भारत में चीनी की कीमतें एक महीने में 15% से अधिक बढ़ी हैं। सरकार ने इसके पीछे फसल को नुकसान, कम सप्लाई और जमाखोरी को प्रमुख कारण बताया है और 10 लाख टन शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है।
Business: चीनी की कीमतों में हालिया तेजी ने एथेनॉल उत्पादन को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। 20 अगस्त को देश में चीनी का औसत भाव ₹55.7 प्रति किलो पहुंच गया, जबकि दिल्ली में खुदरा कीमत ₹60 के पार रही। सरकार के मुताबिक, कीमतों में उछाल के पीछे गन्ने की फसल को नुकसान, सप्लाई की चिंता और जमाखोरी अहम वजहें हैं।
चीनी के बढ़ते दामों के पीछे क्या एथेनॉल है जिम्मेदार?

देश में चीनी की कीमतों में पिछले एक महीने में 15% से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। 20 अगस्त को औसत कीमत ₹55.7 प्रति किलो पहुंच गई, जबकि दिल्ली में खुदरा भाव ₹60 के पार चला गया। सरकार ने कीमतों में तेजी के पीछे गन्ने की फसल को नुकसान, कम बारिश, सप्लाई की चिंता और जमाखोरी को प्रमुख कारण बताया है। साथ ही, स्थिति संभालने के लिए 10 लाख टन शुल्क-मुक्त चीनी आयात की अनुमति दी गई है। एथेनॉल उत्पादन को कीमतों में तेजी की मुख्य वजह नहीं माना गया है।
सरकार ने 10 लाख टन शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी
कीमतों पर नियंत्रण और घरेलू उपलब्धता बढ़ाने के लिए सरकार ने एक दशक में पहली बार 10 लाख मीट्रिक टन चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। इसके अलावा, जमाखोरी पर रोक लगाने के लिए थोक खरीदारों और डीलरों के स्टॉक की सीमा तय की गई है।
चीनी मिलों में उपलब्ध स्टॉक की फिजिकल वेरिफिकेशन के निर्देश भी दिए गए हैं। इन कदमों का उद्देश्य बाजार में पर्याप्त सप्लाई बनाए रखना और कीमतों में अनावश्यक तेजी को रोकना है।
फसल को नुकसान और कम बारिश बनी बड़ी वजह
चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे गन्ने की उपलब्धता को लेकर चिंता भी अहम मानी जा रही है। सरकार के अनुसार, मौजूदा सीजन में चीनी उत्पादन करीब 306 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है, जबकि गन्ना उत्पादक राज्यों का शुरुआती अनुमान करीब 343 लाख मीट्रिक टन था।
उत्पादन में कमी के पीछे गन्ने में रेड रॉट और टॉप बोरर जैसी बीमारियों के साथ-साथ ज्यादा बारिश से खेतों में पानी भरने को कारण बताया गया है। वहीं, उत्तर प्रदेश के कम से कम 35 जिलों में बारिश की कमी दर्ज की गई है।
महाराष्ट्र के सोलापुर, लातूर, नंदुरबार, बीड, परभणी और अहमदनगर जैसे प्रमुख गन्ना उत्पादक जिलों में भी 21 अगस्त तक बारिश की कमी रही। कर्नाटक में इस साल सामान्य से 22% कम बारिश दर्ज की गई है।
एथेनॉल उत्पादन को लेकर सरकार ने क्या कहा?
चीनी की कीमतों में तेजी के बीच सोशल मीडिया पर एथेनॉल उत्पादन को भी एक प्रमुख वजह बताया जा रहा है। तर्क यह है कि पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिश्रण के लक्ष्य के कारण चीनी उत्पादन का एक हिस्सा एथेनॉल की ओर जा रहा है।
हालांकि, सरकार के अनुसार एथेनॉल के लिए चीनी का इस्तेमाल कीमतों में मौजूदा तेजी का प्रमुख कारण नहीं है। 21 अगस्त को सरकार ने बताया कि 2025-26 में देश में उत्पादित कुल चीनी का करीब 9% हिस्सा एथेनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल हुआ है।
सरकार ने यह भी कहा कि देश में बनने वाले एथेनॉल का करीब तीन-चौथाई हिस्सा अब अनाज, खासकर मक्के से आता है। इसलिए मौजूदा कीमतों में तेजी को केवल एथेनॉल उत्पादन से जोड़ना सही नहीं होगा।
सरकार का कहना है कि उत्पादन अनुमान में कमी के बावजूद अक्टूबर में नए पेराई सीजन की शुरुआत तक घरेलू मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त चीनी स्टॉक उपलब्ध है। हालांकि, सरकार ने उपलब्ध स्टॉक की सटीक मात्रा सार्वजनिक नहीं की है।











