ईद-उल-फित्र से पहले गोरखपुर के बाजारों में सेवईं की खरीदारी तेज हो गई है। नखास, गोलघर और जाफरा बाजार जैसे इलाकों में लोगों की भीड़ बढ़ रही है। बाजार में बनारसी किमामी, लच्छा और सूतफेनी जैसी कई किस्मों की सेवईं की मांग बढ़ी है, जिससे त्योहार का उत्साह साफ दिखाई दे रहा है।
Gorakhpur Sevai Market Eid Shopping: Gorakhpur में ईद-उल-फित्र से पहले सेवईं बाजारों में खरीदारी का उत्साह तेजी से बढ़ गया है। शहर के नखास, गोलघर, जाफरा बाजार और गीता प्रेस रोड जैसे प्रमुख बाजारों में लोग बड़ी संख्या में सेवईं और त्योहार से जुड़ा सामान खरीदने पहुंच रहे हैं। रमजान के अंतिम दिनों में परिवार ईद की तैयारियों में जुटे हैं, जिसके चलते बाजारों में अलग-अलग किस्म की सेवईं की मांग बढ़ गई है। दुकानदारों के अनुसार खास तौर पर बनारसी किमामी और लच्छेदार सेवईं की बिक्री सबसे ज्यादा हो रही है, जो ईद की पारंपरिक मिठाई बनाने के लिए पसंद की जाती हैं।
सेवईं बाजार में बढ़ी खरीदारी की रफ्तार
ईद के करीब आते ही शहर के प्रमुख बाजारों में खरीदारी का माहौल तेज हो गया है। नखास, रेती, गोलघर, गीता प्रेस रोड और गोरखनाथ जैसे इलाकों में लोग बड़ी संख्या में सेवईं और अन्य जरूरी सामान खरीदने के लिए पहुंच रहे हैं।
इन बाजारों में खासतौर पर मुस्लिम महिलाओं की अच्छी-खासी मौजूदगी देखी जा रही है, जो ईद की तैयारियों के लिए सेवईं, मसाले और अन्य खाद्य सामग्री खरीद रही हैं। कई जगहों पर अस्थायी बाजार भी लगाए गए हैं, जहां अलग-अलग दुकानों पर सेवईं की कई किस्में उपलब्ध हैं।
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सेवईं की कई किस्में बनीं आकर्षण का केंद्र
उर्दू बाजार के ताज सेवईं सेंटर के दुकानदारों का कहना है कि इस बार बाजार में सेवईं की कई खास वैरायटी मौजूद हैं। इनमें छड़ सेवईं, सादी सेवईं, किमामी, बनारसी, लाल लच्छा, सफेद लच्छा, सूतफेनी, रूमाली और दूध फेनी जैसी कई किस्में शामिल हैं।
दुकानदारों के मुताबिक ईद के मौके पर खास तौर पर बनारसी किमामी सेवईं की मांग सबसे ज्यादा है। इसकी बारीक बनावट और खास स्वाद के कारण लोग इसे ज्यादा पसंद कर रहे हैं और यह तेजी से बिक रही है।
रमजान में इबादत और सामाजिक मेलजोल भी बढ़ा
माह-ए-रमजान के दौरान शहर में धार्मिक माहौल भी देखने को मिल रहा है। रोजेदार रोजा, नमाज, जकात और सदका-ए-फित्र जैसे धार्मिक कर्तव्यों का पालन कर रहे हैं। मस्जिदों और घरों में कुरआन की तिलावत और इबादत का सिलसिला जारी है।
इसके साथ ही कई जगह सामूहिक इफ्तार कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। ऐसे आयोजनों में अलग-अलग समुदाय के लोग भी शामिल होकर भाईचारे और सामाजिक सौहार्द का संदेश दे रहे हैं, जिससे शहर में गंगा-जमुनी तहजीब की झलक देखने को मिल रही है।









