सुप्रीम कोर्ट की सख्ती: अदालत कक्ष में अनुशासन को लेकर बार एसोसिएशन और केंद्र से मांगे संयुक्त सुझाव

सुप्रीम कोर्ट की सख्ती: अदालत कक्ष में अनुशासन को लेकर बार एसोसिएशन और केंद्र से मांगे संयुक्त सुझाव

सुप्रीम कोर्ट ने अदालत कक्ष में अनुशासन और गरिमा बनाए रखने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) और केंद्र सरकार से संयुक्त रूप से सुझाव मांगे हैं। 

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने अदालत कक्ष की गरिमा और अनुशासन बनाए रखने को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) और केंद्र सरकार से संयुक्त रूप से ठोस सुझाव मांगे हैं। यह निर्देश उस अवमानना मामले की सुनवाई के दौरान दिया गया, जिसमें एक अधिवक्ता पर सुनवाई के दौरान तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश की ओर जूता फेंकने का प्रयास करने का आरोप है।

यह मामला 6 अक्टूबर की उस घटना से जुड़ा है, जिसने न्यायिक प्रणाली की मर्यादा और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए थे। घटना के बाद अदालत में अनुशासन, वकीलों के आचरण और ऐसी घटनाओं के सार्वजनिक प्रसार को लेकर व्यापक बहस शुरू हुई थी।

ऐसी घटनाएं दोबारा न हों – सुप्रीम कोर्ट

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अदालत कक्ष में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। पीठ ने कहा कि न्यायपालिका की गरिमा बनाए रखने के लिए केवल दंडात्मक नहीं, बल्कि निवारक और व्यावहारिक उपायों की आवश्यकता है।

अदालत ने निर्देश दिया कि सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन और केंद्र सरकार मिलकर ऐसे उपाय सुझाएं, जो भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोक सकें। साथ ही, अदालत ने यह भी कहा कि ऐसी घटनाओं की रिपोर्टिंग और उनके सार्वजनिक प्रसार के लिए भी एक स्पष्ट और संतुलित प्रोटोकॉल तैयार किया जाना चाहिए।

मीडिया और सोशल मीडिया की भूमिका पर भी सवाल

बार एसोसिएशन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने अदालत में कहा कि इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को औपचारिक पक्षकार बनाया जाएगा। उन्होंने सुझाव दिया कि जो भी सिफारिशें सामने आएं, उन्हें आईटी नियमों या सुप्रीम कोर्ट के नियमों में शामिल किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि मीडिया संस्थानों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी है कि वे अदालत की गरिमा से जुड़ी संवेदनशील घटनाओं की सामग्री का अनियंत्रित और सनसनीखेज प्रसार न करें। ऐसे प्रसार से न केवल न्यायपालिका की छवि प्रभावित होती है, बल्कि भविष्य में अनुशासनहीनता को भी बढ़ावा मिल सकता है।

केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि वह वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह के साथ विचार-विमर्श कर संयुक्त सुझाव अदालत के समक्ष प्रस्तुत करेंगे।

आरजी कर मेडिकल कॉलेज मामला हाईकोर्ट स्थानांतरित

इसी दिन सुप्रीम कोर्ट ने एक अन्य महत्वपूर्ण मामले में भी आदेश पारित किया। कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में महिला डॉक्टर के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले में शुरू की गई स्वतः संज्ञान कार्यवाही को सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट को स्थानांतरित कर दिया। न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने निर्देश दिया कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित आदेशों के अनुपालन और क्रियान्वयन की निगरानी अब कलकत्ता हाईकोर्ट करेगा। अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश इस मामले को एक उपयुक्त खंडपीठ के समक्ष सूचीबद्ध करें।

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