Tata Trusts Controversy: फिर चर्चा में आया 37 साल पुराना शेयर ट्रांसफर मामला, वाइस चेयरमैन ने भी कर दी जांच की मांग

Tata Trusts में 37 साल पुराना Tata Sons शेयर ट्रांसफर मामला फिर सुर्खियों में है। वाइस चेयरमैन ने स्वतंत्र जांच की मांग की है, जिससे विवाद और गहराया है।

भारत के सबसे बड़े औद्योगिक घराने Tata Group और उससे जुड़े ट्रस्ट्स एक पुराने कानूनी विवाद को लेकर फिर सुर्खियों में हैं। 37 साल पुराने एक शेयर ट्रांसफर मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है, जब Tata Trusts के वाइस चेयरमैन विजय सिंह ने भी इस मामले की स्वतंत्र जांच की मांग कर दी है।

बिजनेस न्यूज़: देश के प्रमुख औद्योगिक समूह Tata Group से जुड़ा 37 साल पुराना एक पुराना मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। यह विवाद वर्ष 1989 में शेयरों के ट्रांसफर से संबंधित बताया जा रहा है, जिसमें आरोप है कि Tata Sons के 833 शेयरों के हस्तांतरण में अनियमितताएं हुई थीं। जानकारी के अनुसार, यह मामला Maharashtra Charity Commissioner के समक्ष शिकायत के रूप में कुछ दिन पहले उठाया गया, जिसमें नवाजबाई रतन टाटा ट्रस्ट से जुड़े ट्रांसफर पर सवाल खड़े किए गए हैं। आरोपों में कहा गया है कि उस समय किए गए शेयर ट्रांसफर में प्रक्रियागत गड़बड़ी हो सकती है, जिसकी विस्तृत जांच की मांग की गई है।

1989 के शेयर ट्रांसफर पर सवाल

मामला नवाजबाई रतन टाटा ट्रस्ट से जुड़े 833 शेयरों के ट्रांसफर से संबंधित है, जो कथित तौर पर टाटा संस लिमिटेड से जुड़े थे। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि यह ट्रांसफर सार्वजनिक ट्रस्ट से जुड़े नियमों के अनुरूप नहीं था। शिकायतकर्ता का दावा है कि यह लेन-देन 18 जनवरी 1989 को हुआ था, जो नवल एच. टाटा के ट्रस्टी पद से इस्तीफे के लगभग एक सप्ताह बाद का समय था। इसी समय को लेकर ट्रांजैक्शन की वैधता और पारदर्शिता पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

ईटी की रिपोर्ट के अनुसार, टाटा ट्रस्ट्स के वाइस चेयरमैन विजय सिंह ने 10 जून को महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर को पत्र लिखकर इस पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है। उन्होंने अपने पत्र में कहा कि इस तरह की जांच से ट्रस्ट की पारदर्शिता और सार्वजनिक विश्वास को मजबूत करने में मदद मिलेगी। विजय सिंह ने लिखा कि, “सर रतन टाटा ट्रस्ट और नवाजबाई रतन टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टी के रूप में यह आवश्यक है कि शेयर ट्रांसफर की कानूनी वैधता और उसके औचित्य की स्वतंत्र जांच हो, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।”

हितों के टकराव पर भी सवाल

इस विवाद में हितों के टकराव (Conflict of Interest) का मुद्दा भी सामने आया है। आरोपों में कहा गया है कि इस ट्रांजैक्शन का लाभ नवल टाटा के परिवार के सदस्यों को मिला, जिनमें से कुछ वर्तमान में भी टाटा ट्रस्ट से जुड़े हुए हैं। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा, नवल टाटा के पुत्र हैं। हालांकि, अभी तक इस मामले पर उनकी ओर से कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

यह शिकायत 4 जून को महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के कार्यालय में दर्ज की गई थी। इसे अधिवक्ता कात्यायनी अग्रवाल के माध्यम से सुरेश तुलसीराम पाटिलखेड़े द्वारा दाखिल किया गया है। शिकायत में कहा गया है कि यह ट्रांसफर सार्वजनिक ट्रस्ट नियमों का उल्लंघन कर सकता है और इसकी विस्तृत जांच आवश्यक है।

टाटा ट्रस्ट्स ने आरोपों को बताया निराधार

टाटा ट्रस्ट्स ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। संगठन का कहना है कि यह एक “सुनियोजित और दुर्भावनापूर्ण अभियान” का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य एक ऐसे संस्थान की छवि खराब करना है जो 130 वर्षों से अधिक समय से देश में परोपकारी कार्यों से जुड़ा है। टाटा ट्रस्ट्स ने यह भी कहा है कि उनकी सभी प्रक्रियाएं कानूनी और नियामक ढांचे के भीतर पारदर्शी तरीके से संचालित होती हैं।

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब Tata Group वैश्विक स्तर पर अपनी कॉर्पोरेट गवर्नेंस और सामाजिक कार्यों के लिए जाना जाता है। टाटा ट्रस्ट्स समूह की कई प्रमुख कंपनियों में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रखते हैं और भारत में परोपकारी गतिविधियों का बड़ा हिस्सा संचालित करते हैं।

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