मद्रास हाईकोर्ट ने थलापथी विजय की याचिका खारिज कर दी। 2015-16 के 1.5 करोड़ रुपये जुर्माने और नोटिस को वैध बताया। कोर्ट ने ITAT में अन्य कानूनी आधारों पर चुनौती का मार्ग छोड़ दिया।
New Delhi: अभिनेता से नेता बने थलापथी विजय की मुश्किलें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। मद्रास हाईकोर्ट ने शुक्रवार को उनकी याचिका खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने इनकम टैक्स डिपार्टमेंट द्वारा वित्तीय वर्ष 2015-16 के लिए लगाए गए 1.5 करोड़ रुपये के जुर्माने को चुनौती दी थी। यह जुर्माना कथित तौर पर 15 करोड़ रुपये की अघोषित आय के सिलसिले में लगाया गया था।
सिंगल जज जस्टिस सेंथिलकुमार राममूर्ति ने यह फैसला 23 जनवरी 2026 को सुरक्षित रखने के बाद सुनाया। कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए यह स्पष्ट किया कि नोटिस और आदेश जारी करने में कोई प्रक्रिया संबंधी कमी नहीं पाई गई।
कोर्ट ने क्या कहा
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि शो कॉज नोटिस इनकम टैक्स एक्ट की धारा 263 के तहत समय सीमा के भीतर जारी किया गया था। कोर्ट ने अन्य पहलुओं पर विचार नहीं किया और यह भी कहा कि विजय लिमिटेशन को छोड़कर अन्य आधारों पर अपीलेट ट्रिब्यूनल के सामने नोटिस और आदेश को चुनौती दे सकते हैं।
कोर्ट का तर्क यह भी था कि नोटिस और पेनल्टी प्रक्रिया में किसी भी तरह की कानूनी त्रुटि नहीं पाई गई। इस कारण न्यायालय ने याचिका खारिज करते हुए आगे की कार्रवाई के लिए अपीलेट ट्रिब्यूनल का मार्ग छोड़ दिया।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह विवाद सितंबर 2015 में थलापथी विजय के घर पर हुए इनकम टैक्स सर्च से शुरू हुआ। इसके बाद दिसंबर 2017 में एक असेसमेंट ऑर्डर पारित किया गया। दिसंबर 2018 में धारा 271AAB(1) के तहत पेनल्टी प्रक्रिया शुरू हुई।
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विजय ने इस असेसमेंट को इनकम टैक्स कमिश्नर (अपील) के सामने चुनौती दी, जहां उनका मामला आंशिक रूप से स्वीकार किया गया। इसके बाद डिपार्टमेंट ने मामला इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT) में ले गया। ITAT ने आंशिक रूप से विजय के पक्ष में फैसला दिया, जिसमें उनके फैन एसोसिएशन से जुड़े खर्च भी शामिल किए गए।
पेनल्टी और सुधार नोटिस
सर्च के दौरान सरेंडर किए गए 15 करोड़ रुपये के संबंध में पेनल्टी प्रक्रिया जारी रही। जुलाई 2019 में डिपार्टमेंट ने धारा 263 के तहत नोटिस जारी कर असेसमेंट में सुधार की मांग की। उनका तर्क था कि पेनल्टी प्रक्रिया ठीक से शुरू नहीं हुई।
हालांकि मई 2022 में ITAT ने इस सुधार को रद्द कर दिया। ITAT के अनुसार, जब पेनल्टी प्रक्रिया पहले से शुरू हो चुकी थी तो आगे सुधार की कोई आवश्यकता नहीं थी।
हाई कोर्ट में मुख्य मुद्दा
हाईकोर्ट में मामला मुख्य रूप से एक महत्वपूर्ण तकनीकी मुद्दे पर केंद्रित था। यह सवाल था कि क्या अंतिम पेनल्टी आदेश धारा 275 के तहत निर्धारित समय सीमा के भीतर पारित हुआ था या नहीं। कोर्ट ने अंतरिम चरण में पाया कि आदेश समय सीमा के भीतर था और इसी आधार पर विजय की याचिका खारिज कर दी गई।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अन्य कानूनी आधारों पर विजय को अपीलेट ट्रिब्यूनल के सामने चुनौती देने का अधिकार अभी भी सुरक्षित है।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब मामला अपीलेट ट्रिब्यूनल के सामने नए आधारों पर आगे बढ़ सकता है। विजय अपनी याचिकाओं में अन्य कानूनी तर्क पेश कर सकते हैं, लेकिन इनकम टैक्स नोटिस की वैधता को हाईकोर्ट ने मान्यता दे दी है।









