RBI ने बताया कि सितंबर 2025 तिमाही में बैंकों के पर्यवेक्षण डेटा की गुणवत्ता बेहतर हुई है। SDQI बढ़कर 90.7 पहुंच गया है, जो बैंकिंग सिस्टम की पारदर्शिता, निगरानी और नियामकीय अनुपालन में मजबूती का संकेत देता है।
RBI Update: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश के बैंकिंग सेक्टर को लेकर एक सकारात्मक संकेत दिया है। केंद्रीय बैंक ने बताया है कि बैंकों द्वारा जमा किए जाने वाले पर्यवेक्षण से जुड़े आंकड़ों की गुणवत्ता सितंबर 2025 तिमाही में बेहतर हुई है। बैंकों का पर्यवेक्षण डेटा गुणवत्ता सूचकांक यानी SDQI (Supervisory Data Quality Index) बढ़कर 90.7 पर पहुंच गया है। यह आंकड़ा पिछली अप्रैल–जून 2025 तिमाही में 89.9 था। इस सुधार को बैंकिंग सिस्टम की मजबूती और पारदर्शिता की दिशा में अहम माना जा रहा है।
क्या है SDQI और क्यों है यह अहम
SDQI को रिजर्व बैंक ने बैंकों की ओर से दिए जाने वाले डेटा की गुणवत्ता को परखने के लिए तैयार किया है। इसका मकसद यह जांचना है कि बैंक अपने वित्तीय और पर्यवेक्षण से जुड़े आंकड़े कितनी सटीकता, समयबद्धता, पूर्णता और एकरूपता के साथ जमा कर रहे हैं।
RBI के मुताबिक, यह सूचकांक इस बात का मजबूत आधार देता है कि बैंक नियामकीय नियमों का कितना सही तरीके से पालन कर रहे हैं। खास तौर पर यह देखा जाता है कि बैंक RBI के पर्यवेक्षण रिटर्न दाखिल करने से जुड़े नियम 2024 का कितना अनुपालन कर रहे हैं।
सितंबर तिमाही में क्यों खास रहा प्रदर्शन
रिजर्व बैंक के बयान के अनुसार, जुलाई से सितंबर 2025 की तिमाही में SDQI का 90.7 पर पहुंचना एक मजबूत संकेत है। यह दिखाता है कि बैंकों ने अपने डेटा रिपोर्टिंग सिस्टम में सुधार किया है।
सबसे अहम बात यह रही कि इस तिमाही में किसी भी बैंक का स्कोर 80 से नीचे नहीं गया। इसका मतलब यह है कि सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक कम से कम स्वीकार्य श्रेणी में रहे। RBI इसे बैंकिंग सेक्टर की निगरानी के लिहाज से एक सकारात्मक विकास मानता है।
RBI की रेटिंग प्रणाली को आसान भाषा में समझें
रिजर्व बैंक ने SDQI के लिए एक स्पष्ट रेटिंग सिस्टम तय किया है, जिससे बैंकों की स्थिति को आसानी से समझा जा सकता है।
अगर किसी बैंक का स्कोर 70 से कम होता है तो उसे गंभीर चिंता की श्रेणी में रखा जाता है। 70 से 80 के बीच स्कोर का मतलब होता है कि सुधार की जरूरत है। 80 से 90 के बीच का स्कोर स्वीकार्य माना जाता है। वहीं 90 से ऊपर का स्कोर अच्छा और मजबूत प्रदर्शन दर्शाता है।
सितंबर 2025 तिमाही में औसत स्कोर 90.7 होना यह बताता है कि बैंकिंग सेक्टर समग्र रूप से “अच्छी” श्रेणी में पहुंच चुका है।
किन आंकड़ों को शामिल करता है यह सूचकांक
SDQI कोई एकतरफा आंकड़ा नहीं है। इसमें 87 अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के कई अहम वित्तीय और जोखिम से जुड़े पहलुओं को शामिल किया जाता है।
इनमें ऋण की गुणवत्ता यानी loan quality, जोखिम से जुड़ी जानकारी, नकदी स्थिति यानी liquidity, और पूंजी पर्याप्तता यानी capital adequacy जैसे महत्वपूर्ण पैरामीटर शामिल होते हैं। ये सभी आंकड़े किसी भी बैंक की वित्तीय सेहत को समझने के लिए बेहद जरूरी होते हैं।
बैंकिंग निगरानी में क्यों जरूरी है सटीक डेटा
RBI ने साफ किया है कि मजबूत और भरोसेमंद बैंकिंग सिस्टम के लिए सही डेटा सबसे जरूरी आधार है। अगर बैंक समय पर और सही जानकारी नहीं देते हैं, तो निगरानी और जांच की प्रक्रिया कमजोर हो सकती है।
SDQI के जरिए RBI यह सुनिश्चित करता है कि बैंक अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए सटीक जानकारी उपलब्ध करा रहे हैं। इससे न सिर्फ बैंकों की निगरानी आसान होती है, बल्कि किसी भी संभावित जोखिम को समय रहते पहचाना जा सकता है।
बैंकों के लिए क्या संदेश देता है यह सुधार
SDQI में सुधार यह संकेत देता है कि बैंकों ने अपने internal systems और reporting standards पर काम किया है। डेटा की गुणवत्ता बेहतर होने से बैंकिंग सेक्टर में पारदर्शिता बढ़ती है और निवेशकों व ग्राहकों का भरोसा मजबूत होता है।
यह सुधार आने वाले समय में बैंकों की regulatory compliance को और बेहतर बना सकता है। साथ ही इससे यह भी उम्मीद की जा रही है कि भविष्य में RBI को बैंकों की निगरानी के लिए ज्यादा प्रभावी जानकारी मिल सकेगी।










