एक्ट्रेस श्रेया पिलगांवकर इन दिनों अपनी हालिया रिलीज फिल्म ‘मिर्जापुर’ को लेकर चर्चा में हैं। इसी बीच उन्होंने संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘पद्मावत’ में दिखाए गए जौहर के सीन पर स्वरा भास्कर के कमेंट को लेकर चल रही बहस पर अपनी राय रखी है।
एंटरटेनमेंट न्यूज़: अभिनेत्री श्रेया पिलगांवकर ने संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘पद्मावत’ में दिखाए गए जौहर के दृश्य को लेकर अभिनेत्री स्वरा भास्कर की पुरानी टिप्पणी पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। श्रेया का कहना है कि इतिहास और संस्कृति से जुड़े किसी दौर को आज के नजरिए से परखना आसान नहीं है। उनके मुताबिक, समाज की सोच समय, परिस्थितियों और लोगों के अनुभवों के साथ बदलती रहती है।
श्रेया पिलगांवकर इन दिनों अपनी हालिया रिलीज फिल्म ‘मिर्जापुर’ को लेकर चर्चा में हैं। इसी दौरान एक बातचीत में उन्होंने ‘पद्मावत’ और स्वरा भास्कर के बयान से जुड़े विवाद पर अपनी राय साझा की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अतीत में जीने वाले लोगों के फैसलों और परिस्थितियों को समझने के लिए उस समय के सामाजिक माहौल को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
श्रेया पिलगांवकर ने क्या कहा?
फिल्मीज्ञान के साथ बातचीत में श्रेया ने कहा कि आज की पीढ़ी जब कई दशक या सदियों पुराने घटनाक्रमों पर चर्चा करती है, तो उसे उस समय की परिस्थितियों को समझने की कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आज के दौर की सोच को आधार बनाकर अतीत के लोगों का मूल्यांकन करना उचित नहीं है।
अभिनेत्री के मुताबिक, 2026 में बैठकर 100 या 200 साल पहले के लोगों की मानसिकता को पूरी तरह समझ पाना आसान नहीं है। उस समय उनके सामने क्या परिस्थितियां थीं, वे किस सामाजिक दबाव में थे और उनके फैसलों के पीछे क्या वजहें थीं, इन सभी पहलुओं को देखना जरूरी है। श्रेया ने यह भी कहा कि संस्कृति कोई स्थिर चीज नहीं है।
समय के साथ समाज की प्राथमिकताएं, परिस्थितियां और जीवन के अनुभव बदलते हैं और उसी के साथ संस्कृति तथा सामाजिक सोच में भी बदलाव आता है। इसलिए किसी दूसरे दौर के बारे में एक ही तरह की राय बनाना सही नहीं होगा।
स्वरा भास्कर ने विवाद के बाद दी सफाई
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स्वरा भास्कर की ‘पद्मावत’ को लेकर की गई टिप्पणी सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद उन्हें आलोचना का सामना करना पड़ा था। इसके बाद अभिनेत्री ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो जारी कर अपने बयान का संदर्भ स्पष्ट किया। स्वरा ने कहा कि वायरल हो रहा वीडियो एक कार्यक्रम का हिस्सा था, जहां उनसे पूछा गया था कि ‘पद्मावत’ देखने के बाद उन्होंने संजय लीला भंसाली को खुला पत्र क्यों लिखा था। स्वरा के अनुसार, फिल्म के क्लाइमैक्स को लेकर उनकी अपनी एक चिंता थी, लेकिन उनके बयान को बाद में इस तरह पेश किया गया कि उन्होंने रानी पद्मावती और जौहर करने वाली अन्य महिलाओं को कायर बताया।
अभिनेत्री ने स्पष्ट किया कि उन्होंने ऐसा नहीं कहा था। उन्होंने अपने बयान का संदर्भ देते हुए सवाल उठाया कि अगर कोई महिला यौन हिंसा की शिकार होने के बाद जीवित रहती है, तो क्या इसका अर्थ यह है कि उसने साहस नहीं दिखाया? स्वरा का कहना था कि उनका सवाल इस बात को लेकर था कि ऐसी फिल्मों का संदेश रेप सर्वाइवर्स तक किस रूप में पहुंच सकता है।
‘पद्मावत’ के जौहर सीन पर क्यों हुई थी बहस?
‘पद्मावत’ के क्लाइमैक्स में जौहर का दृश्य फिल्म की सबसे चर्चित घटनाओं में शामिल रहा है। इसी दृश्य को लेकर स्वरा भास्कर ने पहले सवाल उठाया था कि क्या यौन हिंसा के बाद किसी महिला के जीवन को समाप्त मान लेना सही संदेश है। स्वरा ने कहा था कि अगर कोई रेप सर्वाइवर जीवित रहती है, तो समाज को उसके जीने के अधिकार और आगे बढ़ने की क्षमता को स्वीकार करना चाहिए। उनके अनुसार, जौहर के चित्रण ने उन्हें इसलिए परेशान किया क्योंकि इससे यह सवाल पैदा होता है कि क्या एक महिला की ‘इज्जत’ उसके जीवन से बड़ी मानी जानी चाहिए।
अब श्रेया पिलगांवकर की टिप्पणी ने इस पुराने विवाद को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। हालांकि, श्रेया ने किसी पक्ष को सही या गलत ठहराने के बजाय इतिहास, संस्कृति और बदलती सामाजिक सोच को अलग-अलग समय के संदर्भ में समझने की जरूरत पर जोर दिया है।










