संसद में सियासी घमासान, Om Birla के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस, 119 सांसदों के हस्ताक्षर का दावा

Lok Sabha Speaker Om Birla के खिलाफ विपक्ष ने No-Confidence Motion का नोटिस दिया। कांग्रेस के नेतृत्व में 119 सांसदों के हस्ताक्षर का दावा, TMC रही अलग।

लोकसभा अध्यक्ष Om Birla के खिलाफ विपक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस सौंपा है। कांग्रेस के नेतृत्व में 119 सांसदों के हस्ताक्षर का दावा किया गया। विपक्ष ने सदन संचालन में पक्षपात के आरोप लगाए, जबकि TMC ने फिलहाल दूरी बनाए रखी।

New Delhi: लोकसभा में सियासी टकराव एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दलों ने लोकसभा अध्यक्ष Om Birla के खिलाफ No-Confidence Motion यानी अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस पेश किया है। विपक्ष का आरोप है कि सदन की कार्यवाही के दौरान अध्यक्ष की भूमिका पक्षपातपूर्ण रही है और विपक्ष को अपनी बात रखने का पूरा मौका नहीं दिया गया। इस प्रस्ताव पर लगभग 119 सांसदों के हस्ताक्षर होने का दावा किया गया है, जिसे विपक्ष व्यापक समर्थन के तौर पर पेश कर रहा है।

यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब संसद के भीतर कार्यवाही को लेकर लगातार विवाद और हंगामा देखने को मिल रहा है। विपक्ष का कहना है कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की अनदेखी हो रही है और इसी कारण उन्हें यह कठोर फैसला लेना पड़ा है।

कैसे और कब सौंपा गया नोटिस

मंगलवार को कांग्रेस ने औपचारिक रूप से लोकसभा अध्यक्ष Om Birla के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस लोकसभा महासचिव को सौंप दिया। यह नोटिस विपक्ष के नेता के सुरेश और सांसद मोहम्मद जावेद द्वारा प्रस्तुत किया गया। कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने जानकारी देते हुए बताया कि दोपहर 1.14 बजे नियमों और प्रक्रियाओं के नियम 94C के तहत यह नोटिस दिया गया।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह कदम पूरी तरह से संवैधानिक प्रक्रिया के तहत उठाया गया है और इसमें किसी भी तरह की जल्दबाजी नहीं की गई। नोटिस सौंपने से पहले विपक्षी दलों के बीच चर्चा हुई और फिर इस फैसले को अंतिम रूप दिया गया।

119 सांसदों के हस्ताक्षर का दावा

कांग्रेस और विपक्षी खेमे का कहना है कि इस No-Confidence Motion पर करीब 119 सांसदों के हस्ताक्षर हैं। सूत्रों के अनुसार, 118 सांसदों के हस्ताक्षर की पुष्टि हो चुकी है, जबकि एक और समर्थन की बात कही जा रही है।

विपक्ष इसे अपनी एकजुटता का संकेत बता रहा है। उनका कहना है कि यह संख्या दिखाती है कि लोकसभा अध्यक्ष के कामकाज को लेकर चिंता केवल एक दल तक सीमित नहीं है, बल्कि कई विपक्षी दल इस मुद्दे पर एकमत हैं।

आरोप क्या हैं Om Birla पर

विपक्ष ने Om Birla पर सदन संचालन में कथित पक्षपात का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि विपक्षी सांसदों को बोलने का पर्याप्त समय नहीं दिया गया, जबकि सत्ता पक्ष को बार बार मौका मिलता रहा।

इसके अलावा विपक्ष का यह भी आरोप है कि सत्र के दौरान जब विपक्ष अपनी बात रखना चाहता है, तब कार्यवाही जल्दी स्थगित कर दी जाती है या माइक्रोफोन बंद कर दिए जाते हैं। विपक्ष के अनुसार, यह सब संसदीय लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है।

TMC का अलग रुख

इस पूरे घटनाक्रम में Trinamool Congress यानी TMC का रुख अलग नजर आया है। सूत्रों के मुताबिक, TMC ने Om Birla के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव से खुद को अलग कर लिया है और इस पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।

TMC सांसद Abhishek Banerjee ने साफ तौर पर कहा कि उनकी पार्टी ने कांग्रेस को एक अलग रास्ता सुझाया था। उन्होंने कहा कि पहले INDIA Bloc और कांग्रेस की मांगों को लेकर लोकसभा अध्यक्ष से औपचारिक अपील की जानी चाहिए थी।

क्या हैं TMC की शर्तें 

Abhishek Banerjee के अनुसार, TMC ने अध्यक्ष को विपक्ष की अपील पर जवाब देने के लिए तीन दिन का समय देने का सुझाव दिया था। उनका कहना है कि अगर कांग्रेस सीधे अविश्वास प्रस्ताव लाती है, तो TMC उस पर हस्ताक्षर नहीं करेगी।

हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर अध्यक्ष विपक्ष की अपील से सहमत नहीं होते हैं, तो TMC भविष्य में No-Confidence Motion पर हस्ताक्षर करने के लिए तैयार है। इससे साफ है कि TMC ने दरवाजा पूरी तरह बंद नहीं किया है, लेकिन फिलहाल उसने दूरी बनाए रखी है।

Rahul Gandhi ने हस्ताक्षर क्यों नहीं किए

इस मुद्दे पर एक और अहम बात सामने आई है। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, Rahul Gandhi ने लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। पार्टी का कहना है कि यह फैसला संसदीय मर्यादा और परंपराओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

सूत्रों का कहना है कि विपक्ष के नेता के लिए लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस पर हस्ताक्षर करना उचित नहीं माना जाता। यह निर्णय संस्थागत गरिमा और लोकतांत्रिक परंपराओं के सम्मान के तहत लिया गया है।

क्या है कांग्रेस का पक्ष

कांग्रेस का कहना है कि Rahul Gandhi के हस्ताक्षर न करने का मतलब यह नहीं है कि पार्टी इस प्रस्ताव को लेकर गंभीर नहीं है। पार्टी नेताओं के अनुसार, कांग्रेस पूरी मजबूती से इस मुद्दे को उठा रही है और अविश्वास प्रस्ताव विपक्ष की सामूहिक चिंता को दर्शाता है।

कांग्रेस का दावा है कि सदन के भीतर जिस तरह से कार्यवाही चल रही है, उससे लोकतांत्रिक मूल्यों को नुकसान पहुंच रहा है। इसी वजह से उन्होंने यह नोटिस देकर एक संवैधानिक रास्ता अपनाया है।

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