पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल और गैस की बढ़ती कीमतों तथा सप्लाई चेन से जुड़ी वैश्विक चुनौतियों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी असर देखने को मिल सकता है।
बिजनेस न्यूज़: वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, पश्चिम एशिया में तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और सप्लाई चेन चुनौतियों के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की आगामी मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) बैठक पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। यह बैठक बुधवार, 3 मई से शुरू होगी और इसके फैसलों की घोषणा शुक्रवार, 5 मई 2026 को की जाएगी। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या रेपो रेट में कोई बदलाव होगा या फिर लोन की ब्याज दरें स्थिर रहेंगी।
रेपो रेट 5.25% पर स्थिर रहने की उम्मीद
बाजार विशेषज्ञों और बैंकिंग सेक्टर की रिपोर्ट्स के अनुसार, इस बार भी RBI रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रख सकता है। मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए केंद्रीय बैंक के ‘वेट एंड वॉच’ यानी सावधानीपूर्ण रुख अपनाने की संभावना जताई जा रही है। State Bank of India के आर्थिक शोध विभाग (SBI Research) की रिपोर्ट में भी कहा गया है कि मौजूदा अस्थिर वैश्विक हालात को देखते हुए ब्याज दरों में बदलाव की संभावना कम है।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में जारी उतार-चढ़ाव भारतीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहा है। पश्चिम एशिया में तनाव के चलते कच्चे तेल और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी देखी जा रही है, जिससे आयात लागत बढ़ रही है। इसके साथ ही डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी और सप्लाई चेन में बाधाएं भी मुद्रास्फीति (Inflation) पर दबाव डाल रही हैं। यही कारण है कि RBI फिलहाल किसी भी बड़े नीतिगत बदलाव से बच सकता है।
महंगाई पर बढ़ता दबाव
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SBI की रिपोर्ट के अनुसार, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई दर अगले कुछ तिमाहियों में 5 प्रतिशत से ऊपर बनी रह सकती है।
- चालू तिमाही में महंगाई अनुमान: 4.0% से 4.1%
- अगले तीन तिमाहियों में अनुमान: 5% से अधिक
विशेषज्ञों का मानना है कि खाद्य पदार्थों, ईंधन और कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि का असर महंगाई पर बना रहेगा।
GDP ग्रोथ अनुमान में बदलाव संभव
रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि RBI अपने GDP ग्रोथ अनुमान में हल्की कटौती कर सकता है। हालांकि भारत की आर्थिक स्थिति अभी भी मजबूत बनी हुई है।
- FY 2025-26 की चौथी तिमाही GDP वृद्धि अनुमान: 7.2%
- पूरे वित्त वर्ष की GDP वृद्धि: लगभग 7.5%
यह अनुमान बताता है कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था स्थिर गति से आगे बढ़ रही है। अप्रैल में हुई पिछली बैठक में RBI ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया था और ‘देखो और इंतजार करो’ की नीति अपनाई थी। इसका उद्देश्य वैश्विक आर्थिक संकेतों को समझकर आगे निर्णय लेना था। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार भी केंद्रीय बैंक तटस्थ (Neutral) नीति बनाए रख सकता है और किसी भी तरह की जल्दबाजी से बच सकता है।









