3 से 5 अगस्त तक होने वाली RBI MPC Meeting में रेपो रेट पर फैसला लिया जाएगा, जिसकी घोषणा 5 अगस्त को होगी। महंगाई और वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए विशेषज्ञ इस बार भी ब्याज दरों में बदलाव की संभावना कम मान रहे हैं।
नई दिल्ली: RBI MPC Meeting 2026 पर बैंक ग्राहकों और निवेशकों की नजरें टिकी हैं। 3 से 5 अगस्त तक चलने वाली मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में रेपो रेट की समीक्षा होगी और 5 अगस्त को फैसलों की घोषणा की जाएगी। फिलहाल अधिकांश अर्थशास्त्रियों का मानना है कि महंगाई और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच रिजर्व बैंक ब्याज दरों को फिलहाल स्थिर रख सकता है।
3 से 5 अगस्त तक चलेगी अहम MPC बैठक
भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee) की बैठक 3 अगस्त से शुरू होकर 5 अगस्त तक चलेगी। बैठक के अंतिम दिन आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा समिति के फैसलों की घोषणा करेंगे। इस दौरान सबसे ज्यादा चर्चा रेपो रेट को लेकर रहेगी, क्योंकि इसका सीधा असर बैंक लोन की ब्याज दरों और ग्राहकों की मासिक EMI पर पड़ता है।

फिलहाल रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर है। पिछली मौद्रिक नीति समीक्षा में भी आरबीआई ने इसमें कोई बदलाव नहीं किया था। इस बार भी ज्यादातर अर्थशास्त्रियों का मानना है कि केंद्रीय बैंक यथास्थिति बनाए रख सकता है।
महंगाई और वैश्विक हालात पर रहेगी RBI की नजर
विशेषज्ञों के अनुसार भारतीय अर्थव्यवस्था फिलहाल स्थिर स्थिति में है, लेकिन वैश्विक स्तर पर कई ऐसे कारक मौजूद हैं जो महंगाई को प्रभावित कर सकते हैं। मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और असमान मानसून जैसी परिस्थितियां भविष्य में महंगाई बढ़ा सकती हैं।
इसी वजह से आरबीआई फिलहाल "वेट एंड वॉच" यानी स्थिति पर नजर रखने की रणनीति अपनाने के पक्ष में दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक महंगाई में बड़ा बदलाव नहीं दिखता, तब तक ब्याज दरों में बदलाव की संभावना कम है।
अर्थशास्त्रियों ने क्या जताई उम्मीद?
देश के कई प्रमुख अर्थशास्त्रियों और बैंकिंग विशेषज्ञों का मानना है कि अगस्त की बैठक में रेपो रेट स्थिर रहेगा। इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर का कहना है कि वर्तमान समय में महंगाई नियंत्रण में है, इसलिए नीतिगत दरों को यथावत रखना सबसे उपयुक्त विकल्प होगा।
वहीं जन स्मॉल फाइनेंस बैंक के ट्रेजरी प्रमुख गोपाल त्रिपाठी का मानना है कि रिजर्व बैंक मानसून की स्थिति और एफसीएनआर (बी) जमा योजना के असर का आकलन करने के बाद ही आगे कोई बड़ा फैसला ले सकता है। हालांकि कुछ विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि यदि आने वाले महीनों में महंगाई बढ़ती है तो वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना बन सकती है।
रेपो रेट का आपकी EMI से क्या संबंध है?
रेपो रेट वह ब्याज दर होती है जिस पर भारतीय रिजर्व बैंक वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालिक कर्ज देता है। जब आरबीआई रेपो रेट बढ़ाता है तो बैंकों के लिए धन जुटाना महंगा हो जाता है। इसके बाद बैंक होम लोन, कार लोन, एजुकेशन लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकते हैं, जिससे ग्राहकों की EMI भी बढ़ जाती है।
इसके विपरीत यदि रेपो रेट घटाया जाता है तो बैंकों की फंडिंग लागत कम होती है और वे ग्राहकों को सस्ते ब्याज पर लोन देने में सक्षम होते हैं। इससे नई और फ्लोटिंग रेट वाले लोन की EMI घट सकती है।
5 अगस्त के फैसले पर टिकी करोड़ों लोगों की नजर
5 अगस्त को होने वाली घोषणा केवल बैंक ग्राहकों के लिए ही नहीं बल्कि शेयर बाजार, रियल एस्टेट, ऑटोमोबाइल और बैंकिंग सेक्टर के लिए भी अहम होगी। यदि रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं होता है तो मौजूदा EMI यथावत बनी रहेगी। वहीं किसी भी अप्रत्याशित फैसले का सीधा असर करोड़ों कर्जदारों और निवेशकों पर देखने को मिलेगा। इसलिए इस बार की RBI MPC Meeting पर पूरे वित्तीय बाजार की नजरें टिकी हुई हैं।











