थोक महंगाई में हल्की बढ़त, नवंबर 2025 में WPI -0.32% दर्ज

थोक महंगाई में हल्की बढ़त, नवंबर 2025 में WPI -0.32% दर्ज

नवंबर 2025 में WPI महंगाई -0.32% रही जबकि खुदरा महंगाई 0.71% बढ़ी। खाद्य, फ्यूल और मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की कीमतों में नरमी रही। RBI की नीतियों और अर्थव्यवस्था पर इसका असर देखा जा रहा है।

WPI Inflation: नवंबर महीने में थोक महंगाई दर (WPI Inflation) में हल्की बढ़त दर्ज की गई है। अक्टूबर में जहां थोक महंगाई -1.21 प्रतिशत थी, वहीं नवंबर में यह बढ़कर -0.32 प्रतिशत पर पहुंच गई। हालांकि महंगाई दर अब भी नकारात्मक बनी हुई है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय (Ministry of Commerce and Industry) की ओर से सोमवार को जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, खाने-पीने की वस्तुओं, खनिज तेल, कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस, बेस मेटल्स और बिजली की कीमतों में नरमी महंगाई के नकारात्मक स्तर पर बने रहने की मुख्य वजह रही।

WPI डेटा में क्या बदला

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, नवंबर 2025 में थोक मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई दर में मासिक आधार पर सुधार देखा गया है। अक्टूबर के मुकाबले नवंबर में दालों और सब्जियों जैसी कुछ खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी हुई, जिससे WPI में हल्की तेजी आई। इसके बावजूद कुल महंगाई दर शून्य से नीचे बनी रही।

उद्योग मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि नवंबर 2025 में भी महंगाई नकारात्मक रहने की वजह खाद्य पदार्थों, खनिज तेल, कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस, बेस मेटल्स के निर्माण और बिजली की कीमतों में गिरावट है।

खाद्य वस्तुओं की महंगाई में राहत

WPI के आंकड़ों के मुताबिक, खाद्य वस्तुओं में महंगाई नवंबर में (-) 4.16 प्रतिशत रही। अक्टूबर में यह (-) 8.31 प्रतिशत थी। यानी खाद्य महंगाई में गिरावट की रफ्तार कुछ धीमी हुई है, लेकिन कीमतें अब भी पिछले साल के मुकाबले नीचे बनी हुई हैं।

सब्जियों की बात करें तो नवंबर में इनमें (-) 20.23 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। अक्टूबर में यह गिरावट (-) 34.97 प्रतिशत थी। इसका मतलब है कि सब्जियों की कीमतों में नरमी बनी हुई है, हालांकि अक्टूबर की तुलना में नवंबर में गिरावट कम रही।

दालों में नवंबर के दौरान महंगाई (-) 15.21 प्रतिशत रही। वहीं आलू की महंगाई (-) 36.14 प्रतिशत और प्याज की महंगाई (-) 64.70 प्रतिशत दर्ज की गई। ये आंकड़े बताते हैं कि रोजमर्रा की जरूरत की कई वस्तुएं अब भी सस्ती बनी हुई हैं, जिसका सीधा फायदा आम उपभोक्ताओं को मिल रहा है।

मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स में गिरावट

मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स के मामले में भी नवंबर में राहत देखने को मिली। इस श्रेणी में महंगाई घटकर 1.33 प्रतिशत रह गई, जो अक्टूबर में 1.54 प्रतिशत थी। यह गिरावट संकेत देती है कि फैक्ट्री में बनने वाले उत्पादों की लागत में भी दबाव कम हुआ है।

मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की महंगाई का असर इंडस्ट्रियल सेक्टर और उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों पर पड़ता है। इस स्तर पर बनी महंगाई उद्योगों के लिए अपेक्षाकृत संतुलित मानी जा रही है।

फ्यूल एंड पावर का असर

फ्यूल एंड पावर श्रेणी में नवंबर के दौरान (-) 2.27 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। अक्टूबर में यह गिरावट (-) 2.55 प्रतिशत थी। यानी ईंधन और बिजली की कीमतों में गिरावट बनी रही, लेकिन इसकी रफ्तार कुछ कम हुई।

कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में नरमी का सीधा असर फ्यूल एंड पावर महंगाई पर देखने को मिला है। इसका फायदा ट्रांसपोर्ट, इंडस्ट्री और बिजली उत्पादन से जुड़े सेक्टर को मिलता है।

खुदरा महंगाई नवंबर में बढ़ी

थोक महंगाई के मुकाबले खुदरा महंगाई (Retail Inflation) में नवंबर में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित खुदरा महंगाई नवंबर में बढ़कर 0.71 प्रतिशत हो गई। अक्टूबर में यह 0.25 प्रतिशत थी।

नवंबर में खुदरा महंगाई बढ़ने की मुख्य वजह सब्जियों, अंडे, मांस और मछली, मसाले, और ईंधन व बिजली की कीमतों में बढ़ोतरी रही। यानी जहां थोक स्तर पर कीमतों में नरमी दिखी, वहीं उपभोक्ता स्तर पर कुछ वस्तुएं महंगी हुईं।

महंगाई के ट्रेंड पर नजर

मुख्य महंगाई दर पिछले दो महीनों से गिरावट के दौर में बनी हुई थी। हालांकि अगस्त महीने में इसमें हल्की बढ़ोतरी देखी गई थी, जो पिछले 10 महीनों में पहली बार मासिक आधार पर आई तेजी थी। नवंबर के आंकड़े यह दिखाते हैं कि महंगाई पूरी तरह से खत्म नहीं हुई है, लेकिन यह नियंत्रण में बनी हुई है। थोक और खुदरा महंगाई के बीच अंतर भी साफ नजर आ रहा है।

RBI की नीति पर असर

खुदरा महंगाई दर पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की खास नजर रहती है। चालू वित्त वर्ष में कम महंगाई के चलते RBI को नीतिगत ब्याज दरों में 1.25 प्रतिशत अंक तक कटौती की गुंजाइश मिली है।

इस महीने की शुरुआत में RBI ने चालू वित्त वर्ष के लिए महंगाई का अनुमान 2.6 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया था। इसका कारण अर्थव्यवस्था में तेजी से हो रहा डिसइन्फ्लेशन बताया गया।

RBI मुख्य रूप से CPI आधारित खुदरा महंगाई को आधार बनाकर नीतिगत ब्याज दरों पर फैसला करता है। ऐसे में नवंबर में खुदरा महंगाई में आई बढ़ोतरी आने वाले समय में केंद्रीय बैंक के फैसलों के लिए अहम हो सकती है।

रीपो रेट में पहले ही हो चुकी कटौती

इससे पहले इस महीने RBI ने प्रमुख नीतिगत ब्याज दर यानी रेपो रेट (Repo Rate) में 25 बेसिस पॉइंट की कटौती कर इसे 5.25 प्रतिशत कर दिया था। केंद्रीय बैंक ने कहा था कि भारतीय अर्थव्यवस्था इस समय एक “रेयर गोल्डीलॉक्स पीरियड” में है, जहां ऊंची विकास दर और कम महंगाई दोनों साथ मौजूद हैं।

RBI ने पिछले सप्ताह वित्त वर्ष 2026 के लिए GDP ग्रोथ अनुमान बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत कर दिया था, जो पहले 6.8 प्रतिशत था। भारत ने सितंबर तिमाही में 8.2 प्रतिशत और जून तिमाही में 7.8 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि दर्ज की थी।

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