दिल्ली में मतदाता सूची को लेकर आप-कांग्रेस का प्रदर्शन, एसआईआर पर उठाए सवाल

दिल्ली के कश्मीरी गेट में आप और कांग्रेस ने मतदाता सूची और एसआईआर के विरोध में प्रदर्शन किया। अरविंद केजरीवाल ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की।

मतदाता सूची में कथित हेरफेर और एसआईआर के विरोध में आप और दिल्ली कांग्रेस ने कश्मीरी गेट स्थित मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। अरविंद केजरीवाल ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की, जबकि पुलिस ने सुरक्षा बढ़ाई।

नई दिल्ली: मतदाता सूची में कथित हेरफेर और चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया यानी एसआईआर के विरोध में आम आदमी पार्टी और दिल्ली कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने बुधवार को दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन कश्मीरी गेट स्थित दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के बाहर किया गया।

प्रदर्शन में आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं, नेताओं और समर्थकों के साथ कांग्रेस से जुड़े कार्यकर्ता भी शामिल हुए। विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं और चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश हो रही है। हालांकि, ये आरोप राजनीतिक दलों के दावे हैं और इन्हें चुनाव आयोग के आधिकारिक रिकॉर्ड से सत्यापित किया जाना बाकी है।

प्रदर्शन के दौरान कार्यालय के बाहर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, दोपहर 2:12 बजे तक प्रदर्शन जारी था और उस समय तक कश्मीरी गेट पर किसी हिरासत या झड़प की सूचना नहीं थी।

आप ने बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं से प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की

आप की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने पार्टी के कार्यकर्ताओं, समर्थकों और नेताओं से बड़ी संख्या में प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की थी। पार्टी की ओर से जारी बयान में कहा गया कि कांग्रेस, वाम दलों और दिल्ली में सक्रिय अन्य विपक्षी समूहों को भी प्रदर्शन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया था।

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि आम आदमी पार्टी उन मुद्दों को लेकर सड़क पर उतरेगी जिन्हें विपक्षी दल ‘वोट चोरी’ के रूप में पेश कर रहे हैं। हालांकि, यह शब्द विपक्षी दलों की ओर से लगाए गए आरोप को दर्शाता है और चुनाव आयोग के खिलाफ किसी स्थापित तथ्य या निष्कर्ष का प्रमाण नहीं है।

आप का कहना है कि मतदाता सूची से जुड़े मुद्दे लोकतांत्रिक प्रक्रिया और मतदाताओं के अधिकारों से सीधे जुड़े हैं। पार्टी इसी आधार पर एसआईआर को लेकर सवाल उठा रही है।

अरविंद केजरीवाल ने भी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में संशोधन के दौरान वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं और अयोग्य मतदाताओं के नाम जोड़े जा रहे हैं।

हालांकि, ये दावे भी राजनीतिक आरोप हैं और इनकी पुष्टि के लिए चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़ों तथा मतदाता सूची में किए गए बदलावों का सत्यापन आवश्यक है।

केजरीवाल और आप का मुख्य तर्क यह है कि यदि किसी योग्य मतदाता का नाम मतदाता सूची से हटता है, तो इससे उसके मतदान के अधिकार पर सीधा असर पड़ सकता है। पार्टी का कहना है कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया पारदर्शी और सत्यापन योग्य होनी चाहिए।

मंगलवार के विपक्षी मार्च से अलग रहा था आप का रुख

बुधवार का प्रदर्शन आम आदमी पार्टी के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पार्टी मंगलवार को हुए इंडिया ब्लॉक के चुनाव आयोग की ओर मार्च में शामिल नहीं हुई थी।

मंगलवार को विपक्षी दलों के नेताओं और सांसदों ने संसद से चुनाव आयोग के मुख्यालय की ओर मार्च करने की कोशिश की थी। पुलिस ने उस मार्च को रोक दिया था। इसके बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया गया था। बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया।

दिल्ली पुलिस ने कहा था कि मंगलवार के मार्च के लिए अनुमति नहीं ली गई थी। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने आकाशवाणी भवन परिसर में प्रवेश किया और वहां धरना दिया।

पुलिस ने बताया था कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए करीब 260 लोगों को हिरासत में लिया गया, जिनमें 10 सांसद भी शामिल थे।

बुधवार का प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयोग के कार्यालय से अलग

बुधवार को आयोजित प्रदर्शन का स्थान भी महत्वपूर्ण है। आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के कार्यकर्ता कश्मीरी गेट स्थित दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं।

यह स्थान चुनाव आयोग के राष्ट्रीय मुख्यालय निर्वाचन सदन से अलग है। यानी बुधवार का प्रदर्शन भारत निर्वाचन आयोग के केंद्रीय कार्यालय के बाहर नहीं, बल्कि दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के बाहर आयोजित किया गया।

आप ने इसे मतदाता सूची में कथित नाम हटाए जाने और एसआईआर के खिलाफ चल रहे व्यापक विपक्षी अभियान का हिस्सा बताया है।

एसआईआर को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच बहस

विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर चुनावी मतदाता सूचियों की व्यापक समीक्षा और अद्यतन से जुड़ी प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाना है। लेकिन इस प्रक्रिया के दौरान नाम हटाने, पात्र मतदाताओं के सत्यापन और दस्तावेजों की आवश्यकता जैसे मुद्दे राजनीतिक बहस का कारण बन सकते हैं।

विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया में वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं। उनका कहना है कि ऐसी स्थिति में खास तौर पर कमजोर और हाशिये पर रहने वाले वर्गों के मतदाताओं के मतदान अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।

दूसरी ओर, किसी भी ऐसे आरोप की पुष्टि के लिए आधिकारिक मतदाता सूची, नाम हटाने के कारण और चुनाव आयोग द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों को देखना जरूरी है। बुधवार के प्रदर्शन को लेकर उपलब्ध रिपोर्ट में दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी या भारत निर्वाचन आयोग की तत्काल प्रतिक्रिया शामिल नहीं थी।

प्रदर्शन स्थल पर भारी पुलिस बल तैनात

बुधवार के प्रदर्शन को देखते हुए कश्मीरी गेट स्थित कार्यालय के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, दोपहर 2:12 बजे तक प्रदर्शन जारी था।

रिपोर्ट तैयार किए जाने तक वहां किसी प्रदर्शनकारी की गिरफ्तारी या पुलिस के साथ झड़प की सूचना नहीं थी। मंगलवार को हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान हिरासत और आकाशवाणी परिसर में प्रवेश को लेकर विवाद के बाद बुधवार की सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया।

पुलिस की तैनाती का उद्देश्य प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना बताया गया है।

विपक्षी अभियान में आप की फिर सक्रिय भागीदारी

बुधवार का प्रदर्शन यह भी दर्शाता है कि आम आदमी पार्टी ने मतदाता सूची और एसआईआर के मुद्दे पर विपक्षी आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लेना शुरू कर दिया है। मंगलवार के संयुक्त मार्च से दूरी बनाने के बाद आप ने अगले दिन दिल्ली में स्वतंत्र प्रदर्शन आयोजित किया।

आप का कहना है कि मतदाता सूची से जुड़े मुद्दे केवल किसी एक राजनीतिक दल का विषय नहीं हैं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया और नागरिकों के मतदान अधिकार से जुड़े हैं।

सौरभ भारद्वाज और अरविंद केजरीवाल के बयानों से स्पष्ट है कि पार्टी इस मुद्दे को दिल्ली में राजनीतिक अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने की तैयारी में है।

आगे बढ़ सकता है राजनीतिक टकराव

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर विपक्षी दलों की आपत्तियों ने दिल्ली में राजनीतिक टकराव बढ़ा दिया है। एक तरफ विपक्षी दल आयोग से जवाब और पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ इन आरोपों की पुष्टि आधिकारिक चुनावी रिकॉर्ड के आधार पर होना बाकी है।

बुधवार का कश्मीरी गेट प्रदर्शन मंगलवार के घटनाक्रम की अगली कड़ी के रूप में देखा जा सकता है। फिलहाल प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहने की सूचना है और किसी हिरासत या झड़प की जानकारी सामने नहीं आई है।

इस पूरे मामले में दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी और भारत निर्वाचन आयोग की ओर से बुधवार के प्रदर्शन पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है। तब तक मतदाता सूची में कथित हेरफेर और ‘वोट चोरी’ से जुड़े दावों को राजनीतिक दलों के आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

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