राजस्थान के नागौर जिले के छोटी खाटू कस्बे में 162वें मर्यादा महोत्सव के शुभारंभ से पूर्व एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में आचार्य महा श्रमण के पावन सानिध्य में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघचालक डॉ. मोहन भागवत भी उपस्थित थे।
राजस्थान: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सर संघचालक डॉ. मोहन भागवत ने देश के सेवा भाव और वैश्विक मदद पर जोर देते हुए कहा कि भारत हमेशा दुनिया के लिए मर्यादा और सेवा का उदाहरण रहा है। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि पाकिस्तान की लगातार हरकतों के बावजूद भारत ने वहां बाढ़ पीड़ितों की मदद की।
यह बयान उन्होंने राजस्थान के नागौर जिले के छोटी खाटू कस्बे में आयोजित 162वें मर्यादा महोत्सव के भव्य कार्यक्रम में दिया। आचार्य महा श्रमण के सानिध्य में संपन्न इस आयोजन में संघ प्रमुख ने धर्म, सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी पर विस्तार से प्रकाश डाला।
'दुनिया के देशों की मदद करने वाला एकमात्र देश भारत'
डॉ. भागवत ने कहा, "दुनिया के देशों की मदद करने वाला एकमात्र देश भारत है। पाकिस्तान में बाढ़ आई, तब भी भारत मदद करने गया। पाकिस्तान इतनी हरकत करता है हमारे खिलाफ, फिर भी हमने अपनी स्थिति बढ़ रही होने के बावजूद अपना पेट काटकर उसकी सहायता की। इसका कारण है – धर्म। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत में केवल आर्थिक स्वार्थ के पीछे दौड़ना प्राथमिकता नहीं है।
पैसे के पीछे भागना हमारी परंपरा नहीं है। भारत में समाज के श्रेष्ठ लोग केवल बोलते नहीं, बल्कि अपने जीवन में इसे अपनाते हैं। पैसा कमाने वाला भी दान करता है, लेकिन कमाई को बांटना और जीवन में उसका उपयोग करना ज्ञान की आवश्यकता है।

भारत का वैश्विक दृष्टिकोण
भागवत ने कहा, "वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में अधिकांश व्यक्ति और देश केवल अपने स्वार्थ की चिंता करते हैं। लेकिन भारत न तो इस मार्ग पर चला है और न चलेगा। भारत विश्व के सभी देशों की चिंता करता है। संकट के समय भारत ने हमेशा निस्वार्थ सेवा और सहायता का उदाहरण पेश किया है। उन्होंने विशेष उदाहरण देते हुए कहा कि भारत ने पाकिस्तान, मालदीव, नेपाल और श्रीलंका जैसी पड़ोसी देशों की आपदा में मदद की। अपना पेट काटकर भी भारत ने अन्य देशों की मदद की। यही धर्म है। मैं जिऊंगा सबका जीवन बनाने के लिए, क्योंकि सब अपने हैं।
डॉ. भागवत ने धर्म और मर्यादा पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, "हम सब अलग-अलग दिखते हैं, लेकिन मूल में एक ही हैं। सबका जीवन समान रूप से चलता है। यही धर्म हमें सिखाता है। धर्म का अर्थ है – धारण करने का भाव, सत्य की खोज और समाज के प्रति जिम्मेदारी। अहिंसा, ब्रह्मचर्य, अस्तेय और अपरिग्रह के मूल्य प्रत्यक्ष रूप से अनुभव करने का यह स्थान ही भारत है।"
उन्होंने यह भी कहा कि भारत का सेवा भाव केवल शब्दों में नहीं, बल्कि कर्मों में भी दिखाई देता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश के लोग संकट में स्वार्थ त्यागकर दूसरों की मदद करने में विश्वास रखते हैं, और यही वैश्विक स्तर पर भारत की पहचान है।











