबे समय से सरकारी स्कूलों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में योगदान दिया है। अब टीईटी की अनिवार्यता से जुड़ी स्थिति को लेकर शिक्षकों के बीच असमंजस और चिंता बनी हुई है। उनका कहना है कि पहले से नियुक्त शिक्षकों के लिए नियमों को स्पष्ट किया जाना चाहिए, ताकि सेवा संबंधी किसी तरह की परेशानी सामने न आए।
ज्ञापन में शिक्षकों ने मांग की कि 2014 से पहले नियुक्त एलटी शिक्षकों के मामले में अलग से स्पष्ट व्यवस्था की जाए। उनका कहना है कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति उस समय लागू नियमों के तहत हुई थी, उन्हें बाद में लागू होने वाली पात्रता शर्तों के कारण परेशान नहीं किया जाना चाहिए। शिक्षकों ने सरकार से इस संबंध में स्थिति साफ करने और लिखित शासनादेश जारी करने की मांग की है।
शिक्षकों का कहना है कि टीईटी की अनिवार्यता को लेकर अलग-अलग स्तर पर स्थिति स्पष्ट नहीं होने से शिक्षकों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। कई शिक्षक यह जानना चाहते हैं कि उनकी नियुक्ति की तारीख और सेवा की स्थिति के आधार पर उन पर यह नियम किस तरह लागू होगा। उनका कहना है कि सरकार को इस विषय पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए, जिससे शिक्षक अपनी स्थिति को लेकर निश्चित हो सकें।
एलटी शिक्षकों के मुताबिक, उनकी मांग किसी नए लाभ की नहीं बल्कि पहले से कार्यरत शिक्षकों की सेवा सुरक्षा और नियमों की स्पष्टता से जुड़ी है। उनका कहना है कि वर्षों से स्कूलों में पढ़ा रहे शिक्षकों के मामले में किसी भी नए नियम को लागू करने से पहले उनकी नियुक्ति की तारीख और उस समय लागू नियमों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
शिक्षकों ने विधायक से अनुरोध किया कि उनकी मांग को सरकार और शिक्षा विभाग के सामने प्रमुखता से रखा जाए। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि शिक्षकों को उम्मीद है कि सरकार उनकी समस्या का समाधान निकालेगी और 2014 से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए टीईटी को लेकर स्पष्ट छूट का प्रावधान किया जाएगा।
टीईटी को लेकर शिक्षकों की चिंता का एक बड़ा कारण यह भी है कि शिक्षक सेवा में रहते हुए अपने शिक्षण कार्य और प्रशासनिक जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं। ऐसे में किसी नई पात्रता परीक्षा को लेकर अचानक असमंजस पैदा होने से उनकी सेवा और भविष्य को लेकर सवाल खड़े होते हैं। शिक्षकों का कहना है कि यदि सरकार कोई नियम लागू करना चाहती है तो उसकी प्रक्रिया और समयसीमा भी स्पष्ट होनी चाहिए।
शिक्षकों ने यह भी कहा कि शिक्षा व्यवस्था में स्थिरता बनाए रखना जरूरी है। स्कूलों में कार्यरत शिक्षक यदि लगातार अपनी सेवा शर्तों को लेकर असमंजस में रहेंगे तो इसका असर उनके कामकाज पर भी पड़ सकता है। इसलिए सरकार को जल्द से जल्द इस मामले में स्पष्ट शासनादेश जारी करना चाहिए।
रामनगर क्षेत्र में बड़ी संख्या में शिक्षक सरकारी स्कूलों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। एलटी शिक्षक विद्यार्थियों की पढ़ाई के साथ-साथ स्कूलों की विभिन्न शैक्षणिक और प्रशासनिक गतिविधियों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शिक्षकों का कहना है कि उनके सेवा संबंधी मामलों में किसी भी तरह की अनिश्चितता को जल्द दूर किया जाना चाहिए।
ज्ञापन सौंपने के दौरान शिक्षकों ने अपनी मांगों को विस्तार से विधायक के सामने रखा। उन्होंने कहा कि 2014 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से छूट दिए जाने का स्पष्ट प्रावधान किया जाए। साथ ही शिक्षा विभाग की ओर से ऐसा शासनादेश जारी हो, जिसमें यह साफ हो कि किन शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता लागू होगी और किन्हें इससे बाहर रखा जाएगा।
शिक्षकों का कहना है कि स्पष्ट शासनादेश जारी होने से न केवल शिक्षकों की परेशानी दूर होगी, बल्कि शिक्षा विभाग के अधिकारियों के लिए भी नियमों को लागू करना आसान होगा। वर्तमान में यदि नियमों की व्याख्या को लेकर अलग-अलग स्थिति बनती है तो इससे भविष्य में विवाद पैदा हो सकते हैं। इसलिए सरकार को लिखित रूप से पूरी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
शिक्षकों ने इस मामले में सरकार से सकारात्मक और जल्द निर्णय लेने की उम्मीद जताई है। उनका कहना है कि शिक्षक किसी टकराव की स्थिति नहीं चाहते, बल्कि नियमों को लेकर स्पष्टता चाहते हैं। यदि सरकार उनकी मांगों पर उचित निर्णय लेती है तो शिक्षकों के बीच बनी असमंजस की स्थिति समाप्त हो सकती है।
एलटी शिक्षकों के विरोध के पीछे मुख्य मुद्दा नियुक्ति के समय लागू नियमों और बाद में सामने आई पात्रता शर्तों के बीच तालमेल का है। शिक्षक चाहते हैं कि उनकी नियुक्ति की तारीख को ध्यान में रखते हुए उन्हें उचित संरक्षण दिया जाए। उनका कहना है कि 2014 से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए अलग व्यवस्था करना व्यावहारिक और न्यायसंगत होगा।
शिक्षकों ने विधायक के माध्यम से सरकार तक अपनी बात पहुंचाने के बाद आगे भी मामले पर नजर रखने की बात कही है। यदि जल्द शासनादेश जारी नहीं होता है तो शिक्षक संगठन इस मुद्दे को लेकर आगे की रणनीति पर विचार कर सकते हैं। हालांकि फिलहाल शिक्षकों का जोर सरकार से बातचीत और समस्या के समाधान पर है।
इस मामले में अब शिक्षा विभाग और सरकार की ओर से आने वाला निर्णय महत्वपूर्ण होगा। शिक्षकों की मांग है कि नियमों को लेकर किसी भी तरह की अस्पष्टता न रहे। उन्हें यह स्पष्ट रूप से बताया जाए कि उनकी नियुक्ति की तारीख के आधार पर टीईटी की शर्त लागू होती है या नहीं।
शिक्षकों का कहना है कि शिक्षा विभाग में कार्यरत कर्मचारियों के लिए सेवा नियमों की स्पष्टता बेहद जरूरी है। खासकर ऐसे मामलों में जहां नियुक्ति वर्षों पहले हुई हो और शिक्षक लंबे समय से अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हों, वहां किसी नए नियम की लागू स्थिति को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जरूरी हैं।
रामनगर में एलटी शिक्षकों की ओर से सौंपे गए ज्ञापन के बाद अब शिक्षकों की नजर सरकार और शिक्षा विभाग की प्रतिक्रिया पर है। यदि सरकार 2014 से पहले नियुक्त शिक्षकों को छूट देने और स्पष्ट शासनादेश जारी करने की मांग पर निर्णय लेती है तो इससे लंबे समय से बनी असमंजस की स्थिति दूर हो सकती है।
शिक्षकों ने यह भी उम्मीद जताई है कि उनकी मांग को राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर गंभीरता से लिया जाएगा। विधायक को ज्ञापन सौंपने का उद्देश्य सरकार तक शिक्षकों की समस्या पहुंचाना और इस विषय पर जल्द नीति स्पष्ट कराना है।
कुल मिलाकर, रामनगर में एलटी शिक्षकों ने टीईटी की अनिवार्यता का विरोध करते हुए विधायक को ज्ञापन सौंपा है। शिक्षकों ने मांग की है कि 2014 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से स्पष्ट छूट दी जाए और इस संबंध में शिक्षा विभाग की ओर से स्पष्ट शासनादेश जारी किया जाए। शिक्षकों का कहना है कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के लिए नियमों की स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है, ताकि उनकी सेवा और भविष्य को लेकर किसी तरह की अनिश्चितता न रहे।












