Stock Market: लगातार तीसरे दिन टूटा भारतीय शेयर बाजार, Sensex 374 अंक लुढ़का; Nifty 24 हजार से नीचे

Stock Market में लगातार तीसरे दिन गिरावट रही। Sensex 374 अंक टूटकर नीचे आया, जबकि Nifty भी 24 हजार के स्तर से नीचे फिसला। जानें गिरावट की वजह।

भारतीय शेयर बाजार में बुधवार, 2 सितंबर 2026 को लगातार तीसरे कारोबारी दिन गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स 373.93 अंक टूटकर 76,570.35 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी में भी 141.35 अंकों की गिरावट दर्ज की गई और यह 23,914.45 पर आ गया।

बिजनेस न्यूज़: भारतीय शेयर बाजार में बुधवार, 2 सितंबर 2026 को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में गिरावट जारी रही। कमजोर वैश्विक संकेतों और घरेलू बाजार में मुनाफावसूली के बीच प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स दबाव में रहे। कारोबार के अंत में Sensex 373.93 अंक टूटकर 76,570.35 पर बंद हुआ, जबकि Nifty 141.35 अंक की गिरावट के साथ 23,914.45 के स्तर पर आ गया।

बाजार में लगातार तीसरे दिन बिकवाली से निवेशकों की चिंता बढ़ी है। सेंसेक्स में करीब 0.48 फीसदी, जबकि निफ्टी में लगभग 0.59 फीसदी की कमजोरी दर्ज की गई। निफ्टी एक बार फिर 24,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे चला गया, जिससे बाजार की मौजूदा कमजोरी का संकेत मिला।

बड़े शेयरों में बिकवाली से बढ़ा दबाव

बुधवार के कारोबारी सत्र में कई प्रमुख कंपनियों के शेयरों में बिकवाली देखने को मिली। खासतौर पर Eicher Motors और Wipro के शेयरों पर दबाव रहा। दोनों कंपनियों के स्टॉक लगभग 3 फीसदी तक गिर गए, जिससे व्यापक बाजार की धारणा प्रभावित हुई। बड़े और सक्रिय शेयरों में बिकवाली का असर प्रमुख सूचकांकों पर भी दिखाई दिया। 

निवेशकों ने जोखिम वाले दांव से दूरी बनाते हुए कुछ हिस्सों में मुनाफा सुरक्षित करना बेहतर समझा। लगातार तीन सत्रों से बाजार के लाल निशान में रहने के कारण छोटी अवधि में निवेशकों के बीच सतर्कता बढ़ी है।

वैश्विक संकेतों का भी बाजार पर असर

Stock Market: लगातार तीसरे दिन टूटा भारतीय शेयर बाजार, Sensex 374 अंक लुढ़का; Nifty 24 हजार से नीचे

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, घरेलू शेयर बाजार की कमजोरी को केवल स्थानीय कारकों से नहीं जोड़ा जा सकता। अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिलने वाले संकेत भी भारतीय इक्विटी बाजार की दिशा को प्रभावित कर रहे हैं। वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़े आंकड़ों, ब्याज दरों को लेकर उम्मीदों और विदेशी बाजारों में निवेशकों के रुख पर भारतीय बाजार की नजर बनी हुई है। 

ऐसे माहौल में विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की चाल के लिए महत्वपूर्ण हो जाती हैं। अगर वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बनी रहती है, तो भारतीय शेयरों में उतार-चढ़ाव आगे भी देखने को मिल सकता है।

मुनाफावसूली ने बढ़ाई बिकवाली

घरेलू स्तर पर profit booking यानी मुनाफावसूली भी बुधवार की गिरावट की एक प्रमुख वजह मानी जा रही है। बाजार में हाल के कारोबारी रुझानों के बीच कुछ निवेशकों ने अपने मुनाफे को सुरक्षित करने के लिए शेयरों में बिकवाली की। विशेषज्ञों का कहना है कि जब प्रमुख इंडेक्स महत्वपूर्ण तकनीकी या मनोवैज्ञानिक स्तरों के आसपास दबाव में आते हैं, तो निवेशकों की सतर्कता बढ़ सकती है। इससे बिकवाली का दबाव और तेज हो सकता है।

निफ्टी का 24,000 के स्तर से नीचे बंद होना बाजार के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि आने वाले सत्रों में इंडेक्स इस स्तर के ऊपर दोबारा मजबूती हासिल कर पाता है या नहीं।

रुपया भी डॉलर के मुकाबले कमजोर

शेयर बाजार के साथ भारतीय मुद्रा पर भी दबाव दिखाई दिया। बुधवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया दो पैसे कमजोर होकर 94.97 के अस्थायी स्तर पर बंद हुआ। रुपये की चाल पर वैश्विक मुद्रा बाजार, डॉलर की मजबूती, विदेशी पूंजी प्रवाह और घरेलू आर्थिक परिस्थितियों का असर रहता है। इक्विटी बाजार में विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी रुपये के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती हैं।

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