GPS जैमिंग एक ऐसी तकनीक है जिसमें जानबूझकर सिग्नल को बाधित किया जाता है, जिससे शिप और एयरक्राफ्ट सही लोकेशन नहीं पढ़ पाते। स्पूफिंग के विपरीत, इसमें डिवाइस को गुमराह करने के बजाय सिग्नल कमजोर या ब्लॉक होता है। हालिया ईरान युद्ध और भारत में कई मामले यह दिखाते हैं कि GPS सिग्नल सुरक्षा और नेविगेशन के लिए संवेदनशील हो गया है।
GPS Jamming Explained: हालिया ईरान युद्ध और भारत में दर्ज GPS जैमिंग घटनाओं ने नेविगेशन और सुरक्षा प्रणालियों में गंभीर चुनौतियां पैदा की हैं। इस तकनीक में शिप और एयरक्राफ्ट के सिग्नल को बाधित किया जाता है, जिससे सही लोकेशन नहीं मिल पाती। अमेरिका, ईरान और इजरायल के संघर्ष में इसे इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर का हिस्सा माना गया, जबकि भारत में दिल्ली और अमृतसर एयरस्पेस में 465 मामले दर्ज हुए। विशेषज्ञ कहते हैं कि जैमिंग और स्पूफिंग से सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क रहना आवश्यक है।
GPS Jamming क्या है?
GPS जैमिंग तब होती है जब जानबूझकर GPS सिग्नल को बाधित किया जाता है, जिससे शिप और एयरक्राफ्ट सही लोकेशन नहीं पढ़ पाते। यह सिस्टम को कंफ्यूज कर देता है और नेविगेशन, ट्रैकिंग तथा टाइमिंग में गड़बड़ी पैदा करता है। इस तकनीक का इस्तेमाल मिलिट्री और सिविल ऑपरेशंस में सुरक्षा के लिए या इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर के दौरान किया जाता है।
जैमिंग के दौरान रिसीवर सिग्नल को सही तरह से पकड़ नहीं पाता, जिससे जहाज या विमान के मूवमेंट पर नियंत्रण खो जाता है। उदाहरण के लिए हालिया ईरान युद्ध में समुद्री जहाज और हवाई जहाज लगातार गोल-गोल चक्कर लगाते हुए देखे गए, जिससे नेविगेशन मुश्किल हो गया।

GPS स्पूफिंग और जैमिंग में अंतर
GPS स्पूफिंग में असली सिग्नल की नकल कर गलत लोकेशन दिखाई जाती है। जैमिंग में सिग्नल कमजोर या ब्लॉक होता है, जबकि स्पूफिंग में डिवाइस को गुमराह किया जाता है। स्पूफिंग अधिक खतरनाक मानी जाती है क्योंकि यह शिप और एयरक्राफ्ट को गलत निर्णय लेने पर मजबूर कर सकती है।
इस तकनीक से शिप या एयरक्राफ्ट को भटकाया जा सकता है, जिससे टकराव, फेक इमरजेंसी अलर्ट या सुरक्षित मार्ग से भटकने का खतरा बढ़ जाता है। रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान-इजरायल संघर्ष में GPS स्पूफिंग और जैमिंग का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल देखा गया है।
दुनिया और भारत में घटनाएं
मैरीटाइम कंपनी विंडवार्ड की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान युद्ध के बाद से GPS जैमिंग की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। सऊदी अरब, कुवैत, यूएई, कतर, ओमान और ईरान में 30 से अधिक जैमिंग क्लस्टर पाए गए। भारत में भी GPS स्पूफिंग और जैमिंग की घटनाएं सामने आई हैं। 2023-2025 के बीच दिल्ली, अमृतसर और जम्मू एयरस्पेस में 465 मामले दर्ज हुए।
इन घटनाओं से पता चलता है कि GPS सिग्नल इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और सुरक्षा के लिए अत्यंत संवेदनशील हो गया है। एयरलाइन, नेवी और सुरक्षा एजेंसियों को लगातार सतर्क रहना जरूरी है।








