सपा नेता आजम खां को भड़काऊ भाषण केस में मिली बड़ी राहत: साक्ष्य न होने पर कोर्ट ने किया बरी

सपा नेता आजम खां को भड़काऊ भाषण केस में मिली बड़ी राहत: साक्ष्य न होने पर कोर्ट ने किया बरी

उत्तर प्रदेश के रामपुर से एक बड़ी राजनीतिक खबर सामने आई है। सपा (समाजवादी पार्टी) के वरिष्ठ नेता आजम खां को 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान दर्ज भड़काऊ भाषण मामले में कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सिविल लाइंस थाने में दर्ज इस मामले में कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में आजम खां को बरी कर दिया।

लखनऊ: सिविल लाइंस थाने में छह साल पहले दर्ज भड़काऊ भाषण के मामले में कोर्ट ने आजम खां के पक्ष में फैसला सुनाया है। मंगलवार को हुई सुनवाई में साक्ष्य के अभाव के कारण आजम खां को बरी कर दिया गया। यह मामला 2019 के लोकसभा चुनाव से जुड़ा था, जब तत्कालीन एसडीएम सदर पीपी तिवारी की ओर से सपा नेता आजम खां के खिलाफ भड़काऊ भाषण का मामला दर्ज कराया गया था। 

यह मामला कोर्ट में लंबित था और अभियोजन तथा बचाव पक्ष की अंतिम बहसें पूरी हो चुकी थीं। अदालत ने सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद आजम खां को निर्दोष पाया।

क्या है मामला?

यह मामला 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान दर्ज किया गया था। तत्कालीन एसडीएम सदर पीपी तिवारी की ओर से आजम खां के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि चुनावी रैलियों और जनसभाओं में आजम खां ने भड़काऊ और उकसावे भरे भाषण दिए, जो कानून और शांति व्यवस्था के लिए खतरा बन सकते थे।

इसके बाद रामपुर के सिविल लाइंस थाने में मामला दर्ज हुआ और कोर्ट में लंबित रहा। आरोप और बचाव पक्ष की बहस कई सालों तक चली। मंगलवार को इस मामले की अंतिम सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान सपा नेता आजम खां खुद कोर्ट पहुंचे और मामले की प्रगति देखी। कोर्ट ने साक्ष्य की कमी और पर्याप्त प्रमाण न होने के आधार पर एमपी एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट शोभित बंसल ने आजम खां को बरी कर दिया। 

कोर्ट के फैसले के बाद आजम खां ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि यह न्यायिक प्रणाली की जीत है और वह हमेशा कानून का सम्मान करते हैं। आजम खां की इस बरी होने की खबर के बाद सपा पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं में खुशी का माहौल देखा गया। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि यह फैसला आजम खां और समाजवादी पार्टी के लिए न्याय और सम्मान की पुष्टि करता है।

 

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