सोनम वांगचुक की हिरासत रद्द होने पर कांग्रेस का हमला, कहा- 'मोदी सरकार लद्दाख के लोगों से माफी मांगे'

सोनम वांगचुक की हिरासत रद्द होने के बाद कांग्रेस ने मोदी सरकार पर निशाना साधा। पार्टी ने लद्दाख के लोगों से माफी मांगने की मांग की। जानें पूरा राजनीतिक विवाद।

भारत की राजनीति में एक बार फिर विवाद गहरा गया है। जलवायु कार्यकर्ता और इंजीनियर सोनम वांगचुक की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत हिरासत रद्द किए जाने के बाद विपक्षी दल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने केंद्र की भारत सरकार पर तीखा हमला बोला है। 

नई दिल्ली: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने शनिवार को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की हिरासत रद्द करने के केंद्र सरकार के फैसले को मोदी सरकार का “यू-टर्न” करार दिया। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि सरकार को सिर्फ सोनम वांगचुक ही नहीं, बल्कि लद्दाख के लोगों से भी माफी मांगनी चाहिए।

उन्होंने यह भी मांग की कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के दौरान जिन लोगों को हिरासत में लिया गया था, उन्हें तुरंत रिहा किया जाए। जयराम रमेश के अनुसार लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वाले नागरिकों पर सख्त कानून लगाना उचित नहीं है और सरकार को इस मामले में संवेदनशील रवैया अपनाना चाहिए।

कांग्रेस का आरोप – सरकार का यू-टर्न

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि पार्टी ने पहले ही वांगचुक की गिरफ्तारी को गलत बताया था। अब सरकार ने उनकी हिरासत रद्द करके यह स्वीकार कर लिया है कि कार्रवाई उचित नहीं थी। उन्होंने लिखा कि “छह महीने पहले सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी पूरी तरह से गलत आधार पर की गई थी। 

अब सरकार ने यू-टर्न ले लिया है और सच्चाई सामने आ गई है। सरकार को वांगचुक और उनके परिवार के साथ-साथ लद्दाख के लोगों से भी माफी मांगनी चाहिए। कांग्रेस का कहना है कि शांतिपूर्ण विरोध करने वाले लोगों को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत हिरासत में लेना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

सोनम वांगचुक की हिरासत रद्द होने पर कांग्रेस का हमला, कहा- 'मोदी सरकार लद्दाख के लोगों से माफी मांगे'

क्या है पूरा मामला

केंद्र सरकार ने शनिवार को घोषणा की कि सोनम वांगचुक की हिरासत को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया है। उन्हें करीब छह महीने पहले लेह में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद हिरासत में लिया गया था। इन प्रदर्शनों के दौरान हिंसा की घटनाएं हुई थीं, जिनमें चार लोगों की मौत भी हुई थी। इसके बाद प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई करते हुए कई लोगों को हिरासत में लिया था, जिनमें वांगचुक भी शामिल थे। सरकार का कहना था कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया था, लेकिन विपक्ष लगातार इस कार्रवाई को गलत बताता रहा।

कांग्रेस की मांग – सभी प्रदर्शनकारियों को रिहा किया जाए

जयराम रमेश ने कहा कि केवल वांगचुक की हिरासत रद्द करना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने मांग की कि उन सभी लोगों को भी रिहा किया जाए जिन्हें शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन करने के कारण हिरासत में लिया गया था। कांग्रेस ने यह भी कहा कि लद्दाख के लोग लंबे समय से अपने अधिकारों और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर आवाज उठा रहे हैं, इसलिए उनकी बात सुनना जरूरी है।

लद्दाख में पिछले कुछ समय से स्थानीय लोग राज्य के दर्जे, पर्यावरण सुरक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। सोनम वांगचुक इन आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे और उन्होंने कई बार जलवायु परिवर्तन, हिमालयी पर्यावरण और स्थानीय अधिकारों के मुद्दे उठाए हैं। उनकी गिरफ्तारी के बाद देशभर में कई सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों ने चिंता जताई थी। अब हिरासत रद्द होने के बाद विपक्ष इसे अपनी बात सही साबित होने के रूप में देख रहा है।

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