ब्लास्ट में SP की हत्या के बाद डर में परिवार, नक्सलियों के गढ़ से रिपोर्ट

ब्लास्ट में SP की हत्या के बाद डर में परिवार, नक्सलियों के गढ़ से रिपोर्ट

बिहार के नक्सल प्रभावित इलाके जमुई से दिल दहला देने वाली जमीनी हकीकत सामने आई है। नक्सली हिंसा में शहीद हुए एसपी की पत्नी आज भी डर और असुरक्षा के साये में जीने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि पति को ब्लास्ट में उड़ा दिए जाने के बाद से जिंदगी पूरी तरह बदल गई है। अब सबसे बड़ा डर बेटियों को लेकर है। वे कहती हैं, बेटियां जवान हो गई हैं, हर दिन यही डर लगा रहता है कि कब उन्हें उठाकर ले जाएंगे।

नक्सलियों के गढ़ कहे जाने वाले इस इलाके में हालात आज भी सामान्य नहीं हैं। शहीद अधिकारी की पत्नी बताती हैं कि घटना को सालों बीत चुके हैं, लेकिन जख्म आज भी ताजा हैं। पति के जाने के बाद न सिर्फ परिवार टूट गया, बल्कि सुरक्षा का भरोसा भी कमजोर पड़ गया। गांव और आसपास के इलाकों में नक्सलियों की मौजूदगी का खौफ आज भी लोगों के मन में बैठा हुआ है।

पीड़िता का कहना है कि प्रशासन की ओर से मदद और भरोसे के दावे तो किए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर सुरक्षा को लेकर डर खत्म नहीं हुआ। खासकर बेटियों को लेकर चिंता हर दिन और गहरी होती जा रही है। स्कूल, कॉलेज या बाहर जाने के समय मन में अनहोनी की आशंका बनी रहती है। वे कहती हैं कि कई बार लगता है कि एक पल की चूक सब कुछ छीन सकती है।

स्थानीय लोगों का भी कहना है कि इलाके में नक्सली गतिविधियां भले पहले जैसी न हों, लेकिन डर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। कई परिवार आज भी खामोशी में जी रहे हैं, क्योंकि विरोध करने या खुलकर बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पाते। नक्सली हिंसा का असर सिर्फ उस एक घटना तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पीढ़ियों तक परिवारों को मानसिक रूप से तोड़ देता है।

शहीद एसपी की पत्नी ने यह भी कहा कि उन्हें अपने पति की शहादत पर गर्व है, लेकिन यह भी सच्चाई है कि परिवार को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ी है। आज वे चाहती हैं कि सरकार और प्रशासन सिर्फ कागजी आश्वासन नहीं, बल्कि स्थायी सुरक्षा व्यवस्था और भरोसा दे

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