रोहित रॉय छोटे पर्दे के जाने-माने अभिनेताओं में से एक हैं। करीब 30 साल लंबे करियर में उन्होंने ‘स्वाभिमान’, ‘कुसुम’, ‘भाभी’ समेत कई लोकप्रिय टीवी शोज में काम किया है।
Rohit Roy TV Controversy: अभिनेता रोहित रॉय पिछले कुछ समय से भारतीय टेलीविजन को लेकर दिए अपने एक बयान के कारण चर्चा में हैं। करीब तीन दशक से टीवी इंडस्ट्री का हिस्सा रहे अभिनेता ने एक इंटरव्यू में टेलीविजन को ‘डस्टबिन मीडियम’ बताया था। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया और मनोरंजन जगत में प्रतिक्रिया देखने को मिली। अब रोहित रॉय ने अपने बयान का संदर्भ स्पष्ट करते हुए कहा है कि उनकी टिप्पणी किसी खास अभिनेता, निर्देशक या निर्माता के खिलाफ नहीं थी।
अभिनेता ने यह भी कहा कि कुछ युवा कलाकारों ने उनका पूरा इंटरव्यू देखे बिना केवल सुर्खियों के आधार पर प्रतिक्रिया दी और उन पर व्यक्तिगत टिप्पणियां कीं।
रोहित रॉय ने अपने बयान पर क्या सफाई दी?
एएनआई से बातचीत में रोहित रॉय ने कहा कि उन्हें इस बात पर हैरानी हुई कि कुछ कलाकारों ने पूरा इंटरव्यू देखे बिना उनके बयान पर प्रतिक्रिया दी। उनके मुताबिक, केवल क्लिकबेट हेडलाइन पढ़कर उनके खिलाफ व्यक्तिगत टिप्पणियां की गईं। रोहित ने स्पष्ट किया कि जब उन्होंने टीवी को ‘डस्टबिन मीडियम’ कहा था, तो उनका इशारा किसी व्यक्ति विशेष की ओर नहीं था। वह भारतीय टेलीविजन पर बनने वाले कंटेंट की गुणवत्ता और उसमें दोहराव को लेकर अपनी राय व्यक्त कर रहे थे।
उनका कहना था कि टेलीविजन पर कई बार ऐसा कंटेंट बनाया और प्रसारित किया जाता है, जिसके बारे में यह मान लिया जाता है कि दर्शक उसे देखेंगे। उनके अनुसार, जो लोग टेलीविजन के रचनात्मक स्तर को बेहतर बनाना चाहते हैं, उन्हें मौजूदा कंटेंट पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
OTT कंटेंट से क्यों कर रहे हैं तुलना?
रोहित रॉय ने अपनी बात रखते हुए टेलीविजन और ओटीटी प्लेटफॉर्म के बीच कंटेंट की तुलना भी की। उन्होंने कहा कि आज वह ओटीटी इसलिए देखते हैं क्योंकि वहां उन्हें कुछ ऐसा कंटेंट देखने को मिल रहा है, जिसे वह बेहतर मानते हैं। अभिनेता की टिप्पणी का मुख्य केंद्र टीवी इंडस्ट्री में रचनात्मकता और प्रयोग को लेकर था। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि क्या टेलीविजन पर दर्शकों को लगातार नए विषय और अलग तरह की कहानियां मिल रही हैं।
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोग उनकी राय से असहमत हो सकते हैं। उनके मुताबिक, किसी बयान पर प्रतिक्रिया देने से पहले उसके पूरे संदर्भ को समझना जरूरी है।

‘मैंने किसी एक्टर या डायरेक्टर के बारे में बात नहीं की’
रोहित रॉय ने अपनी सफाई में यह भी कहा कि उनका बयान किसी खास कलाकार या फिल्ममेकर को निशाना बनाकर नहीं दिया गया था। उन्होंने उन लोगों पर नाराजगी जताई जिन्होंने उनके बयान के आधार पर उनके खिलाफ टिप्पणी की। अभिनेता ने कहा कि उन्होंने किसी अभिनेता, निर्देशक या निर्माता का नाम लेकर टेलीविजन के कामकाज पर टिप्पणी नहीं की थी। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि उन्होंने अपने करियर का लगभग 30 साल का लंबा समय टेलीविजन इंडस्ट्री में बिताया है।
रोहित के अनुसार, टेलीविजन के हित को लेकर वह लंबे समय से अपनी बात रखते रहे हैं। इसलिए उनकी टिप्पणी को इंडस्ट्री के खिलाफ व्यक्तिगत हमला मानने के बजाय कंटेंट की गुणवत्ता पर उनकी चिंता के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
क्या कहा था रोहित रॉय ने पहले?
यह विवाद उस इंटरव्यू के बाद शुरू हुआ था, जिसमें रोहित रॉय से भारतीय टीवी इंडस्ट्री में प्रोफेशनलिज्म और क्राफ्ट को लेकर सवाल किया गया था। उन्होंने कहा था कि कभी-कभी उन्हें डर लगता है कि टेलीविजन को लेकर आलोचनात्मक बात करने पर लोग उन्हें कृतघ्न समझ सकते हैं। इसी बातचीत में उन्होंने भारतीय टेलीविजन को ‘डस्टबिन मीडियम’ कहा था। उन्होंने टीवी कंटेंट की तुलना पुराने अखबार से करते हुए कहा था कि दर्शक अगले दिन उसे भूल जाते हैं। साथ ही उन्होंने भारतीय टीवी पर एक जैसे कंटेंट के बार-बार दोहराए जाने और रचनात्मकता की कमी पर सवाल उठाया था।











