रुमाली रोटी उत्तर भारत, विशेषकर पंजाबी और मुग़लई व्यंजनों (Mughlai Cuisine) की एक बेहद खास और लोकप्रिय रोटी है। इसका नाम 'रुमाल' शब्द से लिया गया है, जिसका अर्थ है रूमाल (handkerchief)। यह रोटी इतनी पतली, मुलायम और लचीली होती है कि इसे आसानी से एक रूमाल की तरह मोड़ा जा सकता है। यह मुंह में जाते ही घुल जाती है और इसे बनाने के लिए एक विशेष कला की आवश्यकता होती है।
सामग्री
- आटा: 2 कप मैदा (All-purpose flour), ½ कप गेहूं का आटा (वैकल्पिक, थोड़े स्वस्थ विकल्प के लिए)।
- तरल: ½ कप दूध (गुनगुना), पानी (आटा गूंथने के लिए, आवश्यकतानुसार)।
- अन्य: 2 बड़े चम्मच तेल या घी, नमक स्वादानुसार।
बनाने का तरीका
- आटा गूंथना: एक परात में मैदा, गेहूं का आटा और नमक मिलाएं। इसमें तेल (मोयन) डालें और अच्छी तरह मिलाएं। अब धीरे-धीरे गुनगुना दूध और फिर पानी डालते हुए एकदम नरम और बहुत लचीला (elastic) आटा गूंथ लें। आटे को जितना ज्यादा मसलेंगे, रोटी उतनी ही अच्छी बनेगी। आटे को गीले कपड़े से ढककर कम से कम 30 मिनट के लिए सेट होने दें।
- लोई और बेलना: आटे की छोटी-छोटी लोइयां बना लें। एक लोई लें, सूखा मैदा लगाएं और इसे बेलन से बेलना शुरू करें। इसे तब तक बेलें जब तक कि यह कागज जैसी पतली और पारदर्शी न हो जाए। (पेशेवर रसोइये इसे हवा में उछालकर और हाथों पर घुमाकर बड़ा करते हैं, लेकिन घर पर बेलन का उपयोग करना आसान है)।
- तवा तैयार करना: पारंपरिक रूप से रुमाली रोटी को 'उल्टे तवे' (inverted wok/kadai) पर बनाया जाता है। इसके लिए लोहे की कड़ाही को उल्टा करके गैस पर रखें और तेज़ आंच पर बहुत अच्छी तरह गरम करें। (आप सामान्य तवे पर भी बना सकते हैं, बस आंच तेज़ होनी चाहिए)।
- पकाना (Cooking): बेली हुई पतली रोटी को सावधानी से उठाएं और तेज़ गरम तवे पर फैला दें। जैसे ही इस पर छोटे बुलबुले दिखाई दें (कुछ ही सेकंड में), इसे पलट दें।
- सेकना और फोल्ड करना: एक साफ सूती कपड़े की मदद से किनारों को हल्का दबाएं। इसे ज्यादा देर तक न पकाएं, नहीं तो यह पापड़ जैसी कड़क हो जाएगी। इसे तवे से उतारते ही तुरंत रूमाल की तरह चार परतों में फोल्ड कर लें और कपड़े में लपेटकर या कैसरोल (hot pot) में रखें ताकि यह नरम बनी रहे।
परोसने के तरीके
- रुमाली रोटी का स्वाद गाढ़ी और समृद्ध ग्रेवी वाली सब्जियों के साथ सबसे अच्छा लगता है। इसे निम्नलिखित व्यंजनों के साथ परोसें:
- वेज: कड़ाही पनीर, दाल मखनी, मलाई कोफ्ता, पनीर लबाबदार।
- नॉन-वेज: बटर चिकन, मटन कोरमा, चिकन चंगेजी।
- स्टार्टर: इसे सीख कबाब या गलावटी कबाब के साथ लपेटकर 'काठी रोल' की तरह भी खाया जाता है।
खाने के फायदे
रुमाली रोटी मुख्य रूप से मैदा और दूध के मिश्रण से बनती है, जो शरीर को तुरंत ऊर्जा (Instant Energy) प्रदान करती है। चूंकि यह कागज की तरह बहुत पतली और हल्की होती है, इसलिए यह भारी-भरकम तंदूरी नान या कुलचे की तुलना में खाने में हल्की लगती है। इसमें दूध का उपयोग होने से थोड़ी मात्रा में प्रोटीन और कैल्शियम भी मिलता है। यह भारी और मसालेदार ग्रेवी के साथ मिलकर भोजन के स्वाद को संतुलित करती है, जिससे खाने का आनंद और तृप्ति (Satisfaction) बढ़ जाती है।











