संसद की लोक लेखा समिति (PAC) ने SC छात्रों की प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाओं में CAG द्वारा उजागर की गई अनियमितताओं पर केंद्र और राज्यों से जवाब मांगा है। मंत्रालय को एक महीने में कार्रवाई रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।
दिल्ली: संसद की लोक लेखा समिति (Public Accounts Committee-PAC) ने अनुसूचित जाति (SC) के विद्यार्थियों के लिए चलाई जा रही प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाओं में सामने आई कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्र और कई राज्य सरकारों से जवाब मांगा है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की 2025 की ऑडिट रिपोर्ट में योजनाओं के क्रियान्वयन में कई खामियों और संदिग्ध गतिविधियों के संकेत मिलने के बाद समिति ने जवाबदेही पर जोर दिया है। समिति ने केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय को संबंधित मुद्दों पर विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट सौंपने के लिए एक महीने का समय दिया है।
छात्रवृत्ति योजनाओं में गड़बड़ियों पर PAC के सवाल
15 अक्टूबर 2026 को हुई बैठक में PAC ने SC विद्यार्थियों के लिए संचालित छात्रवृत्ति योजनाओं के क्रियान्वयन में सामने आई कमियों पर केंद्र और राज्यों से जवाब मांगा। समिति का ध्यान विशेष रूप से CAG की ऑडिट रिपोर्ट में दर्ज उन संकेतों पर था, जिन्हें संभावित धोखाधड़ी या संदिग्ध लेनदेन से जोड़कर देखा जा सकता है।
प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति आम तौर पर स्कूली शिक्षा के शुरुआती स्तर पर पढ़ने वाले पात्र विद्यार्थियों के लिए होती है, जबकि पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति माध्यमिक शिक्षा के बाद की पढ़ाई में सहायता देती है। इन योजनाओं का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर पात्र विद्यार्थियों को शिक्षा जारी रखने में मदद करना है।
ऐसे में योजनाओं के क्रियान्वयन में गड़बड़ियां होने पर लाभार्थियों तक सहायता पहुंचने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। PAC ने इसी संदर्भ में ऑडिट में सामने आए मुद्दों पर जवाबदेही और सुधारात्मक कार्रवाई की जानकारी मांगी है। हालांकि, ऑडिट में किसी लेनदेन या रिकॉर्ड को संदिग्ध बताया जाना अपने आप में धोखाधड़ी साबित होने के बराबर नहीं है। इसके लिए संबंधित तथ्यों की जांच और उचित प्रक्रिया के तहत निष्कर्ष निकालना जरूरी होता है।
छह राज्यों के मुख्य सचिवों की अनुपस्थिति पर नाराजगी
कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल की अध्यक्षता वाली PAC उन छह राज्यों के मुख्य सचिवों के खिलाफ विशेषाधिकार नोटिस देने पर विचार कर रही है, जिन्हें बैठक में शामिल होकर CAG की रिपोर्ट में उठाए गए सवालों पर स्पष्टीकरण देना था।
द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, ये अधिकारी 15 अक्टूबर की बैठक में उपस्थित नहीं हुए। समिति इन अधिकारियों से यह जानना चाहती थी कि ऑडिट रिपोर्ट में बताई गई कमियों को दूर करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं और संबंधित राज्यों की ओर से क्या कार्रवाई की गई है।
संसदीय समितियां सरकारी खर्च, योजनाओं के क्रियान्वयन और ऑडिट में सामने आई कमियों की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। निर्धारित बैठक में अधिकारियों की अनुपस्थिति के कारण समिति को संबंधित सवालों के जवाब हासिल करने में कठिनाई हो सकती है। विशेषाधिकार नोटिस पर विचार किए जाने का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का अंतिम फैसला हो चुका है। यह एक संभावित संसदीय कदम है, जिस पर समिति आगे विचार कर सकती है।
केंद्र ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की जिम्मेदारी का दिया हवाला
बैठक के दौरान केंद्र सरकार की ओर से यह दलील दी गई कि छात्रवृत्ति योजनाओं के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रशासन पर है। इस जवाब के बाद समिति ने मंत्रालय से योजनाओं में सामने आई कमियों पर अधिक विस्तृत जानकारी मांगी।
PAC का जोर इस बात पर है कि CAG की रिपोर्ट में दर्ज प्रत्येक मुद्दे के संबंध में उठाए गए कदमों का स्पष्ट विवरण उपलब्ध कराया जाए। केवल जिम्मेदारी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों पर होने का हवाला देना समिति की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं माना गया।
छात्रवृत्ति योजनाओं में केंद्र और राज्यों की भूमिकाएं अलग-अलग हो सकती हैं। इसलिए किसी कमी के लिए जिम्मेदारी तय करने से पहले यह समझना आवश्यक है कि संबंधित स्तर पर किस विभाग या प्रशासनिक इकाई की क्या भूमिका थी।
समिति की मांग का उद्देश्य योजनाओं के क्रियान्वयन में सामने आई खामियों पर कार्रवाई का रिकॉर्ड प्राप्त करना और यह जानना है कि भविष्य में ऐसी समस्याओं को रोकने के लिए क्या सुधार किए जा रहे हैं।
मंत्रालय को एक महीने में देनी होगी कार्रवाई रिपोर्ट
PAC ने केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय को CAG की ऑडिट रिपोर्ट में उठाए गए मुद्दों पर विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट सौंपने के लिए एक महीने का समय दिया है।
इस रिपोर्ट में समिति यह जानना चाहती है कि प्रत्येक मुद्दे पर क्या कदम उठाए गए, किन कमियों को दूर किया गया और किन मामलों में कार्रवाई अभी लंबित है। रिपोर्ट से समिति को केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया और योजनाओं में सुधार की स्थिति का आकलन करने में मदद मिल सकती है। कार्रवाई रिपोर्ट का महत्व इसलिए भी है, क्योंकि ऑडिट के दौरान सामने आई कमियों के बाद संबंधित विभागों की प्रतिक्रिया और सुधारात्मक कदमों का दस्तावेजी रिकॉर्ड तैयार करना जरूरी होता है।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि सभी अनियमितताओं की पुष्टि हो चुकी है या संबंधित मामलों में किसी व्यक्ति अथवा संस्था को दोषी ठहराया गया है। रिपोर्ट में उठाए गए मुद्दों पर मंत्रालय और संबंधित राज्यों की विस्तृत प्रतिक्रिया आने के बाद स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है।
SC विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति योजनाएं क्यों महत्वपूर्ण हैं?
प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाएं पात्र अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को शिक्षा संबंधी खर्चों में सहायता देने के उद्देश्य से संचालित की जाती हैं। आर्थिक सहायता से विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई जारी रखने और उच्च शिक्षा तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है।
इन योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए पात्रता की जांच, लाभार्थियों के रिकॉर्ड का सत्यापन, भुगतान की निगरानी और शिकायतों के निपटारे जैसी प्रक्रियाएं महत्वपूर्ण होती हैं।
यदि रिकॉर्ड में गड़बड़ियां हों या भुगतान प्रक्रिया में कमियां रह जाएं, तो वास्तविक पात्र लाभार्थियों को सहायता मिलने में देरी या अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए ऑडिट में सामने आई कमियों की जांच और समय पर सुधार आवश्यक हैं।
PAC की समीक्षा इसी व्यापक जवाबदेही प्रक्रिया का हिस्सा है। समिति यह सुनिश्चित करना चाहती है कि सार्वजनिक धन से संचालित योजनाओं के क्रियान्वयन में सामने आए मुद्दों पर संबंधित विभाग उचित कार्रवाई करें और उनकी जानकारी संसद के समक्ष रखी जा सके।
अब मंत्रालय और राज्यों की रिपोर्ट पर नजर
15 अक्टूबर की बैठक के बाद अब केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की कार्रवाई रिपोर्ट और संबंधित राज्यों की प्रतिक्रियाएं महत्वपूर्ण होंगी। मंत्रालय को एक महीने के भीतर विस्तृत रिपोर्ट देनी है, जबकि छह राज्यों के मुख्य सचिवों की अनुपस्थिति के मामले में PAC के संभावित अगले कदमों पर भी नजर रहेगी।
आगे की प्रक्रिया में समिति ऑडिट रिपोर्ट में दर्ज मुद्दों, सरकारी जवाबों और सुधारात्मक कदमों की समीक्षा कर सकती है। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि छात्रवृत्ति योजनाओं में सामने आई कमियों को दूर करने के लिए कितनी प्रगति हुई है।









