नेशनल हेराल्ड मामले पर डीके शिवकुमार ने केंद्र सरकार पर राजनीतिक दबाव बनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि जब केस खारिज होने की ओर है तो कांग्रेस नेताओं के खिलाफ दर्ज एफआईआर को तुरंत वापस लिया जाना चाहिए।
New Delhi: कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डीके शिवकुमार ने नेशनल हेराल्ड मामले को लेकर केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने कांग्रेस के खिलाफ दर्ज एफआईआर को वापस लेने की अपील करते हुए कहा कि यह मामला पहले ही खारिज किए जाने की दिशा में है। शिवकुमार का कहना है कि जब मामला टिक ही नहीं रहा, तो फिर एफआईआर बनाए रखने का कोई औचित्य नहीं है। उनके इस बयान के बाद नेशनल हेराल्ड केस एक बार फिर सियासी बहस के केंद्र में आ गया है।
एफआईआर वापस लेने की खुली मांग
पत्रकारों से बातचीत करते हुए डीके शिवकुमार ने साफ शब्दों में कहा कि नेशनल हेराल्ड केस अब अपने अंतिम चरण में है और इसे खारिज किया जा रहा है। इसके बावजूद कांग्रेस नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज होना सिर्फ राजनीतिक दबाव बनाने का तरीका है। उन्होंने कहा कि बेहतर होगा कि केंद्र सरकार और जांच एजेंसियां यह एफआईआर वापस ले लें।
शिवकुमार ने कहा कि दिल्ली पुलिस में जो एफआईआर दर्ज कराई गई है, उससे न तो सच्चाई बदलने वाली है और न ही कांग्रेस डरने वाली है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की कार्रवाइयों का मकसद सिर्फ विपक्ष को परेशान करना और राजनीतिक लाभ लेना है।
ध्यान भटकाने की राजनीति का आरोप
डीके शिवकुमार ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि नेशनल हेराल्ड मुद्दे से जनता का ध्यान हटाने के लिए जानबूझकर फंड जारी करने में देरी की जा रही है। उनका कहना है कि केंद्र को पता था कि कांग्रेस इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाने वाली है, इसलिए दूसरी योजनाओं को बीच में लाकर ध्यान भटकाने की कोशिश की गई।
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और सोनिया गांधी को परेशान करने की मंशा से ही यह पूरा मामला खींचा जा रहा है। शिवकुमार के मुताबिक, जैसे ही कांग्रेस ने नेशनल हेराल्ड मुद्दे को उठाना शुरू किया, वैसे ही गृह लक्ष्मी योजना और अन्य विषयों को सामने लाकर असली मुद्दे को दबाने की कोशिश की गई।

केंद्र से फंड न मिलने पर सवाल
शिवकुमार ने सिर्फ नेशनल हेराल्ड तक ही बात सीमित नहीं रखी, बल्कि केंद्र सरकार द्वारा कर्नाटक को फंड न दिए जाने का मुद्दा भी जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने सवाल किया कि ऊपरी भद्रा परियोजना के लिए पैसा अब तक क्यों नहीं दिया गया। इसके साथ ही उन्होंने पूछा कि एमएनआरईजीए, जल जीवन मिशन और अन्य केंद्रीय योजनाओं की राशि कर्नाटक को क्यों नहीं मिल रही है।
उनका कहना था कि राज्य सरकार को अपने वित्तीय प्रबंधन के लिए भी केंद्र से अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा है। शिवकुमार ने आरोप लगाया कि यह सब राजनीतिक बदले की भावना से किया जा रहा है ताकि कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर दबाव बनाया जा सके।
कर्नाटक सरकार के कामकाज का बचाव
डीके शिवकुमार ने अपनी सरकार के प्रदर्शन का बचाव करते हुए कहा कि पिछले 24 महीनों में कर्नाटक सरकार ने जो वादे किए थे, उन्हें जमीन पर उतारने का काम किया गया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने कल्याणकारी योजनाओं को पूरी ईमानदारी और कुशलता के साथ लागू किया है।
उन्होंने अन्य राज्यों से तुलना करते हुए कहा कि महाराष्ट्र और कई अन्य राज्यों में क्या हाल है, यह सबके सामने है। वहां सरकारें अपने वादे पूरे करने में नाकाम रही हैं, जबकि कर्नाटक में कांग्रेस सरकार ने तय समय के भीतर योजनाओं को लागू किया है। शिवकुमार के अनुसार, यह बात केंद्र सरकार को रास नहीं आ रही है, इसलिए वह तरह-तरह के हथकंडे अपना रही है।
भाजपा की पलटवार
डीके शिवकुमार के बयान पर भाजपा की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि नेशनल हेराल्ड मामले में गांधी परिवार को अभी तक किसी भी अदालत से क्लीन चिट नहीं मिली है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाकर देश में अशांति फैलाने की कोशिश कर रही है। विजयेंद्र का कहना था कि जब भी जांच एजेंसियां अपना काम करती हैं, कांग्रेस उसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताने लगती है।
नेशनल हेराल्ड केस क्यों है विवादों में
नेशनल हेराल्ड मामला लंबे समय से भारतीय राजनीति में विवाद का विषय रहा है। इस केस में कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के नाम सामने आने के बाद से ही भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने हैं। कांग्रेस का आरोप है कि यह पूरा मामला राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा है, जबकि भाजपा का कहना है कि कानून अपना काम कर रहा है और किसी को भी कानून से ऊपर नहीं रखा जा सकता।











