चीनी उत्पादन में ब्राजील सबसे आगे, भारत दूसरे नंबर पर, पाकिस्तान से चार गुना से ज्यादा उत्पादन

वैश्विक चीनी उत्पादन में ब्राजील 23.5% हिस्सेदारी के साथ पहले और भारत 16.1% के साथ दूसरे स्थान पर है। भारत का उत्पादन पाकिस्तान से 4 गुना अधिक है।

भारत में अगस्त के दौरान चीनी के दाम 20 फीसदी तक बढ़े हैं। 2024-25 में घरेलू खपत 281 लाख मीट्रिक टन रही, जो उत्पादन से अधिक थी। वैश्विक उत्पादन में ब्राजील पहले और भारत दूसरे स्थान पर है।

Business: भारत में अगस्त के दौरान चीनी की कीमतों में 20 फीसदी तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि चीनी उद्योग देश में पर्याप्त उपलब्धता का दावा कर रहा है। 2024-25 में घरेलू खपत उत्पादन से अधिक रही। वैश्विक स्तर पर ब्राजील 23.5 फीसदी उत्पादन हिस्सेदारी के साथ सबसे आगे है, जबकि भारत 16.1 फीसदी हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर है।

चीनी उत्पादन से ज्यादा रही घरेलू खपत

भारत में चीनी की कीमतों में अगस्त के दौरान तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है। कीमतों में करीब 20 फीसदी तक वृद्धि के बावजूद चीनी उद्योग का कहना है कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 2024-25 में भारत में चीनी का उत्पादन 261 लाख मीट्रिक टन रहा, जबकि घरेलू खपत 281 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गई।

इस तरह इस अवधि में देश में चीनी की खपत उत्पादन से अधिक रही। इससे पहले 2018-19 से 2023-24 तक लगातार घरेलू उत्पादन खपत से अधिक रहा था। 2024-25 में उत्पादन में कमी और खपत में बढ़ोतरी के कारण पहली बार इस अवधि में खपत का आंकड़ा उत्पादन से ऊपर चला गया।

वैश्विक चीनी उत्पादन में भारत दूसरे नंबर पर

वैश्विक चीनी उत्पादन की हिस्सेदारी के मामले में ब्राजील सबसे आगे है। कुल उत्पादन में ब्राजील की हिस्सेदारी 23.5 फीसदी है। इसके बाद भारत 16.1 फीसदी हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर है। यूरोपियन यूनियन 8.3 फीसदी के साथ तीसरे, चीन 6.8 फीसदी के साथ चौथे और थाईलैंड 6.1 फीसदी हिस्सेदारी के साथ पांचवें स्थान पर है।

अमेरिका की वैश्विक चीनी उत्पादन में हिस्सेदारी 4.5 फीसदी है, जबकि पाकिस्तान और रूस दोनों की हिस्सेदारी 3.8 फीसदी है। मेक्सिको 3 फीसदी और ऑस्ट्रेलिया 2.1 फीसदी हिस्सेदारी के साथ सूची में शामिल हैं। आंकड़ों के अनुसार भारत का उत्पादन पाकिस्तान से चार गुना से अधिक है।

एथेनॉल उत्पादन में बढ़ा चीनी का इस्तेमाल

पिछले कुछ वर्षों में चीनी मिलों ने एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने और चीनी के इस्तेमाल पर भी जोर बढ़ाया है। सरकार की नीति के तहत एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके चलते चीनी उत्पादन से जुड़े संसाधनों का एक हिस्सा एथेनॉल बनाने में इस्तेमाल हो रहा है।

आंकड़ों के अनुसार, 2024-25 के शुगर सीजन में एथेनॉल उत्पादन के लिए 35 लाख मीट्रिक टन चीनी का इस्तेमाल किया गया। 2023-24 में यह आंकड़ा 24 लाख मीट्रिक टन था, जबकि 2022-23 में एथेनॉल उत्पादन के लिए 43 लाख मीट्रिक टन चीनी का इस्तेमाल हुआ था।

कीमतों में तेजी के बावजूद कमी से उद्योग का इनकार

चीनी की घरेलू खपत, उत्पादन और एथेनॉल के लिए इस्तेमाल के बीच संतुलन बाजार की स्थिति को प्रभावित करता है। 2024-25 में खपत उत्पादन से अधिक रहने और अगस्त में कीमतों में 20 फीसदी तक तेजी आने के बावजूद चीनी उद्योग का कहना है कि देश में चीनी की कमी नहीं है।

भारत दुनिया के प्रमुख चीनी उत्पादक देशों में शामिल है और वैश्विक उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी ब्राजील के बाद सबसे अधिक है। आने वाले समय में घरेलू मांग, उत्पादन स्तर और एथेनॉल के लिए चीनी के इस्तेमाल का संतुलन बाजार में कीमतों और उपलब्धता के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।

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