कलाकंद भारत की सबसे पुरानी और लोकप्रिय दूध से बनी मिठाइयों में से एक है। इसकी उत्पत्ति राजस्थान के अलवर से मानी जाती है, जिसे 'अलवर का मावा' भी कहा जाता है। इसका स्वाद न तो बहुत ज्यादा मीठा होता है और न ही फीका। इसकी खासियत है इसका 'दानेदार टेक्सचर' (Grainy Texture) और मुँह में घुल जाने वाली नरमी। त्यौहारों पर मिलावट से बचने के लिए इसे घर पर बनाना सबसे सुरक्षित और स्वादिष्ट विकल्प है।
आवश्यक सामग्री
(तैयारी का समय: 5 मिनट | पकाने का समय: 30-40 मिनट)
- दूध (फुल क्रीम): 2 लीटर (गाढ़ा दूध सबसे अच्छा परिणाम देता है)
- चीनी: ½ कप (या स्वादानुसार, लगभग 100 ग्राम)
- नींबू का रस या विनेगर: 1-2 चम्मच (दूध में दाना बनाने के लिए)
- इलायची पाउडर: ½ छोटा चम्मच
- घी: 1 चम्मच (ट्रे को चिकना करने के लिए)
- गार्निश के लिए: बारीक कटे हुए पिस्ता और बादाम
बनाने का तरीका
- दूध को उबालना और गाढ़ा करना
- एक भारी तले वाली कड़ाही (Heavy bottom pan) में दूध डालें और उबाल आने दें।
- उबाल आने के बाद आंच मध्यम कर दें और दूध को लगातार चलाते रहें ताकि वह तली में न चिपके।
- दूध को तब तक पकाएं जब तक वह अपनी मूल मात्रा से आधा न रह जाए।
- दाना बनाना (Creating the Grainy Texture)
- जब दूध गाढ़ा होकर आधा रह जाए, तो आंच धीमी कर दें।
- अब इसमें नींबू का रस (पानी में मिलाकर) थोड़ा-थोड़ा करके डालें। ध्यान रहे, हमें दूध को पूरा फाड़कर पनीर नहीं बनाना है, बस उसमें छोटे-छोटे दाने (Grains) लाने हैं।
- जैसे ही दूध में दाने दिखने लगें, नींबू डालना बंद कर दें और लगातार चलाते रहें।
मिठास और बुनाई
अब मिश्रण को तब तक पकाएं जब तक कि सारा पानी सूख न जाए और मिश्रण गाढ़ा मावा जैसा न हो जाए। इस स्टेज पर चीनी डालें। चीनी डालते ही मिश्रण थोड़ा पानी छोड़ेगा। इसे मध्यम आंच पर लगातार चलाते हुए तब तक पकाएं जब तक कि मिश्रण कड़ाही के किनारे न छोड़ने लगे और जमने वाली कंसिस्टेंसी में न आ जाए। अंत में इलायची पाउडर डालकर गैस बंद कर दें।
सेट करना
- एक थाली या बर्फी की ट्रे में थोड़ा घी लगाकर उसे चिकना कर लें।
- तैयार मिश्रण को ट्रे में डालें और समान रूप से फैला दें। इसकी मोटाई लगभग ½ से 1 इंच रखें।
- ऊपर से कटे पिस्ता और बादाम डालकर हल्के से दबा दें।
- इसे सेट होने के लिए 3-4 घंटे या पूरी रात के लिए छोड़ दें।
काटना और परोसना
जब कलाकंद अच्छी तरह सेट हो जाए, तो इसे चौकोर टुकड़ों में काट लें। आपका शुद्ध और दानेदार कलाकंद तैयार है!
परोसने और स्टोर करने के टिप्स
- फ्रेशनेस: कलाकंद का स्वाद ताज़ा ही सबसे अच्छा लगता है।
- स्टोरेज: चूंकि यह दूध से बना है, इसे बाहर ज्यादा देर न रखें। फ्रिज में इसे एयरटाइट कंटेनर में रखकर आप 3-4 दिन तक खा सकते हैं।
कलाकंद खाने के फायदे
कलाकंद, मुख्य रूप से दूध और छेने से बना होने के कारण, केवल एक स्वादिष्ट मिठाई ही नहीं बल्कि पोषक तत्वों का भी एक अच्छा स्रोत है। चूंकि इसका मुख्य घटक दूध है, इसलिए यह कैल्शियम और प्रोटीन से भरपूर होता है, जो हड्डियों को मजबूत बनाने और मांसपेशियों के विकास में सहायक है। थकान महसूस होने पर इसका सेवन शरीर को तुरंत ऊर्जा प्रदान करता है।
इसके अलावा, अगर इसे घर पर बनाया जाए, तो यह बाजार की मिठाइयों की तुलना में कहीं अधिक शुद्ध और स्वास्थ्यवर्धक होता है, क्योंकि इसमें किसी प्रकार की मिलावट या हानिकारक प्रिजर्वेटिव्स नहीं होते। हालांकि, इसमें चीनी और कैलोरी की मात्रा अधिक होती है, इसलिए इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करना स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है।











