अगर आप इस वीकेंड ऐसी फिल्म देखने की तलाश में हैं, जो आपको अपनी जड़ों से जोड़ने के साथ-साथ इमोशन और थ्रिल का भी भरपूर एहसास कराए, तो सिद्धार्थ मल्होत्रा की ‘द वन’ एक विकल्प हो सकती है।
- मूवी रिव्यू: द वन
- Director: दीपक कुमार मिश्रा
- Starring: सिद्धार्थ मल्होत्रा, तमन्ना भाटिया, श्वेता तिवारी, सुनील ग्रोवर, मनीष पॉल
- Platform: थिएटर
- Rating: 3.5/5
The Vvaan: सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया स्टारर 'द वन' (The Vvaan) सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है। फिल्म की कहानी बिहार के ग्रामीण परिवेश, लोक आस्था, वन देवी से जुड़े रहस्य और छठ पूजा की भावनाओं को एक साथ लेकर चलती है। अगर आप इस weekend कोई ऐसी फिल्म देखने का मन बना रहे हैं जिसमें emotion, mystery और cultural connect तीनों मिलें, तो यह फिल्म आपके लिए एक अलग अनुभव लेकर आती है।
हिंदी सिनेमा में लंबे समय से स्थानीय लोककथाओं और क्षेत्रीय संस्कृति को बड़े पर्दे पर उस तरह explore नहीं किया गया, जैसा South Cinema की कुछ चर्चित फिल्मों में देखने को मिला है। 'कांतारा' और 'तुम्बाड' जैसी फिल्मों ने folklore और स्थानीय परंपराओं को कहानी का अहम हिस्सा बनाकर दर्शकों से मजबूत connection बनाया। 'द वन' भी इसी दिशा में आगे बढ़ती नजर आती है, हालांकि इसका अपना अलग narrative और emotional core है।
The Vvaan की कहानी क्या है?
फिल्म की कहानी देवांचल नाम के एक गांव के इर्द-गिर्द बुनी गई है। गांव के पास घने जंगल में वन देवी का एक प्राचीन मंदिर है। स्थानीय लोगों की मान्यता है कि रात के समय इस जंगल में जाना सख्त मना है, क्योंकि उस वक्त देवी का पहरा रहता है। लेकिन फिल्म का protagonist ऋषि (सिद्धार्थ मल्होत्रा) इन मान्यताओं को अंधविश्वास मानता है। मुंबई में रहने वाला ऋषि एक modern और practical इंजीनियर है। गांव और वहां की परंपराओं से उसका जुड़ाव काफी कम है। यहां तक कि छठ पूजा के दौरान गांव लौटने के बजाय वह छुट्टियां मनाने को ज्यादा महत्व देता है।
ऋषि और उसकी पत्नी ममता (तमन्ना भाटिया) की जिंदगी में एक बड़ा emotional struggle भी है। शादी के कई साल बाद भी उनके बच्चे नहीं हुए हैं और IVF treatment के लिए जरूरी आर्थिक संसाधन जुटाना उनके लिए आसान नहीं है। परिवार और परिस्थितियों के दबाव में दोनों छठ के मौके पर देवांचल लौटते हैं।
गांव पहुंचने के बाद भी ऋषि का rational नजरिया नहीं बदलता। वह वन देवी से जुड़े नियमों को चुनौती देते हुए रात में प्रतिबंधित जंगल में प्रवेश कर जाता है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल तब खड़ा होता है जब वहां जाने के बावजूद उसके साथ कुछ असामान्य नहीं होता। यहीं से फिल्म का mystery angle मजबूत होता है। ऋषि का वन देवी से क्या संबंध है? क्या जंगल में सचमुच कोई supernatural शक्ति मौजूद है या फिर आस्था के नाम पर लोगों के डर का इस्तेमाल किया जा रहा है? फिल्म इसी mystery को धीरे-धीरे खोलती है।
सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया की एक्टिंग

सिद्धार्थ मल्होत्रा ने ऋषि के किरदार में अपने character के अलग-अलग emotional layers को पकड़ने की कोशिश की है। शुरुआत में नजर आने वाला एक skeptical और modern युवक धीरे-धीरे अपनी निजी परेशानियों और परिस्थितियों से जूझता पति बन जाता है। इस transformation में उनकी performance प्रभाव छोड़ती है।
वहीं तमन्ना भाटिया ममता के किरदार में फिल्म की emotional strength बनकर सामने आती हैं। मां बनने की चाह, पति के साथ खड़े रहने का जज्बा और अपनी आस्था के बीच ममता का संघर्ष तमन्ना ने सहजता से निभाया है।
श्वेता त्रिपाठी और अनूप सोनी अपने-अपने किरदारों में प्रभावी नजर आते हैं। दोनों कलाकार कहानी के emotional और social aspects को मजबूती देते हैं।फिल्म में मनीष पॉल का किरदार गंभीर माहौल के बीच हल्का-फुल्का humor लेकर आता है। उनकी natural comic timing कई जगह तनावपूर्ण narrative को balance करती है। सुनील ग्रोवर को भी पर्याप्त screen space मिला है और उन्होंने अपने किरदार के साथ न्याय किया है।
Direction में दिखता है local connect
फिल्म का निर्देशन दीपक कुमार मिश्रा ने किया है, जिन्हें 'पंचायत' जैसी लोकप्रिय series के निर्देशन के लिए जाना जाता है। वहीं कहानी अरुणाभ कुमार ने लिखी है। TVF से जुड़े इन नामों की पहचान grounded और relatable storytelling के लिए रही है।
'द वन' में भी यही local sensibility दिखाई देती है। गांव की भाषा, छठ पूजा का माहौल, घाटों की रौनक और ग्रामीण समाज की छोटी-बड़ी परतों को कहानी में जगह दी गई है। खास बात यह है कि फिल्म का cultural backdrop केवल decoration नहीं है, बल्कि narrative का अहम हिस्सा बनता है।
बिहार और पूर्वी भारत की लोक आस्था को बड़े पर्दे पर commercial storytelling के साथ जोड़ने की कोशिश फिल्म को अलग पहचान देती है। Bollywood में इस तरह की regional-rooted stories के लिए अभी भी काफी scope नजर आता है।
Music और Chhath का flavor
फिल्म का music भी इसकी कहानी के cultural setting के साथ जुड़ा हुआ है। खासतौर पर छठ से जुड़ा गीत पहले से चर्चा में रहा है और फिल्म में भी इसका इस्तेमाल कहानी के माहौल को मजबूत करता है। छठ पूजा के दृश्य, घाटों का वातावरण और traditional elements फिल्म को एक authentic cultural feel देने में मदद करते हैं।
फिल्म का first half इसकी बड़ी खूबियों में शामिल है। कहानी लगातार आगे बढ़ती रहती है और mystery को लेकर curiosity बनी रहती है। शुरुआती हिस्से में दर्शक यह जानना चाहते हैं कि वन देवी और ऋषि के बीच आखिर क्या connection है। हालांकि second half में narrative कुछ जगह stretched महसूस होता है। कुछ sequences को थोड़ा concise किया जाता तो फिल्म की overall pacing और बेहतर हो सकती थी। इसके बावजूद climax तक पहुंचते-पहुंचते mystery और emotional track कहानी को संभाल लेते हैं।
The Vvaan देखें या नहीं?
'द वन' उन दर्शकों के लिए खास तौर पर दिलचस्प हो सकती है जिन्हें folklore, mystery, emotion और Indian cultural stories पसंद हैं। फिल्म की सबसे बड़ी खासियत इसका local setting और छठ के साथ कहानी का जुड़ाव है। अगर आपको 'कांतारा' और 'तुम्बाड' जैसी फिल्मों में लोककथा और रहस्य का मिश्रण पसंद आया है, तो 'द वन' को बड़े पर्दे पर try किया जा सकता है। यह एक ऐसी family-oriented entertainer है जो मनोरंजन के साथ भारतीय लोक-संस्कृति और आस्था की एक अलग दुनिया से परिचित कराती है।











