रूसी तेल को लेकर बदली रिलायंस की रणनीति, दोबारा शुरू होगी खरीद

रूसी तेल को लेकर बदली रिलायंस की रणनीति, दोबारा शुरू होगी खरीद

रिलायंस इंडस्ट्रीज एक महीने के अंतराल के बाद फिर रूसी कच्चे तेल की खरीद की तैयारी कर रही है। रॉयटर्स के अनुसार कंपनी फरवरी और मार्च में नई खेप मंगाएगी, जिससे तेल बाजार में हलचल देखी जा रही है।

Russian Crude Oil: करीब एक महीने के ठहराव के बाद अब तस्वीर बदलती हुई नजर आ रही है। मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड एक बार फिर रूसी कच्चे तेल (Russian Crude Oil) की खरीद की ओर लौट रही है। रॉयटर्स की रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी फरवरी और मार्च में रूसी तेल की नई खेपें मंगाने की तैयारी कर रही है। यह वही रिलायंस है, जो दुनिया का सबसे बड़ा रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स चलाती है और जिसकी हर रणनीतिक चाल वैश्विक तेल बाजार में हलचल पैदा कर देती है।

यह वापसी ऐसे समय हो रही है, जब रूस से तेल खरीद को लेकर अंतरराष्ट्रीय नियम, प्रतिबंध और राजनीतिक दबाव लगातार बदल रहे हैं। ऐसे में रिलायंस का यह कदम केवल एक कारोबारी फैसला नहीं, बल्कि बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच संतुलन साधने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

दिसंबर के बाद क्यों टूटा था सिलसिला

दिसंबर 2025 में रूसी कच्चे तेल की आखिरी खेप आने के बाद रिलायंस ने कुछ समय के लिए रूसी सप्लाई से दूरी बना ली थी। इसकी एक बड़ी वजह अमेरिका की ओर से मिली एक महीने की विशेष छूट थी। इस छूट के तहत रिलायंस को यह मौका मिला कि वह प्रतिबंधों के दायरे में आने वाली रूसी कंपनी रोसनेफ्ट के साथ अपने पुराने सौदों को 21 नवंबर की समयसीमा के बाद धीरे-धीरे समाप्त कर सके।

उस समय यह माना जा रहा था कि रिलायंस अब लंबे समय के लिए रूसी तेल से दूरी बना सकती है। लेकिन अब फरवरी और मार्च के लिए जो संकेत मिल रहे हैं, वे बताते हैं कि कंपनी ने पूरी तरह से रूसी तेल का विकल्प छोड़ने के बजाय एक नई और संतुलित रणनीति अपनाई है।

इस बार क्या बदला है खरीद का तरीका

सूत्रों के मुताबिक इस बार रिलायंस गैर-प्रतिबंधित रूसी विक्रेताओं से कच्चा तेल खरीदेगी। यानी कंपनी ऐसे सप्लायर्स को चुनेगी, जो अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के दायरे में नहीं आते। इससे रिलायंस को नियमों का पालन करते हुए सस्ता और स्थिर सप्लाई हासिल करने में मदद मिलेगी।

फरवरी और मार्च में कितनी खेपें आएंगी, इस पर अभी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। यह भी तय नहीं है कि मार्च के बाद यह सिलसिला जारी रहेगा या फिर कंपनी दोबारा ब्रेक ले सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि रिलायंस फिलहाल स्थिति को परखते हुए कदम उठा रही है, ताकि किसी भी तरह के कानूनी या व्यापारिक जोखिम से बचा जा सके।

भारत का कुल रूसी तेल आयात सीमित क्यों

हालांकि रिलायंस की वापसी सुर्खियों में है, लेकिन रॉयटर्स के मुताबिक फरवरी और मार्च में भारत का कुल रूसी तेल आयात सीमित ही रहने की संभावना है। इसकी वजह यह है कि भारतीय रिफाइनर अब पहले के मुकाबले ज्यादा सतर्क हो गए हैं।

2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत ने रियायती दरों पर बड़ी मात्रा में रूसी समुद्री तेल खरीदा था। उस समय सस्ता तेल भारतीय रिफाइनरियों के लिए बड़ा फायदा साबित हुआ। लेकिन पश्चिमी देशों के बढ़ते दबाव, नए प्रतिबंध और नियमों ने इस व्यापार को जटिल बना दिया है। अब हर सौदा कानूनी और रणनीतिक जांच के बाद ही किया जा रहा है।

रोसनेफ्ट के साथ पुराना रिश्ता

एक समय था जब रिलायंस और रूसी तेल कंपनी रोसनेफ्ट के बीच मजबूत और लंबी साझेदारी थी। रिलायंस रोजाना करीब 5 लाख बैरल रूसी कच्चा तेल आयात करती थी। यह तेल गुजरात के जामनगर में स्थित 14 लाख बैरल प्रतिदिन क्षमता वाले विशाल रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स में प्रोसेस होता था।

जामनगर का यह प्लांट न केवल भारत, बल्कि दुनिया के सबसे बड़े रिफाइनिंग हब्स में गिना जाता है। अब एक बार फिर यही जामनगर रिफाइनरी चर्चा में है, क्योंकि रिलायंस की नई रणनीति का केंद्र यही बन रही है।

यूरोप के नए नियम

रिलायंस की रणनीति बदलने की सबसे बड़ी वजह यूरोपीय यूनियन के नए नियम हैं। यूरोप ने 21 जनवरी से यह साफ कर दिया है कि वह ऐसे रिफाइनरियों से बने ईंधन का आयात नहीं करेगा, जिन्होंने बिल ऑफ लोडिंग की तारीख से पहले 60 दिनों के भीतर रूसी तेल प्रोसेस किया हो।

इस नियम ने वैश्विक रिफाइनरियों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। रिलायंस ने इस स्थिति से निपटने के लिए अपनी रिफाइनिंग स्ट्रैटेजी में बदलाव किया है। कंपनी ने कहा है कि 20 नवंबर के बाद आने वाली रूसी तेल की खेप को वह अपनी भारत-केंद्रित 6.6 लाख बैरल प्रतिदिन क्षमता वाली रिफाइनरी में प्रोसेस करेगी।

इससे रिलायंस को यह फायदा होगा कि उसकी 7.04 लाख बैरल प्रतिदिन क्षमता वाली निर्यात रिफाइनरी यूरोप को ईंधन की सप्लाई बिना किसी रुकावट के जारी रख सकेगी। यह एक तरह से नियमों के भीतर रहकर कारोबार को सुचारू रखने की स्मार्ट रणनीति मानी जा रही है।

पश्चिम एशिया की ओर झुकता भारत

रॉयटर्स की एक और रिपोर्ट बताती है कि भारतीय रिफाइनर अब धीरे-धीरे रूस से दूरी बनाकर पश्चिम एशिया की ओर रुख कर रहे हैं। सऊदी अरब, इराक और यूएई जैसे देशों से तेल आयात में फिर से रुचि बढ़ रही है।

यह बदलाव सिर्फ तेल की जरूरत तक सीमित नहीं है। माना जा रहा है कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौतों और टैरिफ कम करने की कोशिशों का भी इसमें बड़ा रोल है। पश्चिमी देशों के साथ बेहतर संबंध बनाए रखने के लिए भारत अपनी ऊर्जा रणनीति में संतुलन साधने की कोशिश कर रहा है।

मजबूत नतीजों के बीच बड़ा फैसला

रिलायंस की रूसी तेल पर वापसी ऐसे समय हो रही है, जब कंपनी के वित्तीय नतीजे भी मजबूत रहे हैं। दिसंबर 2025 को खत्म तीसरी तिमाही में रिलायंस का शुद्ध मुनाफा बढ़कर 22,167 करोड़ रुपये हो गया। वहीं ऑपरेशंस से कंपनी की आमदनी 2.93 लाख करोड़ रुपये रही।

करीब 20 लाख करोड़ रुपये की मार्केट वैल्यू के साथ रिलायंस भारत की सबसे बड़ी कंपनियों में शामिल है। ऐसे में रूसी तेल को लेकर लिया गया यह फैसला सिर्फ कच्चे तेल की खरीद नहीं, बल्कि लॉन्ग टर्म रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

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