झारखंड में JPSC परीक्षा विवाद को लेकर छात्र आंदोलन तेज हो गया है। रांची में विधानसभा घेराव के दौरान AISA अध्यक्ष नेहा बोरा पर स्याही फेंकी गई। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों से बातचीत की पेशकश की, जबकि प्रदर्शन और भूख हड़ताल जारी है।
रांची: झारखंड में 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) परीक्षा को रद्द करने की मांग को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। राजधानी रांची में विधानसभा घेराव के दौरान ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा पर स्याही फेंके जाने की घटना ने आंदोलन को नया मोड़ दे दिया है। पुलिस ने घटना के तुरंत बाद आरोपी युवक को हिरासत में ले लिया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आरोपी एक छात्र संगठन से जुड़ा बताया जा रहा है, हालांकि पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।
इस बीच, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि राज्य सरकार छात्रों की बात सुनने और समाधान निकालने के लिए तैयार है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार केवल छात्रों के प्रतिनिधिमंडल से ही बातचीत करेगी।
विधानसभा घेराव के दौरान हुआ हंगामा
JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों को लेकर हजारों छात्र पिछले दो सप्ताह से आंदोलन कर रहे हैं। शुक्रवार को AISA के नेतृत्व में छात्रों ने झारखंड विधानसभा की ओर मार्च निकाला। मार्च के दौरान नेहा बोरा पर एक युवक ने स्याही फेंक दी। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए आरोपी को हिरासत में ले लिया। घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई तथा प्रदर्शन जारी रहा।
नेहा बोरा ने कहा- आंदोलन डरने वाला नहीं
घटना के बाद नेहा बोरा ने कहा कि इस तरह की घटनाएं छात्रों के आंदोलन को कमजोर नहीं कर सकतीं। उन्होंने कहा कि यदि छात्र पहले भी कठिन परिस्थितियों का सामना करते रहे हैं तो स्याही फेंकने जैसी घटना से वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता की कमी युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। उनके अनुसार परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय होना आवश्यक है और गड़बड़ियों के लिए जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का बयान
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि सरकार पहले ही छात्रों को अपनी बात रखने के लिए उचित मंच उपलब्ध करा चुकी है। उन्होंने कहा कि सरकार सभी छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से सुनना चाहती है और समाधान के लिए संवाद का रास्ता खुला है। हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि वार्ता केवल छात्रों के प्रतिनिधियों से की जाएगी। सरकार ने प्रतिनिधिमंडल में गैर-छात्र व्यक्तियों के शामिल होने पर आपत्ति जताई है।
भूख हड़ताल जारी, एक छात्र की तबीयत बिगड़ी
आंदोलन के दौरान कई छात्र लगातार भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं। शुक्रवार सुबह एक अनशनकारी छात्र की तबीयत बिगड़ने के बाद उसे अस्पताल ले जाया गया। अन्य छात्र नेताओं ने कहा कि उनकी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में सुधार और कथित धांधलियों की निष्पक्ष जांच के बिना वे पीछे नहीं हटेंगे।

देर रात हुई बातचीत नहीं निकली सफल
सरकार और छात्रों के बीच वार्ता कराने के प्रयास भी किए गए। प्रशासनिक अधिकारी देर रात प्रदर्शन स्थल पहुंचे और छात्रों से बातचीत की। करीब 45 मिनट तक चली बैठक में दोनों पक्ष किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सके। छात्रों का कहना था कि उनके प्रतिनिधिमंडल में शामिल सभी लोगों को बातचीत का हिस्सा बनने दिया जाए, जबकि सरकार केवल छात्र प्रतिनिधियों के साथ ही वार्ता पर अड़ी रही।
विपक्ष भी हुआ सक्रिय
छात्र आंदोलन को लेकर राजनीतिक दल भी सक्रिय हो गए हैं। विपक्षी नेताओं ने छात्रों की मांगों का समर्थन करते हुए सरकार से शीघ्र समाधान निकालने की अपील की है। कुछ नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि छात्रों की मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो वे भी आंदोलन में शामिल होंगे। इससे राज्य में राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं।
परीक्षा अनियमितताओं की जांच जारी
JPSC परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच राज्य की जांच एजेंसियां कर रही हैं। अधिकारियों के अनुसार अब तक कई लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और कथित परीक्षा रैकेट से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच जारी है। जांच एजेंसियां आरोपों की पुष्टि के लिए दस्तावेजों, वित्तीय लेन-देन और अन्य साक्ष्यों की भी जांच कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी स्तर पर अनियमितता साबित होती है तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
छात्र क्यों कर रहे हैं विरोध?
प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता की कमी और कथित पेपर लीक ने हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य को प्रभावित किया है। उनका कहना है कि मेहनत से परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्रों का विश्वास व्यवस्था से उठता जा रहा है। छात्रों की प्रमुख मांगों में परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई, भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और भविष्य में पेपर लीक रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था शामिल है।
शिक्षा व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे विवाद केवल झारखंड तक सीमित नहीं हैं। देश के कई राज्यों में पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं के मामलों ने युवाओं के बीच चिंता बढ़ाई है। ऐसी घटनाएं भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती हैं और लाखों छात्रों के करियर को प्रभावित करती हैं। इसलिए पारदर्शी परीक्षा प्रणाली, डिजिटल सुरक्षा और सख्त निगरानी व्यवस्था की आवश्यकता पहले से अधिक महसूस की जा रही है।
आगे क्या?
फिलहाल छात्र आंदोलन जारी है और सरकार संवाद के जरिए समाधान निकालने की बात कह रही है। दूसरी ओर, जांच एजेंसियां परीक्षा से जुड़े आरोपों की पड़ताल कर रही हैं। आने वाले दिनों में सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच वार्ता का परिणाम इस आंदोलन की दिशा तय कर सकता है। यदि दोनों पक्ष किसी साझा समाधान पर पहुंचते हैं तो विवाद शांत हो सकता है, अन्यथा आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।













