Share Market Closed: शेयर बाजार में लौटी बिकवाली, सेंसेक्स 429 अंक गिरा; निफ्टी 22,603 पर बंद

Share Market Closed: RBI के रेपो रेट बढ़ाने के बाद शेयर बाजार में बिकवाली लौट आई। सेंसेक्स 429 अंक गिरकर 72,638.70 पर और निफ्टी 173 अंक टूटकर 22,603.05 पर

भारतीय शेयर बाजार में बुधवार, 7 अक्टूबर को गिरावट दर्ज की गई। इसके साथ ही लगातार दो कारोबारी सत्रों से जारी तेजी का सिलसिला थम गया। शुरुआती कारोबार में दबाव के बीच निफ्टी 22,650 के स्तर से नीचे बना रहा, जबकि निवेशकों की नजर बाजार की आगे की दिशा और प्रमुख शेयरों के प्रदर्शन पर रही।

बिजनेस न्यूज़: भारतीय शेयर बाजार में बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को लगातार दो कारोबारी सत्रों की तेजी के बाद फिर दबाव देखने को मिला। घरेलू बाजार के प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। सेंसेक्स 429.11 अंक यानी 0.59 फीसदी टूटकर 72,638.70 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 173.05 अंक यानी 0.76 फीसदी की गिरावट के साथ 22,603.05 पर पहुंच गया। कारोबार के दौरान निफ्टी 22,650 के स्तर से नीचे बना रहा।

बाजार में आई इस गिरावट के बीच कई प्रमुख सेक्टरों में बिकवाली देखने को मिली। खासकर आईटी, ऑटो, मेटल और रियल्टी शेयरों पर दबाव रहा। वहीं कुछ बैंकिंग और चुनिंदा बड़े शेयरों में खरीदारी ने गिरावट को सीमित करने की कोशिश की।

1,900 से ज्यादा शेयरों में रही तेजी

बाजार की चौड़ाई यानी मार्केट ब्रेड्थ मिली-जुली रही। कारोबारी सत्र के अंत तक करीब 1,928 शेयर बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि 2,251 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। लगभग 192 शेयरों के भाव में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ। निफ्टी के प्रमुख शेयरों में टाइटन कंपनी, अडानी एंटरप्राइजेज, हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, JSW स्टील और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स सबसे ज्यादा दबाव में रहे। दूसरी ओर कोटक महिंद्रा बैंक, BSE लिमिटेड, भारती एयरटेल, ICICI बैंक और कोल इंडिया बढ़त दर्ज करने वाले प्रमुख शेयरों में शामिल रहे।

मिडकैप शेयरों में भी कमजोरी रही। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स करीब 0.6 फीसदी नीचे बंद हुआ। हालांकि, स्मॉलकैप शेयरों ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया और स्मॉलकैप इंडेक्स में करीब 0.3 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई।

ज्यादातर सेक्टर इंडेक्स लाल निशान में

सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो मीडिया और PSU बैंक को छोड़कर अधिकांश प्रमुख सेक्टर इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए। FMCG, IT, ऑटो, मेटल और रियल्टी सेक्टर में लगभग 1 से 2 फीसदी तक की कमजोरी देखने को मिली। इन सेक्टरों में बिकवाली का असर व्यापक बाजार पर भी पड़ा। निवेशकों ने ब्याज दरों और कच्चे तेल की कीमतों से जुड़े जोखिमों के बीच कुछ क्षेत्रों में मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी।

RBI के फैसले से बढ़ी ब्याज दरों की चिंता

बाजार में बुधवार की गिरावट के पीछे प्रमुख कारणों में RBI की ब्याज दरों में बढ़ोतरी को भी माना जा रहा है। केंद्रीय बैंक ने अपनी अक्टूबर मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की वृद्धि की है। फरवरी 2023 के बाद यह पहली बार है जब RBI ने रेपो रेट बढ़ाया है। ब्याज दरों में बढ़ोतरी से कंपनियों के लिए कर्ज की लागत बढ़ सकती है और इसका असर निवेश तथा खपत पर पड़ सकता है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, दरों में बदलाव महंगाई से जुड़े जोखिमों को लेकर केंद्रीय बैंक की चिंता को भी दर्शाता है।

हालांकि, भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियादी स्थिति को लेकर RBI का रुख सकारात्मक बना हुआ है। इसके बावजूद शेयर बाजार में निवेशक मौद्रिक नीति के असर को लेकर सतर्क नजर आए।

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने भी बढ़ाया दबाव

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 1 फीसदी बढ़कर 101.5 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई। तेल की कीमतों में तेजी भारतीय बाजार के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के एक बड़े हिस्से के लिए आयात पर निर्भर है। मध्य पूर्व से आपूर्ति बढ़ने के बावजूद अमेरिकी तेल उत्पादन पर तूफान से जुड़े जोखिम और सऊदी अरब पर हूथी हमलों के असर ने कच्चे तेल की कीमतों को समर्थन दिया। महंगा क्रूड भारत के आयात बिल और महंगाई पर दबाव बढ़ा सकता है।

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